कथेतर

Non-Fictions

साहित्य, समाज, राजनीति और समकालीन ज्वलंत मुद्दों पर प्रेमचंद की गंभीर वैचारिक कथेतर रचनाएँ।

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मुंशी प्रेमचंद कृत मुंशी बिशुन नारायण भार्गव का कवर इमेज
संस्मरण
कथेतर1931

मुंशी बिशुन नारायण भार्गव

Munshi Bishun Narayan Bhargav

नवलकिशोर प्रेस के अधिष्ठाता मुंशी बिशुन नारायण भार्गव के व्यक्तित्व, उदारता और भारतीय प्रकाशन जगत में योगदान पर प्रेमचंद की श्रद्धांजलि।

11 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत नारी-जाति के अधिकार का कवर इमेज
सम्पादकीय
कथेतर1931

नारी-जाति के अधिकार

Nari-Jaati Ke Adhikar

प्रेमचंद स्त्रियों के समान अधिकारों की पुरजोर वकालत करते हुए एक-विवाह के अनिवार्य नियम, पैतृक व पति की संपत्ति में बराबरी का हिस्सा और न्यायसंगत तलाक कानून की रूपरेखा प्रस्तुत करते हैं।

3 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत नवीन और प्राचीन का कवर इमेज
सम्पादकीय
कथेतर1931

नवीन और प्राचीन

Naveen Aur Pracheen

प्रेमचंद का सम्पादकीय जिसमें प्राचीन भारतीय संस्कृति के निःस्वार्थ सेवा भाव और अतिथि-सत्कार की तुलना आधुनिक पश्चिमी भौतिकवाद और स्वार्थपरता से की गई है।

8 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत नया प्रेस बिल का कवर इमेज
सम्पादकीय
कथेतर1931

नया प्रेस बिल

Naya Press Bill

प्रेमचंद का सम्पादकीय जिसमें उन्होंने ब्रिटिश सरकार द्वारा लाये गए दमनकारी प्रेस बिल का विरोध करते हुए प्रेस की स्वतंत्रता और अहिंसक मूल्यों का पक्ष लिया है।

4 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत नये सहयोगियों का स्वागत का कवर इमेज
सम्पादकीय
कथेतर1931

नये सहयोगियों का स्वागत

Naye Sahayogiyon Ka Swagat

मासिक 'त्यागभूमि' के साप्ताहिक रूपांतरण, 'अभ्युदय' की नवीन स्फूर्ति और 'प्रेमा' के हास्यांक की समीक्षा करते हुए प्रेमचंद की सम्पादकीय टिप्पणी।

2 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत आज़ादी की लड़ाई में कौन लोग आगे हैं? का कवर इमेज
सम्पादकीय
कथेतर1930

आज़ादी की लड़ाई में कौन लोग आगे हैं?

Aazadi Ki Ladai Mein Kaun Log Aage Hain

प्रेमचंद का सम्पादकीय 'आज़ादी की लड़ाई में कौन लोग आगे हैं?' विश्वविद्यालयी बुद्धिजीवियों की कायरता के विपरीत आम मजदूरों, दुकानदारों और राष्ट्रीय संस्थाओं के छात्रों की अग्रणी भूमिका की सराहना करता है।

4 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत आज़ादी की लड़ाई का कवर इमेज
लेख
कथेतर1930

आज़ादी की लड़ाई

Aazadi Ki Ladai

महात्मा गांधी के दांडी मार्च और नमक सत्याग्रह पर प्रेमचंद का ओजस्वी लेख, जिसमें देशवासियों से स्वाधीनता संग्राम में सर्वस्व समर्पित करने का आह्वान किया गया है।

25 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत अगर तुम क्षत्रिय हो का कवर इमेज
सम्पादकीय
कथेतर1930

अगर तुम क्षत्रिय हो

Agar Tum Kshatriya Ho

प्रेमचंद ने क्षत्रिय युवकों को ब्रिटिश अफसरों की चाटुकारिता त्यागकर दुर्बलों की रक्षा और सत्य के राष्ट्रीय संग्राम में वीरों की भांति कूदने का ओजस्वी आह्वान किया है।

4 मिनट