महाजनी सभ्यता
Mahajani Sabhyata
प्रेमचंद का अंतिम और ऐतिहासिक निबंध जिसमें उन्होंने पूंजीवादी शोषण, धन-लोलुपता और अमानवीय 'महाजनी सभ्यता' पर तीखा प्रहार किया है।
Essays
साहित्य, भाषा, शिक्षा और समाज पर प्रेमचंद के गंभीर वैचारिक निबंध।
22 रचनाएँ
Mahajani Sabhyata
प्रेमचंद का अंतिम और ऐतिहासिक निबंध जिसमें उन्होंने पूंजीवादी शोषण, धन-लोलुपता और अमानवीय 'महाजनी सभ्यता' पर तीखा प्रहार किया है।
Baatchit Karne Ki Kala
प्रेमचंद बातचीत के सूक्ष्म मनोविज्ञान और शिष्टाचार पर प्रकाश डालते हुए बताते हैं कि प्रभावी और मधुर वार्तालाप मानव जीवन को कैसे समृद्ध करता है।
Kahani Kala - 3
कहानी विधा के स्वरूप, कथानक और मनोवैज्ञानिक यथार्थ पर प्रेमचंद का प्रसिद्ध सैद्धांतिक विवेचन, जो कथाकारों के लिए मार्गदर्शक है।
Dukhi Jeevan
सुख और दुःख के दार्शनिक पहलुओं पर प्रेमचंद का गंभीर निबंध, जिसमें वे परोपकार और सेवा को ही जीवन की सच्ची शांति का मार्ग बताते हैं।
Jeevan Aur Sahitya Mein Ghrina Ka Sthan
जीवन और साहित्य में अन्याय व अनाचार के प्रति घृणा की नैतिक व रचनात्मक उपयोगिता का प्रेमचंद द्वारा किया गया गहन मनोवैज्ञानिक विश्लेषण।
Aatm-Katha Kya Sahitya Ka Ang Nahin Hai?
प्रेमचंद आत्मकथा को साहित्य का अत्यंत उपयोगी व प्रेरक अंग सिद्ध करते हुए 'हंस' के आत्मकथांक की सार्थकता और महत्ता को रेखांकित करते हैं।
Jeevan Mein Sahitya Ka Sthan
प्रेमचंद का मौलिक निबंध जिसमें वे जीवन और साहित्य के अंतर्संबंधों को स्पष्ट करते हुए सत्य, शिव और सुंदर को साहित्य का ध्येय बताते हैं।
Jeevan Saar
प्रेमचंद का आत्मपरक चिंतन जिसमें वे अपने जीवन की सरलता, अभावों, संघर्षों और साहित्य-साधना के प्रेरक अनुभवों को साझा करते हैं।
Mansik Paradhinata
औपनिवेशिक मानसिकता और मानसिक दासता के खतरों पर प्रेमचंद का विचारोत्तेजक निबंध, जिसमें उन्होंने वास्तविक स्वराज्य हेतु सांस्कृतिक स्वाभिमान पर बल दिया।
Bachchon Ko Swadhin Banao
प्रेमचंद बच्चों में स्वावलंबन और स्वतंत्रता की भावना विकसित करने पर बल देते हैं और माता-पिता के अत्यधिक कठोर नियंत्रण की आलोचना करते हैं।
Hindi Rangmanch
हिन्दी रंगमंच के इतिहास, वर्तमान पतन और भविष्य की संभावनाओं पर प्रेमचंद का समीक्षात्मक लेख, जिसमें उच्च साहित्यिक नाटकों के मंचन पर बल दिया गया है।
Islami Sabhyata
इस्लामी सभ्यता के ऐतिहासिक योगदान, समानता और न्याय के सिद्धांतों पर प्रेमचंद का ज्ञानवर्धक लेख, जिसका उद्देश्य दोनों समुदायों के बीच समझ बढ़ाना है।