कथेतर

Non-Fictions

साहित्य, समाज, राजनीति और समकालीन ज्वलंत मुद्दों पर प्रेमचंद की गंभीर वैचारिक कथेतर रचनाएँ।

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मुंशी प्रेमचंद कृत राष्ट्रभाषा हिंदी और उसकी समस्या का कवर इमेज
कथेतर1934

राष्ट्रभाषा हिंदी और उसकी समस्या

Rashtra Bhasha Hindi Aur Uski Samasya

प्रेमचंद का भाषण 'राष्ट्रभाषा हिंदी और उसकी समस्या' राष्ट्रीय भाषा के प्रश्न, हिन्दी और उर्दू के संबंध, और भारत भर में लोगों को जोड़ने में सक्षम भाषा बनाने में शामिल भाषाई चुनौतियों की पड़ताल करता है।

41 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत उर्दू, हिंदी और हिंदुस्तानी का कवर इमेज
कथेतर1934

उर्दू, हिंदी और हिंदुस्तानी

Urdu Hindi Aur Hindustani

प्रेमचंद का निबंध 'उर्दू, हिंदी और हिंदुस्तानी' हिन्दी और उर्दू के संबंध की पड़ताल करता है और भाषाई और सांस्कृतिक भिन्नताओं को पाटने वाली सुलभ राष्ट्रीय भाषा के रूप में हिन्दुस्तानी की वकालत करता है।

26 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत जीवन और साहित्य में घृणा का स्थान का कवर इमेज
निबंध
कथेतर1933

जीवन और साहित्य में घृणा का स्थान

Jeevan Aur Sahitya Mein Ghrina Ka Sthan

जीवन और साहित्य में अन्याय व अनाचार के प्रति घृणा की नैतिक व रचनात्मक उपयोगिता का प्रेमचंद द्वारा किया गया गहन मनोवैज्ञानिक विश्लेषण।

13 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत नोबल पुरस्कार-प्राप्तकर्त्ता जॉन गाल्सवर्दी का कवर इमेज
आलोचना
कथेतर1933

नोबल पुरस्कार-प्राप्तकर्त्ता जॉन गाल्सवर्दी

Nobel Puraskar-Praptakarta John Galsworthy

अंग्रेजी के प्रख्यात यथार्थवादी नाटककार व उपन्यासकार जॉन गाल्सवर्दी के जीवन, कला और नोबेल सम्मान पर प्रेमचंद की सारगर्भित समीक्षा।

6 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत आत्मकथा क्या साहित्य का अंग नहीं है? का कवर इमेज
निबंध
कथेतर1932

आत्मकथा क्या साहित्य का अंग नहीं है?

Aatm-Katha Kya Sahitya Ka Ang Nahin Hai?

प्रेमचंद आत्मकथा को साहित्य का अत्यंत उपयोगी व प्रेरक अंग सिद्ध करते हुए 'हंस' के आत्मकथांक की सार्थकता और महत्ता को रेखांकित करते हैं।

5 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत अंग्रेजी भाषा का रोग का कवर इमेज
सम्पादकीय
कथेतर1931

अंग्रेजी भाषा का रोग

Angrezi Bhasha Ka Rog

प्रेमचंद की तीखी टिप्पणी जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय कार्यकर्ताओं और शिक्षित वर्ग में अंग्रेजी के बढ़ते रोग और मानसिक दासता की आलोचना करते हुए राष्ट्रभाषा हिन्दी को अपनाने पर बल दिया है।

3 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत बम्बई के एक मजिस्ट्रेट का भ्रम का कवर इमेज
सम्पादकीय
कथेतर1931

बम्बई के एक मजिस्ट्रेट का भ्रम

Bombay Ke Ek Magistrate Ka Bhram

शोलापुर दिवस मनाने पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं को दंड देने वाले बम्बई के मजिस्ट्रेट के तर्क का खंडन करते हुए प्रेमचंद अन्याय के विरुद्ध रोने और विरोध करने के स्वाभाविक अधिकार का समर्थन करते हैं।

1 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत कांग्रेस ज़िन्दाबाद का कवर इमेज
सम्पादकीय
कथेतर1931

कांग्रेस ज़िन्दाबाद

Congress Zindabad

दांडी मार्च के एक वर्ष पूरे होने और गांधी-इरविन समझौते पर प्रेमचंद कांग्रेस की नैतिक व राजनीतिक विजय का अभिनंदन करते हैं और सत्याग्रह में महिलाओं की ऐतिहासिक भूमिका की सराहना करते हैं।

7 मिनट