कहानियाँ

Short Stories

भारतीय जनजीवन और समाज की यथार्थ तस्वीर प्रस्तुत करती प्रेमचंद की 300 से अधिक कालजयी कहानियाँ।

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मुंशी प्रेमचंद कृत क्षमा का कवर इमेज
कहानी1924

क्षमा

Kshama

प्रेमचंद की 'क्षमा' धार्मिक वैमनस्य, प्रतिशोध और मानवीय करुणा के बीच संघर्ष की ऐतिहासिक कहानी है। मुस्लिम शासन वाले स्पेन में ईसाई नेता दाऊद अपने देश की स्वतंत्रता और अपने समुदाय की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहा है। एक बहस के बाद उसका मुसलमान युवक जमाल से संघर्ष होता है और जमाल मारा जाता है। दाऊद जान बचाकर भागता है और अंततः शेख हसन के घर शरण लेता है। उसे पता चलता है कि शेख हसन उसी जमाल का पिता है जिसे उसने मारा है। हसन के भीतर पुत्र-वियोग का असहनीय दुःख और शरणागत की रक्षा करने का धार्मिक कर्तव्य आमने-सामने आ जाते हैं। अंततः वह बदले के बजाय क्षमा को चुनता है और दाऊद को सुरक्षित भाग जाने देता है। इस अनुभव से दाऊद की मुसलमानों और इस्लाम के प्रति दृष्टि बदल जाती है। प्रेमचंद इस कहानी के माध्यम से धर्म और धर्म के नाम पर किए जाने वाले अत्याचार में अंतर करते हैं तथा दिखाते हैं कि क्षमा सामुदायिक प्रतिशोध की श्रृंखला को तोड़ सकती है।

24 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत कौशल का कवर इमेज
कहानी1923

कौशल

Kaushal

प्रेमचंद की 'कौशल' दांपत्य जीवन में संदेह, ईर्ष्या, स्वामित्व-बोध और बुद्धि के खेल की कहानी है। कमलाप्रसाद को संदेह है कि उसकी पत्नी सुमन किसी दूसरे पुरुष की ओर आकर्षित है। वह सीधे बात करने के बजाय उसकी निष्ठा की परीक्षा लेने के लिए एक चाल चलता है। सुमन उसकी चाल को समझ जाती है और अपनी बुद्धि से उसी खेल को उसके विरुद्ध मोड़ देती है। प्रेमचंद दिखाते हैं कि प्रेम में विश्वास के स्थान पर संदेह और परीक्षा आ जाए तो संबंध भीतर से कमजोर होने लगते हैं। साथ ही कहानी स्त्री की बुद्धि, आत्मसम्मान और भावनात्मक समझ को पुरुष के अधिकार-बोध के सामने रखती है।

13 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत लोकमत का सम्मान का कवर इमेज
कहानी1922

लोकमत का सम्मान

Lokmat Ka Samman

प्रेमचंद की कहानी 'लोकमत का सम्मान' बेचू नामक ईमानदार धोबी की कहानी है, जो गाँव में जमींदारों के अत्याचार से तंग आकर शहर चला जाता है और धीरे-धीरे शहरी जीवन की लालसाओं तथा आर्थिक दबाव के कारण अपने सिद्धांतों से समझौता करने लगता है। एक अपमानजनक घटना उसके भीतर सोई हुई अंतरात्मा को जगा देती है और वह फिर ईमानदारी के मार्ग पर लौटता है।

23 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत कवच का कवर इमेज
कहानी1920

कवच

Kavach

प्रेमचंद की कहानी ‘कवच’ सत्ता, वासना, प्रलोभन और अंतरात्मा के संघर्ष की मनोवैज्ञानिक कथा है। एक बड़ी रियासत का विश्वस्त अधिकारी अपने राजा से एक ऐसे व्यक्ति की हत्या करवाने का आदेश पाता है, जो राजा की प्रिय सरफराज से प्रेम-पत्रों का आदान-प्रदान करता है। धन, पद और प्रतिष्ठा के प्रलोभन में अधिकारी पहले इस काम के लिए तैयार हो जाता है, लेकिन अपनी माँ के चित्र को देखकर उसकी अंतरात्मा जाग उठती है और वह हत्या से इनकार कर देता है।

33 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत ज्वालामुखी का कवर इमेज
कहानी1917

ज्वालामुखी

Jwalamukhi

प्रेमचंद की कहानी 'ज्वालामुखी' एक बेरोजगार युवक की रहस्यमय और अलौकिक अनुभवों से भरी कहानी है, जो ऐशगढ़ में एक अत्यंत सुंदर और धनी रमणी का प्राइवेट सेक्रेटरी बनता है। उसके ऐश्वर्य और आकर्षण में फँसते हुए वह धीरे-धीरे उसके भयावह रहस्य को जानता है और एक घातक मोह से बचने के लिए संघर्ष करता है।

37 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत जुगनू की चमक का कवर इमेज
कहानी1916

जुगनू की चमक

Jugnu Ki Chamak

प्रेमचंद की कहानी 'जुगनू की चमक' पंजाब की महारानी चंद्रकुँवरि की ऐतिहासिक कथा है, जो चुनार के किले से निकलकर अपने लिए सुरक्षित आश्रय की तलाश में नेपाल पहुँचती हैं। राणा जंगबहादुर द्वारा ब्रिटिश दबाव के बावजूद उन्हें शरण और सम्मान देना प्रेमचंद के लिए भारतीय इतिहास की अँधेरी रात में जुगनू की चमक के समान है।

28 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत लाल फीता या मजिस्ट्रेट का इस्तीफा का कवर इमेज
कहानी1912

लाल फीता या मजिस्ट्रेट का इस्तीफा

Laal Feeta ya Magistrate ka Istifa

प्रेमचंद की कहानी 'लाल फीता या मजिस्ट्रेट का इस्तीफा' डिप्टी मजिस्ट्रेट हरिबिलास की नैतिक दुविधा और ब्रिटिश सरकार की दमनकारी नीति के विरोध में पद-त्याग की प्रेरणादायक कथा है।

56 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत करिश्मा-ए-इन्तकाम का कवर इमेज
कहानी1911

करिश्मा-ए-इन्तकाम

Karishma-e-Inteqam

‘करिश्मा-ए-इन्तकाम’ मुंशी प्रेमचंद के आरंभिक उर्दू कथा-साहित्य की कहानी है, जिसे 'अद्भुत प्रतिशोध' के नाम से भी जाना जाता है। कहानी डाकुओं, दगा, प्रतिशोध, हिंसा और बदलती पहचान के इर्द-गिर्द घूमती है तथा प्रेमचंद के आरंभिक कथा-साहित्य की नाटकीय प्रवृत्ति को सामने लाती है।

20 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत खौफे-रुसवाई का कवर इमेज
कहानी1911

खौफे-रुसवाई

Khauf-e-Ruswai

प्रेमचंद की कहानी 'खौफे-रुसवाई' (बदनामी का डर) प्रेम, वैवाहिक विश्वास, सामाजिक बदनामी और राजनीतिक संदेह के बीच के संघर्ष को प्रस्तुत करती है। सरला और धीरेन चौधरी के माध्यम से कहानी दिखाती है कि प्रतिष्ठा बचाने का डर किस तरह रिश्तों, रहस्यों और नैतिक निर्णयों को प्रभावित करता है।

33 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत दाराशिकोह का दरबार का कवर इमेज
कहानी1908

दाराशिकोह का दरबार

Dara Shikoh Ka Darbar

प्रेमचंद की ऐतिहासिक कहानी ‘दाराशिकोह का दरबार’ मुगल शहज़ादे दाराशिकोह के दरबार की पृष्ठभूमि में लिखी गई है। कहानी में कंधार, साम्राज्य की नीति और सैन्य अभियानों पर दाराशिकोह तथा उनके सलाहकारों के बीच विचार-विमर्श के माध्यम से दारा के बौद्धिक और उदार धार्मिक दृष्टिकोण को सामने रखा गया है। यह कहानी मूलतः उर्दू मासिक ‘आज़ाद’ के सितंबर 1908 के अंक में प्रकाशित हुई थी और बाद में खोजे जाने के बाद प्रेमचंद की संकलित रचनाओं में शामिल की गई।

43 मिनट