दक्षिण भारत में हमारी हिन्दी प्रचार-यात्रा
Dakshin Bharat Mein Hamari Hindi Prachar Yatra
दक्षिण भारत में हिन्दी प्रचार सभा के कार्यों और वहां के लोगों के उत्साह को अपनी आंखों से देखकर प्रेमचंद द्वारा लिखा गया प्रेरक यात्रा-संस्मरण।
Memoirs
प्रेमचंद के निजी संस्मरण, संस्मरणपरक रेखाचित्र और यात्रा वृत्तांत।
6 रचनाएँ
Dakshin Bharat Mein Hamari Hindi Prachar Yatra
दक्षिण भारत में हिन्दी प्रचार सभा के कार्यों और वहां के लोगों के उत्साह को अपनी आंखों से देखकर प्रेमचंद द्वारा लिखा गया प्रेरक यात्रा-संस्मरण।
Meri Raseeli Pustakein
अपने अध्ययन-प्रेम और बचपन से लेकर युवावस्था तक मन को छू लेने वाली प्रिय पुस्तकों पर प्रेमचंद का आत्मीय और रोचक संस्मरण।
Munshi Bishun Narayan Bhargav
नवलकिशोर प्रेस के अधिष्ठाता मुंशी बिशुन नारायण भार्गव के व्यक्तित्व, उदारता और भारतीय प्रकाशन जगत में योगदान पर प्रेमचंद की श्रद्धांजलि।
Gurukul Kangri Mein Teen Din
हरिद्वार स्थित गुरुकुल कांगड़ी में बिताए तीन दिनों का प्रेमचंद द्वारा लिखा गया सजीव संस्मरण, जिसमें वहां की सादगी, अनुशासन और शिक्षा-प्रणाली की सराहना की गई है।
Deshbandhu Chittaranjan Das
महान स्वतंत्रता सेनानी देशबन्धु चितरंजन दास के निधन पर प्रेमचंद की भावभीनी श्रद्धांजलि और उनके अप्रतिम राष्ट्रप्रेम व त्याग का मूल्यांकन।
Munshi Gorakhprasad Ibrat
गोरखपुर के विख्यात वकील, निस्पृह सिद्धहस्त शायर मुंशी गोरखप्रसाद 'इबरत' (फ़िराक़ गोरखपुरी के पिता) के व्यक्तित्व, दीवान और उनकी सादगीपूर्ण मसनवियों व ग़ज़लों पर मुंशी प्रेमचंद का संस्मरणात्मक लेख।