Cover Image for Nawan Ordinance (नवां आर्डिनेन्स) by Munshi Premchand - Non-Fiction
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सम्पादकीय•1930•2 मिनट

नवां आर्डिनेन्स

Nawan Ordinance

प्रेमचंद ने कांग्रेस की संपत्तियां जब्त करने वाले नवें आर्डिनेन्स की निरर्थकता बताते हुए कहा है कि जनता की अगाध सहानुभूति ही राष्ट्र का अटूट कोष है।

Work Details

प्रकार: सम्पादकीय
वर्ष: 1930
पठन समय: 2 मिनट (226 शब्द)

पंजाब के एक अंग्रेजी पत्र ने लार्ड इरविन को 'लार्ड-आर्डिनेन्स' की उपाधि दी है, और उन आर्डिनेन्सों की संख्या को देखते हुए—जो गत आठ महीनों में जारी किए गए हैं—यह उपाधि कुछ बेजा नहीं मालूम होती। जिस वाइसराय की सच्चाई और नेकनीयती की महात्मा जी ने तारीफ की, वह स्वार्थी मंत्रियों के हाथ में यूं कठपुतली बनेगा, इसकी आशा हमें नहीं थी। ताबड़तोड़ आर्डिनेन्स निकलते चले जा रहे हैं, हालांकि जनता पर उनका कोई असर नहीं होता।

अब नवां आर्डिनेन्स निकाला गया है, जिसमें कर्मचारियों को कांग्रेस या अन्य विद्रोही संस्थाओं की जायदादों को जब्त कर लेने का अधिकार दे दिया है। हमारी समझ में नहीं आता कि नौकरशाही कब तक सर्प की ओर से आंखें बन्द करके बांबी पीटती जायगी! असंतोष न मकानों में है, न जायदाद में, वह दिलों के अन्दर है, और जब तक उसे न दूर किया जाएगा, यों व्यर्थ छाती पीटने से कोई नतीजा नहीं।

क्या कांग्रेस के लिए किसी मकान की जरूरत है? वह किसी वृक्ष की छांह में बैठकर विचार कर सकती है। उसका काम इसी तरह, बल्कि और जोर के साथ चलता रहेगा। उसे किसी कोष की क्या जरूरत है, जनता की सहानुभूति ही उसका अखंड कोष है, जिसमें से अब तक करोड़ों रुपये निकल चुके हैं और आगे भी निकलते रहेंगे।


प्रकाशन इतिहास

[सम्पादकीय। 'हंस', नवम्बर, 1930 में प्रकाशित। 'प्रेमचंद का अप्राप्य साहित्य' खण्ड-2 में संकलित।]

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शोध एवं शोध-पत्रों के लिए अकादमिक संदर्भ

Premchand, Munshi. "नवां आर्डिनेन्स." *Munshi Premchand Digital Archive*, 1930, https://munshipremchand.com/works/non-fictions/nawan-ordinance. Accessed 22 Sep. 2026.