गबन
Gaban
प्रेमचंद का उपन्यास 'गबन' रमानाथ की कहानी है जो अपनी पत्नी जालपा के गहनों के शौक को पूरा करने के लिए गबन कर बैठता है।
उपन्यास सम्राट • कलम का सिपाही
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मुंशी प्रेमचंद, जिन्हें ‘उपन्यास सम्राट’ कहा जाता है, आधुनिक हिंदी और उर्दू साहित्य के सबसे महत्वपूर्ण रचनाकारों में से एक हैं। ग्रामीण भारत के जीवन, मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक यथार्थ को अपनी रचनाओं में जीवंत करने वाले प्रेमचंद आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं।
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300+
कहानियाँ
14
उपन्यास
1880-1936
जीवन काल
100+
वर्षों की विरासत
उपन्यास, कहानियाँ, निबंध, नाटक एवं अनुवाद — संपूर्ण साहित्यिक संकलन का आनंद लें
Novels
भारतीय समाज, ग्रामीण जीवन और मानवीय संवेदनाओं को गहराई से उकेरते प्रेमचंद के कालजयी उपन्यास।
13 रचनाएँ →
Short Stories
भारतीय जनजीवन और समाज की यथार्थ तस्वीर प्रस्तुत करती प्रेमचंद की 300 से अधिक कालजयी कहानियाँ।
314 रचनाएँ →
Non-Fictions
साहित्य, समाज, राजनीति और समकालीन ज्वलंत मुद्दों पर प्रेमचंद की गंभीर वैचारिक कथेतर रचनाएँ।
93 रचनाएँ →
Plays
सामाजिक समस्याओं, धर्म और राष्ट्रीय चेतना को मंच पर जीवंत करते प्रेमचंद के प्रसिद्ध नाटक।
3 रचनाएँ →
Translations
विश्व साहित्य के महान रचनाकारों की कालजयी कृतियों के प्रेमचंद द्वारा किए गए उत्कृष्ट अनुवाद।
9 रचनाएँ →
गोदान, गबन, कफ़न, ईदगाह जैसी प्रेमचंद की सबसे चर्चित और लोकप्रिय कृतियाँ
Gaban
प्रेमचंद का उपन्यास 'गबन' रमानाथ की कहानी है जो अपनी पत्नी जालपा के गहनों के शौक को पूरा करने के लिए गबन कर बैठता है।
Godaan
प्रेमचंद की महान रचना 'गोदान' किसान होरी की कहानी है जो जीवन भर गाय की कामना करता है। यह ग्रामीण भारत के शोषण का मार्मिक चित्रण है।
Karmabhoomi
प्रेमचंद का उपन्यास 'कर्मभूमि' अमरकांत की कहानी है जो अपना संपन्न जीवन छोड़कर स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए लड़ता है।
Nirmala
प्रेमचंद का उपन्यास 'निर्मला' एक युवा लड़की की त्रासदी है जिसकी शादी दहेज के कारण एक बूढ़े विधुर से होती है। यह दहेज प्रथा की बुराई का मार्मिक चित्रण है।
Rangbhoomi
प्रेमचंद का महाकाव्यात्मक उपन्यास 'रंगभूमि' सूरदास नामक एक अंधे भिखारी की कहानी है जो अंग्रेज़ी औद्योगीकरण का विरोध करता है।
Damul Ka Kaidi
प्रेमचंद की 'दामुल का कैदी' वर्ग-संघर्ष, मजदूर-शोषण, नैतिक जागरण और प्रायश्चित की अत्यंत प्रभावशाली कहानी है। धनी मिल-मालिक सेठ खूबचंद भारी लाभ के बावजूद मजदूरों की मजदूरी घटा देता है और हड़ताल के उत्तर में पुलिस की हिंसा का सहारा लेता है। मजदूरों के नेता गोपीनाथ के सामने आने पर खूबचंद उसे गोली मार देता है। लेकिन मृत्यु के क्षणों में भी गोपीनाथ उत्तेजित मजदूरों को खूबचंद की हत्या करने से रोक देता है। एक निर्दोष और उदार मनुष्य की हत्या का अपराध खूबचंद के अंत:करण को झकझोर देता है। वह स्वयं अपना अपराध स्वीकार करता है और चौदह वर्ष के काले पानी की सजा पाता है। उसके पंद्रह वर्षों के निर्वासन में उसकी सारी संपत्ति नष्ट हो जाती है और उसकी पत्नी प्रमिला कठिन परिस्थितियों में बेटे कृष्णचंद्र का पालन करती है। लौटने पर खूबचंद देखता है कि उसका बेटा गोपीनाथ जैसा ही रूप और स्वभाव रखता है। कृष्णचंद्र मजदूरों का नेता बनता है और अंततः हड़ताल के दौरान गोलियों से मारा जाता है। खूबचंद अपने बेटे के बलिदान को शोक के बजाय न्याय के पक्ष में वीरगति के रूप में स्वीकार करता है। जो व्यक्ति कभी मजदूर नेता को गोली मार चुका था, वही अंत में मजदूरों के अधिकार के पक्ष में खड़ा हो जाता है।
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मुंशी प्रेमचंद (1880-1936) के जीवन के मुख्य पड़ाव
1880
वाराणसी के निकट लमही गाँव में धनपत राय के रूप में जन्म।
1898
शिक्षक के रूप में नौकरी शुरू की।
1903
‘ज़माना’ पत्रिका में पहली कहानी प्रकाशित हुई।
1907
कहानियों का यह संग्रह प्रकाशित हुआ, जिसे ब्रिटिश सरकार ने प्रतिबंधित कर दिया।
1910
औपनिवेशिक सेंसरशिप से बचने के लिए ‘प्रेमचंद’ नाम से लिखना शुरू किया।
1918
पहला प्रमुख हिंदी उपन्यास ‘सेवासदन’ प्रकाशित हुआ।
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