कहानियाँ

Short Stories

भारतीय जनजीवन और समाज की यथार्थ तस्वीर प्रस्तुत करती प्रेमचंद की 300 से अधिक कालजयी कहानियाँ।

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मुंशी प्रेमचंद कृत जुलूस का कवर इमेज
कहानी1930

जुलूस

Juloos

प्रेमचंद की कहानी 'जुलूस' भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की पृष्ठभूमि में लिखी गई मार्मिक कहानी है। पूर्ण स्वराज्य के समर्थन में निकले जुलूस को दारोगा बीरबल सिंह अंग्रेज़ अधिकारियों के आदेश पर रोकता है। उसके द्वारा किए गए बल-प्रयोग से इब्राहिम अली की मृत्यु हो जाती है, लेकिन अपनी पत्नी मिट्ठन बाई की फटकार और अपने अपराध-बोध के कारण बीरबल सिंह का हृदय परिवर्तन होता है।

31 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत कानूनी कुमार का कवर इमेज
कहानी1929

कानूनी कुमार

Kanooni Kumar

प्रेमचंद की 'कानूनी कुमार' कानून के माध्यम से हर सामाजिक समस्या का समाधान खोजने वाले एक आत्ममुग्ध विधायक पर तीखा व्यंग्य है। एम.एल.ए. कानूनी कुमार समाचारपत्रों और रिपोर्टों के ढेर के बीच बैठकर तंबाकू, पर्दा, भिक्षावृत्ति, चाय, होटल-जीवन, स्त्रियों की घरेलू स्थिति और अत्यधिक संतानोत्पत्ति जैसी समस्याओं के लिए एक के बाद एक कानून बनाने की योजना बनाते हैं। वे स्वयं को देश-सुधारक समझते हैं, लेकिन उनकी पत्नी उनके सुधारवाद की सबसे बड़ी कमजोरी सामने रखती है—दूसरों के जीवन को कानून से बदलने की इच्छा, जबकि अपने घर और अपने व्यवहार को बदलने की तैयारी नहीं। हास्य, अतिशयोक्ति और संवाद के माध्यम से प्रेमचंद दिखाते हैं कि कानून आवश्यक हो सकता है, लेकिन शिक्षा, सामाजिक चेतना और स्वैच्छिक सुधार के बिना केवल दंडात्मक कानून समाज को वास्तव में नहीं बदल सकता।

29 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत कप्तान साहब का कवर इमेज
कहानी1929

कप्तान साहब

Kaptan Sahab

प्रेमचंद की कहानी 'कप्तान साहब' मित्रता, सामाजिक प्रतिष्ठा और दिखावे पर आधारित हास्य-व्यंग्यपूर्ण कथा है। कथावाचक की स्मृतियों के माध्यम से कहानी बाहरी पद और प्रतिष्ठा के पीछे छिपी मानवीय कमजोरियों तथा सामाजिक मानसिकता पर व्यंग्य करती है।

22 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत खुचड़ का कवर इमेज
कहानी1929

खुचड़

Khuchad

प्रेमचंद की कहानी 'खुचड़' पति-पत्नी के संबंधों में लगातार आलोचना, दोहरे मापदंड और आपसी सम्मान की कमी पर हास्यपूर्ण व्यंग्य है। कुंदनलाल अपनी पत्नी रामेश्वरी को हर छोटी-बड़ी बात पर उपदेश देते हैं, लेकिन स्वयं उन्हीं सिद्धांतों का पालन नहीं कर पाते।

27 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत ख़ुदी का कवर इमेज
कहानी1928

ख़ुदी

Khudi

प्रेमचंद की संवेदनशील कहानी ‘ख़ुदी’ मुन्नी नामक एक अनाथ और बेसहारा युवती के जीवन के माध्यम से प्रेम, स्वाभिमान और स्त्री की भावनात्मक गरिमा का चित्रण करती है। गाँव के अनेक पुरुष उसकी सुंदरता के प्रशंसक हैं, लेकिन कोई भी उसे सच्चा अपनापन और सम्मान नहीं देता। एक दिन एक मुसाफिर उसके जीवन में आता है और कुछ ही दिनों के साथ में उसे वह सच्चा प्रेम मिलता है जिसकी उसे वर्षों से तलाश थी। मुसाफिर के चले जाने के बाद भी मुन्नी उसकी प्रतीक्षा और स्मृति को जीवन भर अपने भीतर सँजोए रखती है।

17 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत कामना-तरु का कवर इमेज
कहानी1927

कामना-तरु

Kamna-Taru

प्रेमचंद की 'कामना-तरु' प्रेम, वियोग, स्मृति, प्रतीक्षा और त्याग की अत्यंत मार्मिक कहानी है। कुँवर राजनाथ शत्रुओं से बचकर एक छोटे-से गाँव के जागीरदार कुबेरसिंह के यहाँ आश्रय लेते हैं और उनकी पुत्री चंदा से प्रेम करने लगते हैं। चंदा द्वारा लगाया गया एक छोटा-सा पौधा दोनों के प्रेम और उनकी साझा स्मृतियों का प्रतीक बन जाता है। राजनाथ की गिरफ्तारी के बाद बीस वर्ष का वियोग उन्हें उस स्थान की ओर खींचता रहता है जहाँ उनका प्रेम अंकुरित हुआ था।

31 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत कज़ाकी का कवर इमेज
कहानी1926

कज़ाकी

Kazaki

प्रेमचंद की कहानी 'कज़ाकी' बचपन की स्मृतियों, स्नेह, करुणा और मानवीय गरिमा की मार्मिक कथा है। कज़ाकी डाक विभाग का एक हँसमुख और साहसी हरकारा है, जो एक हिरन के बच्चे को पकड़ने में देर कर देता है और नौकरी खो देता है। उसके प्रति बालक का प्रेम और कज़ाकी का आत्मसम्मान कहानी को अत्यंत भावुक बना देते हैं।

35 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत लैला का कवर इमेज
कहानी1926

लैला

Laila

प्रेमचंद की 'लैला' प्रेम, जनसत्ता, राजसत्ता और त्याग को एक साथ रखने वाली राजनीतिक-रोमांटिक कहानी है। तेहरान में एक रहस्यमय गायिका के रूप में प्रकट होने वाली लैला अपने गीतों के माध्यम से गरीबों में आशा जगाती है, राजाओं के विलास पर प्रश्न उठाती है और प्रेम तथा न्याय पर आधारित समाज का स्वप्न दिखाती है। शाहजादा नादिर उसके प्रेम में पड़ जाता है और अंततः उससे विवाह करता है। नादिर के बादशाह बनने पर लैला मलका बनती है। उनका निजी दांपत्य आदर्श है, लेकिन राजनीति में दोनों की प्रवृत्तियाँ अलग हैं—नादिर राजसत्ता का प्रतिनिधि है और लैला प्रजासत्ता की। लैला राजमहल के खर्च घटाकर जनता के हित में धन लगाती है और अन्न पर लगने वाला कर कम करवाती है, लेकिन अंततः वही जनता उसके विरुद्ध विद्रोह कर देती है। जब नादिर विद्रोह को सेना के बल से कुचलना चाहता है, लैला रक्तपात स्वीकार नहीं करती। वह अपने प्रेम को सत्ता और हिंसा का कारण बनने देने के बजाय नादिर को छोड़कर चली जाती है। कहानी प्रेम और सिद्धांत के बीच उस अंतिम त्याग को सामने रखती है जिसमें व्यक्ति अपने प्रिय को बचाने के लिए स्वयं उसके जीवन से दूर हो जाता है।

46 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत लांछन का कवर इमेज
कहानी1926

लांछन

Lanchhan

प्रेमचंद की 'लांछन' चुगली, अफवाह, नैतिक पहरेदारी और बिना प्रमाण स्त्रियों के चरित्र पर आरोप लगाने की प्रवृत्ति पर तीखा व्यंग्य है। महिला-आश्रम की वृद्ध सेविका जुगनूबाई ने स्वयं को दूसरी स्त्रियों के चरित्र की अनौपचारिक प्रहरी बना लिया है। वह उनके निजी जीवन की टोह लेती, छोटी-छोटी बातों को संदेह की दृष्टि से देखती और फिर उन्हें बढ़ा-चढ़ाकर पूरे समाज में फैलाती है। जब नई शिक्षित प्रधानाध्यापिका मिस खुरशेद उसकी निगाह का निशाना बनती हैं, तो वे उसकी इसी प्रवृत्ति को उसके सामने उजागर करने का निर्णय लेती हैं। अपनी डॉक्टर मित्र लीलावती की सहायता से वे ऐसा अभिनय करती हैं जिससे जुगनूबाई को विश्वास हो जाता है कि उसने एक अनैतिक संबंध देख लिया है। जुगनूबाई बिना सत्य जाने यह अफवाह पूरे शहर में फैला देती है। अंत में पता चलता है कि जिस पुरुष को उसने विलियम किंग समझा था, वह वास्तव में डॉक्टर लीलावती थी जो पुरुष का वेश धारण किए हुए थी। इस प्रकार आरोप लगाने वाली स्वयं उपहास का पात्र बन जाती है। प्रेमचंद हास्य के माध्यम से दिखाते हैं कि अफवाह और चरित्र-हनन सामाजिक नियंत्रण के साधन कैसे बन जाते हैं और स्त्रियाँ स्वयं भी दूसरी स्त्रियों की स्वतंत्रता पर पहरा देने वाली व्यवस्था का हिस्सा कैसे बन सकती हैं।

31 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत लांछन का कवर इमेज
कहानी1926

लांछन

Lanchhan

प्रेमचंद की कहानी 'लांछन' दांपत्य जीवन में संदेह, अविश्वास और चरित्र पर लगाए गए झूठे आरोपों की मार्मिक कथा है। श्यामकिशोर अपनी पत्नी देवी के चरित्र पर संदेह करने लगते हैं और उनका अविश्वास धीरे-धीरे परिवार के प्रेम और विश्वास को नष्ट कर देता है।

1 घंटे 8 मिनट