कहानी1929
कानूनी कुमार
Kanooni Kumar
प्रेमचंद की 'कानूनी कुमार' कानून के माध्यम से हर सामाजिक समस्या का समाधान खोजने वाले एक आत्ममुग्ध विधायक पर तीखा व्यंग्य है। एम.एल.ए. कानूनी कुमार समाचारपत्रों और रिपोर्टों के ढेर के बीच बैठकर तंबाकू, पर्दा, भिक्षावृत्ति, चाय, होटल-जीवन, स्त्रियों की घरेलू स्थिति और अत्यधिक संतानोत्पत्ति जैसी समस्याओं के लिए एक के बाद एक कानून बनाने की योजना बनाते हैं। वे स्वयं को देश-सुधारक समझते हैं, लेकिन उनकी पत्नी उनके सुधारवाद की सबसे बड़ी कमजोरी सामने रखती है—दूसरों के जीवन को कानून से बदलने की इच्छा, जबकि अपने घर और अपने व्यवहार को बदलने की तैयारी नहीं। हास्य, अतिशयोक्ति और संवाद के माध्यम से प्रेमचंद दिखाते हैं कि कानून आवश्यक हो सकता है, लेकिन शिक्षा, सामाजिक चेतना और स्वैच्छिक सुधार के बिना केवल दंडात्मक कानून समाज को वास्तव में नहीं बदल सकता।
29 मिनट