उपन्यास सम्राट • कलम का सिपाही

मुंशी प्रेमचंद

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मुंशी प्रेमचंद, जिन्हें ‘उपन्यास सम्राट’ कहा जाता है, आधुनिक हिंदी और उर्दू साहित्य के सबसे महत्वपूर्ण रचनाकारों में से एक हैं। ग्रामीण भारत के जीवन, मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक यथार्थ को अपनी रचनाओं में जीवंत करने वाले प्रेमचंद आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं।

निःशुल्क पढ़ें: गोदान, गबन, कफ़न, ईदगाह, पंच परमेश्वर एवं 300+ कहानियाँ

मुंशी प्रेमचंद

300+

कहानियाँ

14

उपन्यास

1880-1936

जीवन काल

100+

वर्षों की विरासत

प्रेमचंद की रचनाएँ — वर्गानुसार

उपन्यास, कहानियाँ, निबंध, नाटक एवं अनुवाद — संपूर्ण साहित्यिक संकलन का आनंद लें

लोकप्रिय रचनाएँ —

गोदान, गबन, कफ़न, ईदगाह जैसी प्रेमचंद की सबसे चर्चित और लोकप्रिय कृतियाँ

मुंशी प्रेमचंद कृत निर्मला का कवर इमेज
विशेष
उपन्यास1927

निर्मला

Nirmala

प्रेमचंद का उपन्यास 'निर्मला' एक युवा लड़की की त्रासदी है जिसकी शादी दहेज के कारण एक बूढ़े विधुर से होती है। यह दहेज प्रथा की बुराई का मार्मिक चित्रण है।

7 घंटे 11 मिनट12 अध्याय
मुंशी प्रेमचंद कृत दामुल का कैदी का कवर इमेज
विशेष
कहानी1932

दामुल का कैदी

Damul Ka Kaidi

प्रेमचंद की 'दामुल का कैदी' वर्ग-संघर्ष, मजदूर-शोषण, नैतिक जागरण और प्रायश्चित की अत्यंत प्रभावशाली कहानी है। धनी मिल-मालिक सेठ खूबचंद भारी लाभ के बावजूद मजदूरों की मजदूरी घटा देता है और हड़ताल के उत्तर में पुलिस की हिंसा का सहारा लेता है। मजदूरों के नेता गोपीनाथ के सामने आने पर खूबचंद उसे गोली मार देता है। लेकिन मृत्यु के क्षणों में भी गोपीनाथ उत्तेजित मजदूरों को खूबचंद की हत्या करने से रोक देता है। एक निर्दोष और उदार मनुष्य की हत्या का अपराध खूबचंद के अंत:करण को झकझोर देता है। वह स्वयं अपना अपराध स्वीकार करता है और चौदह वर्ष के काले पानी की सजा पाता है। उसके पंद्रह वर्षों के निर्वासन में उसकी सारी संपत्ति नष्ट हो जाती है और उसकी पत्नी प्रमिला कठिन परिस्थितियों में बेटे कृष्णचंद्र का पालन करती है। लौटने पर खूबचंद देखता है कि उसका बेटा गोपीनाथ जैसा ही रूप और स्वभाव रखता है। कृष्णचंद्र मजदूरों का नेता बनता है और अंततः हड़ताल के दौरान गोलियों से मारा जाता है। खूबचंद अपने बेटे के बलिदान को शोक के बजाय न्याय के पक्ष में वीरगति के रूप में स्वीकार करता है। जो व्यक्ति कभी मजदूर नेता को गोली मार चुका था, वही अंत में मजदूरों के अधिकार के पक्ष में खड़ा हो जाता है।

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प्रेमचंद का जीवन परिचय

मुंशी प्रेमचंद (1880-1936) के जीवन के मुख्य पड़ाव

1880

जन्म

वाराणसी के निकट लमही गाँव में धनपत राय के रूप में जन्म।

1898

अध्यापन

शिक्षक के रूप में नौकरी शुरू की।

1903

साहित्यिक शुरुआत

‘ज़माना’ पत्रिका में पहली कहानी प्रकाशित हुई।

1907

सोज़-ए-वतन

कहानियों का यह संग्रह प्रकाशित हुआ, जिसे ब्रिटिश सरकार ने प्रतिबंधित कर दिया।

1910

‘प्रेमचंद’ नाम अपनाया

औपनिवेशिक सेंसरशिप से बचने के लिए ‘प्रेमचंद’ नाम से लिखना शुरू किया।

1918

सेवासदन

पहला प्रमुख हिंदी उपन्यास ‘सेवासदन’ प्रकाशित हुआ।

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