सम्पादकीय — कथेतर

Editorials

विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रेमचंद द्वारा लिखित सामयिक, सामाजिक और राजनीतिक सम्पादकीय।

37 रचनाएँ

मुंशी प्रेमचंद कृत अंग्रेजी भाषा का रोग का कवर इमेज
सम्पादकीय
कथेतर1931

अंग्रेजी भाषा का रोग

Angrezi Bhasha Ka Rog

प्रेमचंद की तीखी टिप्पणी जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय कार्यकर्ताओं और शिक्षित वर्ग में अंग्रेजी के बढ़ते रोग और मानसिक दासता की आलोचना करते हुए राष्ट्रभाषा हिन्दी को अपनाने पर बल दिया है।

3 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत बम्बई के एक मजिस्ट्रेट का भ्रम का कवर इमेज
सम्पादकीय
कथेतर1931

बम्बई के एक मजिस्ट्रेट का भ्रम

Bombay Ke Ek Magistrate Ka Bhram

शोलापुर दिवस मनाने पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं को दंड देने वाले बम्बई के मजिस्ट्रेट के तर्क का खंडन करते हुए प्रेमचंद अन्याय के विरुद्ध रोने और विरोध करने के स्वाभाविक अधिकार का समर्थन करते हैं।

1 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत कांग्रेस ज़िन्दाबाद का कवर इमेज
सम्पादकीय
कथेतर1931

कांग्रेस ज़िन्दाबाद

Congress Zindabad

दांडी मार्च के एक वर्ष पूरे होने और गांधी-इरविन समझौते पर प्रेमचंद कांग्रेस की नैतिक व राजनीतिक विजय का अभिनंदन करते हैं और सत्याग्रह में महिलाओं की ऐतिहासिक भूमिका की सराहना करते हैं।

7 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत देश की वर्तमान परिस्थिति का कवर इमेज
सम्पादकीय
कथेतर1931

देश की वर्तमान परिस्थिति

Desh Ki Vartaman Paristhiti

आर्थिक संकट के समय किसानों को भड़काऊ राजनीति और हिंसा से बचाकर महात्मा गांधी के अहिंसक व सत्य के मार्ग पर अडिग रहने का आह्वान करता सम्पादकीय।

5 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत फौजी कालेज की आयोजना का कवर इमेज
सम्पादकीय
कथेतर1931

फौजी कालेज की आयोजना

Fauji College Ki Aayojana

प्रेमचंद की टिप्पणी जिसमें उन्होंने भारतीय सेना के सैन्यीकरण और फौजी कालेज की ब्रिटिश योजना की धीमी गति तथा औपनिवेशिक नीयत की आलोचना की है।

3 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत गोलमेज़-परिषद् में गोलमाल का कवर इमेज
सम्पादकीय
कथेतर1931

गोलमेज़-परिषद् में गोलमाल

Golmez Parishad Mein Golmal

प्रेमचंद का सम्पादकीय जिसमें गोलमेज परिषद् के साम्प्रदायिक गतिरोध, ब्रिटिश चालों और शिक्षित वर्ग की स्वार्थपरता की तीखी भर्त्सना करते हुए राष्ट्रीय एकता का आह्वान किया गया है।

11 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत गोरी जातियों का प्रभाव क्यों कम हो रहा है का कवर इमेज
सम्पादकीय
कथेतर1931

गोरी जातियों का प्रभाव क्यों कम हो रहा है

Gori Jatiyon Ka Prabhav Kyon Kam Ho Raha Hai

लॉर्ड इरविन के कथन के संदर्भ में भारत में गोरी जातियों और पश्चिमी साम्राज्यवाद के नैतिक व सांस्कृतिक पतन के कारणों का प्रेमचंद द्वारा गहरा विश्लेषण।

6 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत हमारे नेताओं की बहकी बातें का कवर इमेज
सम्पादकीय
कथेतर1931

हमारे नेताओं की बहकी बातें

Hamare Netaon Ki Bahki Batein

मौलाना शौकत अली और सरदार पटेल जैसे शीर्ष नेताओं के उत्तेजक व गैर-जिम्मेदाराना बयानों की आलोचना करते हुए संयम व विनम्रता का आह्वान करता प्रेमचंद का सम्पादकीय।

5 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत कुछ अपने विषय में का कवर इमेज
सम्पादकीय
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कुछ अपने विषय में

Kuchh Apne Vishay Mein

'हंस' के प्रथम वर्ष की पूर्णता पर प्रेमचंद का आत्मचिंतन, जिसमें उन्होंने पत्रिका के साहित्यिक आदर्शों और व्यवसायिकता से परे जनसेवा के संकल्प को दोहराया है।

3 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत महात्माजी की विजय-यात्रा का कवर इमेज
सम्पादकीय
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महात्माजी की विजय-यात्रा

Mahatma Ji Ki Vijay Yatra

प्रेमचंद का सम्पादकीय जिसमें महात्मा गांधी की लंदन गोलमेज यात्रा के संदर्भ में ब्रिटिश कूटनीति और साम्प्रदायिक एकता की अनिवार्य आवश्यकता का विश्लेषण किया गया है।

7 मिनट