मल्काना राजपूत मुसलमानों की शुद्धि
Malkana Rajput Musalmanon Ki Shuddhi
मल्काना राजपूतों के शुद्धि आंदोलन और उसके कारण बढ़ रहे सांप्रदायिक तनाव पर प्रेमचंद की गंभीर, संतुलित और दूरदर्शी समीक्षा।
Non-Fictions
साहित्य, समाज, राजनीति और समकालीन ज्वलंत मुद्दों पर प्रेमचंद की गंभीर वैचारिक कथेतर रचनाएँ।
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Malkana Rajput Musalmanon Ki Shuddhi
मल्काना राजपूतों के शुद्धि आंदोलन और उसके कारण बढ़ रहे सांप्रदायिक तनाव पर प्रेमचंद की गंभीर, संतुलित और दूरदर्शी समीक्षा।
Naya Varsh
प्रेमचंद का सम्पादकीय 'नया वर्ष' असहयोग आंदोलन व सत्याग्रह की उपलब्धियों की समीक्षा करते हुए आगामी वर्ष के संगठन व रचनात्मक कार्यों पर बल देता है।
Count Tolstoy Aur Fan-e-Latif
महान रूसी विचारक और लेखक लियो टॉल्स्टॉय के कला-सिद्धांत ('सत्कला') पर मुंशी प्रेमचंद का एक विचारोत्तेजक आलोचनात्मक लेख, जिसमें उन्होंने कला को विलास के साधन के बजाय मानव-एकता और नैतिकता का माध्यम बताया।
Munshi Gorakhprasad Ibrat
गोरखपुर के विख्यात वकील, निस्पृह सिद्धहस्त शायर मुंशी गोरखप्रसाद 'इबरत' (फ़िराक़ गोरखपुरी के पिता) के व्यक्तित्व, दीवान और उनकी सादगीपूर्ण मसनवियों व ग़ज़लों पर मुंशी प्रेमचंद का संस्मरणात्मक लेख।
Bihari
रीतिकाल के सिरमौर कवि बिहारी की 'सतसई', उनकी अनुपम चमत्कार-शैली, फारसी गज़ल से सादृश्य और सौंदर्य-वर्णन पर मुंशी प्रेमचंद का एक अत्यंत सूक्ष्म और गहरा आलोचनात्मक अध्ययन।
Keshav
हिन्दी रीतिकाल के प्रमुख आचार्य कवि केशवदास के पांडित्य, 'रामचन्द्रिका' के संवादों, अलंकार-प्रियता तथा उनके काव्य के गुण-दोषों की मुंशी प्रेमचंद द्वारा निष्पक्ष और पैनी समीक्षा।
Hansi
मानव-स्वभाव की अनुपम विशेषता 'हंसी' के मनोवैज्ञानिक, सामाजिक, दार्शनिक और स्वास्थ्यवर्धक पहलुओं पर मुंशी प्रेमचंद का एक अत्यंत रोचक और चिंतनपरक निबंध।
Hindustani Relon Ki Sath-Sala Tarikh
सन् 1854 में लॉर्ड डलहौजी के काल से लेकर भारतीय रेल के 60 वर्षों के ऐतिहासिक विकास, विस्तार और देश की अर्थव्यवस्था पर उसके नफ़े-नुकसान का मुंशी प्रेमचंद कृत सारगर्भित ऐतिहासिक लेख।
Kalidas Ki Kavita
महाकवि कालिदास की कविता में प्रकृति-चित्रण, सौंदर्य-सृष्टि, 'ऋतुसंहार' के ऋतु-वर्णन और उनकी काव्य-कला पर मुंशी प्रेमचंद का एक पांडित्यपूर्ण आलोचनात्मक निबंध।
Bharatendu Babu Harishchandra
आधुनिक हिन्दी गद्य, कविता और नाट्यकला के युगप्रवर्तक भारतेन्दु बाबू हरिश्चन्द्र की बहुमुखी प्रतिभा, साहित्यिक योगदान और भाषा-सुधार पर मुंशी प्रेमचंद का एक उत्कृष्ट समीक्षात्मक लेख।
Majnu
अरबी और फारसी काव्य-परंपरा के अमर प्रेमाख्यान 'लैला-मजनूं' में मजनूं के विरह, पागलपन, आत्म-समर्पण और प्रेम-दर्शन पर मुंशी प्रेमचंद का एक विस्तृत एवं भावपूर्ण आलोचनात्मक अध्ययन।
Hindu Sabhyata Aur Lok-Hit
प्राचीन भारतीय सभ्यता में लोकहित, जन-कल्याण, चिकित्सालयों, पशु-रक्षा और सिंचाई व्यवस्था की समृद्ध ऐतिहासिक परंपरा को उजागर करता तथा औपनिवेशिक दावों का सप्रमाण खंडन करता मुंशी प्रेमचंद का एक विचारोत्तेजक शोधपरक निबंध।