क्षमा
Kshama
प्रेमचंद की 'क्षमा' धार्मिक वैमनस्य, प्रतिशोध और मानवीय करुणा के बीच संघर्ष की ऐतिहासिक कहानी है। मुस्लिम शासन वाले स्पेन में ईसाई नेता दाऊद अपने देश की स्वतंत्रता और अपने समुदाय की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहा है। एक बहस के बाद उसका मुसलमान युवक जमाल से संघर्ष होता है और जमाल मारा जाता है। दाऊद जान बचाकर भागता है और अंततः शेख हसन के घर शरण लेता है। उसे पता चलता है कि शेख हसन उसी जमाल का पिता है जिसे उसने मारा है। हसन के भीतर पुत्र-वियोग का असहनीय दुःख और शरणागत की रक्षा करने का धार्मिक कर्तव्य आमने-सामने आ जाते हैं। अंततः वह बदले के बजाय क्षमा को चुनता है और दाऊद को सुरक्षित भाग जाने देता है। इस अनुभव से दाऊद की मुसलमानों और इस्लाम के प्रति दृष्टि बदल जाती है। प्रेमचंद इस कहानी के माध्यम से धर्म और धर्म के नाम पर किए जाने वाले अत्याचार में अंतर करते हैं तथा दिखाते हैं कि क्षमा सामुदायिक प्रतिशोध की श्रृंखला को तोड़ सकती है।