हिन्दुस्तान के लोग दिन दिन दुर्बल होते जाते हैं। लेकिन जापान के एक पत्र ने लिखा है-जापानियों का डील धीरे-धीरे ऊंचा हो रहा है। बलिष्ठ तो वे पहले भी होते थे, लेकिन अब व ऊंचे भी हो रहे हैं। इसका कारण है, रहन- सहन में सुधार। अब वे पहले से अच्छा और पुष्टिकारक भोजन पाते हैं, ज्यादा माफ ओर हवादार घरों में रहते हैं, आर्थिक चिन्ताओं का भार भी कम हो गया है। जहां अस्सी फी सैकड़े आदमी आधे-पेट भोजन नहीं पाते, वे क्या बढेंगे और क्या मोटाएंगे? शायद सो वर्ष क॑ बाद (८-दुस्तानियों की कहानी रह जायगी।
प्रकाशन इतिहास
[सम्पादकीय। 'हंस', मार्च, 1930 में प्रकाशित। 'साहित्य का उद्देश्य' (प्रथम संस्करण) में संकलित। बाद के संस्करणों से हटाया गया। 'प्रेमचंद का अप्राप्य साहित्य' खण्ड-2 में संकलित।]
