नवां आर्डिनेन्स
Nawan Ordinance
प्रेमचंद ने कांग्रेस की संपत्तियां जब्त करने वाले नवें आर्डिनेन्स की निरर्थकता बताते हुए कहा है कि जनता की अगाध सहानुभूति ही राष्ट्र का अटूट कोष है।
Non-Fictions
साहित्य, समाज, राजनीति और समकालीन ज्वलंत मुद्दों पर प्रेमचंद की गंभीर वैचारिक कथेतर रचनाएँ।
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Nawan Ordinance
प्रेमचंद ने कांग्रेस की संपत्तियां जब्त करने वाले नवें आर्डिनेन्स की निरर्थकता बताते हुए कहा है कि जनता की अगाध सहानुभूति ही राष्ट्र का अटूट कोष है।
Chand Ka Marwari Ank
प्रेमचंद की टिप्पणी ''चांद' का मारवाड़ी अंक' 'चांद' पत्रिका के विशेषांक में व्यवसायिकता और सनसनीखेज सामग्री के उपयोग पर तीखी आलोचना प्रस्तुत करती है।
Hindi Rangmanch
हिन्दी रंगमंच के इतिहास, वर्तमान पतन और भविष्य की संभावनाओं पर प्रेमचंद का समीक्षात्मक लेख, जिसमें उच्च साहित्यिक नाटकों के मंचन पर बल दिया गया है।
Gurukul Kangri Mein Teen Din
हरिद्वार स्थित गुरुकुल कांगड़ी में बिताए तीन दिनों का प्रेमचंद द्वारा लिखा गया सजीव संस्मरण, जिसमें वहां की सादगी, अनुशासन और शिक्षा-प्रणाली की सराहना की गई है।
Galpak Ka Prastav
प्रेमचंद का सम्पादकीय 'गल्पांक का प्रस्ताव' 'चांद' पत्रिका द्वारा कहानी विशेषांक (गल्पांक) प्रकाशित करने के प्रस्ताव और हिन्दी गल्प के विकास पर विचार व्यक्त करता है।
Deshbandhu Chittaranjan Das
महान स्वतंत्रता सेनानी देशबन्धु चितरंजन दास के निधन पर प्रेमचंद की भावभीनी श्रद्धांजलि और उनके अप्रतिम राष्ट्रप्रेम व त्याग का मूल्यांकन।
Islami Sabhyata
इस्लामी सभ्यता के ऐतिहासिक योगदान, समानता और न्याय के सिद्धांतों पर प्रेमचंद का ज्ञानवर्धक लेख, जिसका उद्देश्य दोनों समुदायों के बीच समझ बढ़ाना है।
Karbala - 2
अपने ऐतिहासिक नाटक 'कर्बला' में हिन्दू पात्रों के समावेश को लेकर आलोचकों की शंकाओं का प्रेमचंद द्वारा दिया गया तार्किक व साहित्यिक उत्तर।
Upanyas
प्रेमचंद का निबंध 'उपन्यास' उपन्यास लेखन की कला की पड़ताल करता है, मानव-चरित्र के चित्रण के माध्यम से उपन्यास को परिभाषित करता है और यथार्थवाद, आदर्शवाद, कथानक, चरित्र-निर्माण और साहित्यिक सामग्री के स्रोत के रूप में जीवन के उपयोग का अन्वेषण करता है।
Hindu-Muslim Prashna
हिन्दू-मुस्लिम समस्या के कारणों और समाधान पर प्रेमचंद का संतुलित व दूरदर्शी निबंध, जिसमें आपसी सहिष्णुता और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया गया है।
Manushyata Ka Akaal
सांप्रदायिक विद्वेष और नैतिक पतन के दौर में सच्ची इंसानियत के अभाव पर प्रेमचंद का अत्यंत संवेदनशील और मर्मस्पर्शी चिंतन।
Karbala - 1
कर्बला के ऐतिहासिक संघर्ष और हज़रत हुसैन के अन्याय के विरुद्ध अमर बलिदान की पृष्ठभूमि पर प्रेमचंद का अत्यंत प्रामाणिक व संवेदनशील आलेख।