कथेतर

Non-Fictions

साहित्य, समाज, राजनीति और समकालीन ज्वलंत मुद्दों पर प्रेमचंद की गंभीर वैचारिक कथेतर रचनाएँ।

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मुंशी प्रेमचंद कृत देहातों में प्रोपेगैंडा की ज़रूरत का कवर इमेज
सम्पादकीय
कथेतर1930

देहातों में प्रोपेगैंडा की ज़रूरत

Dehaton Mein Propaganda Ki Zaroorat

नमक सत्याग्रह के दौरान स्वतंत्रता आंदोलन और राजनीतिक चेतना को शहरों से आगे देश के गांवों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर प्रेमचंद का सम्पादकीय।

2 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत डोमिनियन और स्वराज्य का कवर इमेज
सम्पादकीय
कथेतर1930

डोमिनियन और स्वराज्य

Dominion Aur Swarajya

प्रेमचंद का सम्पादकीय 'डोमिनियन और स्वराज्य' अंग्रेजों और अभिजात वर्ग द्वारा समर्थित 'डोमिनियन स्टेटस' का विरोध करते हुए जनसाधारण और किसानों के सच्चे 'स्वराज्य' का समर्थन करता है।

3 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत गोलमेज-कांफ्रेंस का कवर इमेज
सम्पादकीय
कथेतर1930

गोलमेज-कांफ्रेंस

Golmez Conference

प्रेमचंद ने लंदन में आयोजित गोलमेज सम्मेलन का विश्लेषण करते हुए भारतीय प्रतिनिधियों को ब्रिटिश सरकार के दिखावटी सुधारों और रक्षा-वित्त सम्बन्धी छलपूर्ण 'सेफगार्ड्स' से सावधान किया है।

4 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत 'हंस' के जन्म पर का कवर इमेज
सम्पादकीय
कथेतर1930

'हंस' के जन्म पर

Hans Ke Janm Par

प्रेमचंद का 'हंस' पत्रिका के प्रवेशांक का सम्पादकीय ''हंस' के जन्म पर' नवयुग के आगमन में पत्रिका की नीति और स्वाधीनता संग्राम में साहित्य की भूमिका को रेखांकित करता है।

4 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत हिन्दू-मुस्लिम बांट-बखरे का प्रश्न का कवर इमेज
सम्पादकीय
कथेतर1930

हिन्दू-मुस्लिम बांट-बखरे का प्रश्न

Hindu-Muslim Bant-Bakhre Ka Prashna

हिन्दू-मुस्लिम अधिकारों और प्रतिनिधित्व के बंटवारे के प्रश्न पर राष्ट्रीय एकता और उदारता का समर्थन करता प्रेमचंद का सम्पादकीय।

3 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत जेल सुधार का कवर इमेज
सम्पादकीय
कथेतर1930

जेल सुधार

Jail Sudhar

प्रेमचंद का सम्पादकीय 'जेल सुधार' औपनिवेशिक जेल व्यवस्था के वर्गीकरण पर प्रहार करते हुए जेलों को दंडालय के बजाय चरित्र-सुधार केंद्र बनाने की वकालत करता है।

2 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत जापान के लोग, लम्बे हो रहे हैं का कवर इमेज
सम्पादकीय
कथेतर1930

जापान के लोग, लम्बे हो रहे हैं

Japan Ke Log Lambe Ho Rahe Hain

प्रेमचंद का सम्पादकीय नोट 'जापान के लोग, लम्बे हो रहे हैं' बेहतर खान-पान से जापानियों के शारीरिक विकास की तुलना भारत में गरीबी और कुपोषण की त्रासदी से करता है।

1 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत क्या मुसलमान कांग्रेस के साथ नहीं हैं? का कवर इमेज
सम्पादकीय
कथेतर1930

क्या मुसलमान कांग्रेस के साथ नहीं हैं?

Kya Musalman Congress Ke Saath Nahin Hain

प्रेमचंद का सम्पादकीय 'क्या मुसलमान कांग्रेस के साथ नहीं हैं?' औपनिवेशिक दुष्प्रचार का खंडन करते हुए स्वाधीनता संग्राम में मुसलमानों की व्यापक और सक्रिय भागीदारी को सप्रमाण सिद्ध करता है।

7 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत महात्मा जी का वाइसराय से निवेदन का कवर इमेज
सम्पादकीय
कथेतर1930

महात्मा जी का वाइसराय से निवेदन

Mahatma Ji Ka Viceroy Se Nivedan

प्रेमचंद का सम्पादकीय 'महात्मा जी का वाइसराय से निवेदन' दांडी मार्च से पूर्व वाइसराय को लिखे गए गांधीजी के ऐतिहासिक पत्र और शोषित जनता के अधिकारों का विश्लेषण करता है।

5 मिनट