सामाजिक प्रश्नों में हम सरकारी हस्तक्षेप के पक्षपाती नहीं और हमारे विचार में विवाह की अवस्था का कानून जारी कराके हमने वह काम कानून से किया, जो जनता के विचारों के सुधार से ही हो सकता है। मगर विधवाओं को अपने स्वर्गारोही पति की जायदाद पर अधिकार दिलाने का जो बिल मि० शारदा पेश करने जा रहे हैं उससे एक बड़े भारी सामाजिक अन्याय का परिशोध होगा। हिन्दू समाज ने अपनी देवियों के साथ बहुत दिनों जुल्म किया और अब इस जुल्म की जड़ खोदने में विलम्ब न करना चाहिए। हमें आशा है, मि० शारदा के इस बिल का देश स्वागत करेगा।
प्रकाशन इतिहास
[सम्पादकीय। 'हंस', जनवरी 1931 में प्रकाशित। 'विविध प्रसंग' भाग-3 में संकलित।]
