सम्पादकीय — कथेतर

Editorials

विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रेमचंद द्वारा लिखित सामयिक, सामाजिक और राजनीतिक सम्पादकीय।

37 रचनाएँ

मुंशी प्रेमचंद कृत मिर्जापुर कांफ्रेंस में एक महत्त्वपूर्ण प्रस्ताव का कवर इमेज
सम्पादकीय
कथेतर1931

मिर्जापुर कांफ्रेंस में एक महत्त्वपूर्ण प्रस्ताव

Mirzapur Conference Mein Ek Mahattvapoorn Prastav

मिर्जापुर कांफ्रेंस में युसुफ इमाम द्वारा प्रस्तुत उस ऐतिहासिक प्रस्ताव का समर्थन, जिसमें कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को सांप्रदायिक राजनीति से अलग रहने का आह्वान किया गया था।

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मुंशी प्रेमचंद कृत मिस्टर हरविलास शारदा का नया कानून का कवर इमेज
सम्पादकीय
कथेतर1931

मिस्टर हरविलास शारदा का नया कानून

Mr Harbilas Sharda Ka Naya Kanoon

विधवाओं को उनके दिवंगत पति की संपत्ति पर अधिकार दिलाने के लिए हरविलास शारदा द्वारा लाए जा रहे विधेयक का प्रेमचंद स्वागत करते हैं और इसे सदियों पुराने सामाजिक अन्याय का अंत बताते हैं।

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मुंशी प्रेमचंद कृत नारी-जाति के अधिकार का कवर इमेज
सम्पादकीय
कथेतर1931

नारी-जाति के अधिकार

Nari-Jaati Ke Adhikar

प्रेमचंद स्त्रियों के समान अधिकारों की पुरजोर वकालत करते हुए एक-विवाह के अनिवार्य नियम, पैतृक व पति की संपत्ति में बराबरी का हिस्सा और न्यायसंगत तलाक कानून की रूपरेखा प्रस्तुत करते हैं।

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मुंशी प्रेमचंद कृत नवीन और प्राचीन का कवर इमेज
सम्पादकीय
कथेतर1931

नवीन और प्राचीन

Naveen Aur Pracheen

प्रेमचंद का सम्पादकीय जिसमें प्राचीन भारतीय संस्कृति के निःस्वार्थ सेवा भाव और अतिथि-सत्कार की तुलना आधुनिक पश्चिमी भौतिकवाद और स्वार्थपरता से की गई है।

8 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत नया प्रेस बिल का कवर इमेज
सम्पादकीय
कथेतर1931

नया प्रेस बिल

Naya Press Bill

प्रेमचंद का सम्पादकीय जिसमें उन्होंने ब्रिटिश सरकार द्वारा लाये गए दमनकारी प्रेस बिल का विरोध करते हुए प्रेस की स्वतंत्रता और अहिंसक मूल्यों का पक्ष लिया है।

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मुंशी प्रेमचंद कृत नये सहयोगियों का स्वागत का कवर इमेज
सम्पादकीय
कथेतर1931

नये सहयोगियों का स्वागत

Naye Sahayogiyon Ka Swagat

मासिक 'त्यागभूमि' के साप्ताहिक रूपांतरण, 'अभ्युदय' की नवीन स्फूर्ति और 'प्रेमा' के हास्यांक की समीक्षा करते हुए प्रेमचंद की सम्पादकीय टिप्पणी।

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मुंशी प्रेमचंद कृत आज़ादी की लड़ाई में कौन लोग आगे हैं? का कवर इमेज
सम्पादकीय
कथेतर1930

आज़ादी की लड़ाई में कौन लोग आगे हैं?

Aazadi Ki Ladai Mein Kaun Log Aage Hain

प्रेमचंद का सम्पादकीय 'आज़ादी की लड़ाई में कौन लोग आगे हैं?' विश्वविद्यालयी बुद्धिजीवियों की कायरता के विपरीत आम मजदूरों, दुकानदारों और राष्ट्रीय संस्थाओं के छात्रों की अग्रणी भूमिका की सराहना करता है।

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मुंशी प्रेमचंद कृत अगर तुम क्षत्रिय हो का कवर इमेज
सम्पादकीय
कथेतर1930

अगर तुम क्षत्रिय हो

Agar Tum Kshatriya Ho

प्रेमचंद ने क्षत्रिय युवकों को ब्रिटिश अफसरों की चाटुकारिता त्यागकर दुर्बलों की रक्षा और सत्य के राष्ट्रीय संग्राम में वीरों की भांति कूदने का ओजस्वी आह्वान किया है।

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