Cover Image for Naye Sahayogiyon Ka Swagat (नये सहयोगियों का स्वागत) by Munshi Premchand - Non-Fiction
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सम्पादकीय•1931•2 मिनट

नये सहयोगियों का स्वागत

Naye Sahayogiyon Ka Swagat

मासिक 'त्यागभूमि' के साप्ताहिक रूपांतरण, 'अभ्युदय' की नवीन स्फूर्ति और 'प्रेमा' के हास्यांक की समीक्षा करते हुए प्रेमचंद की सम्पादकीय टिप्पणी।

Work Details

प्रकार: सम्पादकीय
वर्ष: 1931
पठन समय: 2 मिनट (183 शब्द)

मासिक 'त्यागभूमि' को साप्ताहिक रूप में देखकर हमें कुछ विशेष आनन्द नहीं हुआ। 'त्यागभूमि' ने मासिक पत्रिकाओं में विशेष स्थान प्राप्त कर लिया था। उसने अपने लिए एक नया क्षेत्र निकाल लिया था। साप्ताहिक तो इस ढंग के और भी कितने ही हैं फिर भी यह समझकर कि साप्ताहिक रूप में पत्रिका की उपयोगिता और बढ़ गई होगी, हम इसका स्वागत करते हैं।

'अभ्युदय' में कुछ दिनों से सजीवता के लक्षण नज़र आने लगे हैं। उसका गेटअप, लेखों की शैली और साहित्यिक रंग ने उसमें एक नई स्फूर्ति डाल दी है। प्रत्येक अंक में दो-एक अच्छे लेख पढ़ने को मिल जाते हैं। हमारे खयाल में साप्ताहिक पत्रों में खबरें देने के मोह को छोड़ देना चाहिए, खासकर ऐसी खबरें जिनका हमसे कोई सम्बन्ध नहीं।

'प्रेमा' का नया अंक 'हास्यांक' के रूप में निकला और सुन्दर निकला है। मगर टाइटल पर 'हास्य' के देवता का जो चित्र दिया गया है वह कुछ जंचता नहीं। हरिऔध जी का 'ब्रजभाषा में हास्य-रस' शीर्षक लेख बड़ा ही मनोरंजक और भावपूर्ण है।


प्रकाशन इतिहास

[सम्पादकीय। 'हंस', मई, 1931 में प्रकाशित। 'प्रेमचंद का अप्राप्य साहित्य' खण्ड-2 में संकलित।]

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शोध एवं शोध-पत्रों के लिए अकादमिक संदर्भ

Premchand, Munshi. "नये सहयोगियों का स्वागत." *Munshi Premchand Digital Archive*, 1931, https://munshipremchand.com/works/non-fictions/naye-sahayogiyon-ka-swagat. Accessed 22 Sep. 2026.