मुंशी बिशुन नारायण भार्गव
Munshi Bishun Narayan Bhargav
नवलकिशोर प्रेस के अधिष्ठाता मुंशी बिशुन नारायण भार्गव के व्यक्तित्व, उदारता और भारतीय प्रकाशन जगत में योगदान पर प्रेमचंद की श्रद्धांजलि।
Non-Fictions
साहित्य, समाज, राजनीति और समकालीन ज्वलंत मुद्दों पर प्रेमचंद की गंभीर वैचारिक कथेतर रचनाएँ।
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Munshi Bishun Narayan Bhargav
नवलकिशोर प्रेस के अधिष्ठाता मुंशी बिशुन नारायण भार्गव के व्यक्तित्व, उदारता और भारतीय प्रकाशन जगत में योगदान पर प्रेमचंद की श्रद्धांजलि।
Nari-Jaati Ke Adhikar
प्रेमचंद स्त्रियों के समान अधिकारों की पुरजोर वकालत करते हुए एक-विवाह के अनिवार्य नियम, पैतृक व पति की संपत्ति में बराबरी का हिस्सा और न्यायसंगत तलाक कानून की रूपरेखा प्रस्तुत करते हैं।
Navayug-1
राजनीतिक नवयुग के आरंभ में काशी और कानपुर के भीषण दंगों, प्रशासनिक उपेक्षा और हिन्दू-मुस्लिम एकता की अनिवार्य आवश्यकता पर प्रेमचंद का गहन विश्लेषण।
Naveen Aur Pracheen
प्रेमचंद का सम्पादकीय जिसमें प्राचीन भारतीय संस्कृति के निःस्वार्थ सेवा भाव और अतिथि-सत्कार की तुलना आधुनिक पश्चिमी भौतिकवाद और स्वार्थपरता से की गई है।
Naya Press Bill
प्रेमचंद का सम्पादकीय जिसमें उन्होंने ब्रिटिश सरकार द्वारा लाये गए दमनकारी प्रेस बिल का विरोध करते हुए प्रेस की स्वतंत्रता और अहिंसक मूल्यों का पक्ष लिया है।
Naye Sahayogiyon Ka Swagat
मासिक 'त्यागभूमि' के साप्ताहिक रूपांतरण, 'अभ्युदय' की नवीन स्फूर्ति और 'प्रेमा' के हास्यांक की समीक्षा करते हुए प्रेमचंद की सम्पादकीय टिप्पणी।
Aazadi Ki Ladai Mein Kaun Log Aage Hain
प्रेमचंद का सम्पादकीय 'आज़ादी की लड़ाई में कौन लोग आगे हैं?' विश्वविद्यालयी बुद्धिजीवियों की कायरता के विपरीत आम मजदूरों, दुकानदारों और राष्ट्रीय संस्थाओं के छात्रों की अग्रणी भूमिका की सराहना करता है।
Aazadi Ki Ladai
महात्मा गांधी के दांडी मार्च और नमक सत्याग्रह पर प्रेमचंद का ओजस्वी लेख, जिसमें देशवासियों से स्वाधीनता संग्राम में सर्वस्व समर्पित करने का आह्वान किया गया है।
Agar Tum Kshatriya Ho
प्रेमचंद ने क्षत्रिय युवकों को ब्रिटिश अफसरों की चाटुकारिता त्यागकर दुर्बलों की रक्षा और सत्य के राष्ट्रीय संग्राम में वीरों की भांति कूदने का ओजस्वी आह्वान किया है।
Aman Sabhayein
राष्ट्रीय आंदोलन को कमजोर करने के लिए सरकारी अधिकारियों और अंग्रेजों के वफादारों द्वारा गठित 'अमन सभाओं' के पाखंड की पोल खोलता सम्पादकीय।
Bachchon Ko Swadhin Banao
प्रेमचंद बच्चों में स्वावलंबन और स्वतंत्रता की भावना विकसित करने पर बल देते हैं और माता-पिता के अत्यधिक कठोर नियंत्रण की आलोचना करते हैं।
Daman
सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान ब्रिटिश हुकूमत के क्रूर दमन चक्र और जनता के अदम्य साहस पर प्रेमचंद का सम्पादकीय।