कहानियाँ

Short Stories

भारतीय जनजीवन और समाज की यथार्थ तस्वीर प्रस्तुत करती प्रेमचंद की 300 से अधिक कालजयी कहानियाँ।

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मुंशी प्रेमचंद कृत जुड़वाँ भाई का कवर इमेज
कहानी1936

जुड़वाँ भाई

Judwan Bhai

प्रेमचंद की बाल-कहानी ‘जुड़वाँ भाई’ दो जुड़वाँ भाइयों की रोमांचक कथा है, जो बचपन में एक-दूसरे से बिछड़ जाते हैं और बिल्कुल अलग परिस्थितियों में पलते-बढ़ते हैं। एक भाई राजा के संरक्षण में शिक्षित और वीर शासक बनता है, जबकि दूसरा भालू द्वारा उठा लिए जाने के बाद जंगल में भालू के बच्चों के साथ बड़ा होता है। वर्षों बाद दोनों का मिलना पारिवारिक संबंध, परिवेश के प्रभाव और मनुष्य के स्वभाव की अद्भुत कथा प्रस्तुत करता है।

10 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत कश्मीरी सेब का कवर इमेज
कहानी1936

कश्मीरी सेब

Kashmiri Seb

‘कश्मीरी सेब’ प्रेमचंद की छोटी लेकिन तीखी व्यंग्य-कहानी है, जिसमें एक साधारण खरीदारी के अनुभव के माध्यम से रोजमर्रा के व्यापार में होने वाली बेईमानी पर टिप्पणी की गई है। कथावाचक कश्मीरी और अच्छे बताए गए चार सेब खरीदता है, लेकिन घर पहुँचने पर चारों खराब निकलते हैं। यह घटना उसे बेईमानी, विश्वास और स्वयं ग्राहक की सावधानी की जिम्मेदारी पर विचार करने के लिए प्रेरित करती है।

9 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत कुत्ते की कहानी का कवर इमेज
कहानी1936

कुत्ते की कहानी

Kutte Ki Kahani

‘कुत्ते की कहानी’ मुंशी प्रेमचंद की बाल-रचना है, जिसे एक कुत्ते की आत्मकथा के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसका कथावाचक कुत्ता कल्लू है, जिसका जीवन गरीबी, सुविधा, साहस, प्रतिष्ठा और सामाजिक असमानता के अनेक अनुभवों से गुजरता है। कुत्ते की दृष्टि से मनुष्य की दुनिया को देखकर प्रेमचंद सत्ता, वर्गभेद, प्रतिष्ठा, औपनिवेशिक मानसिकता और सामाजिक पाखंड पर मनोरंजक ढंग से व्यंग्य करते हैं।

1 घंटे 45 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत जुरमाना का कवर इमेज
कहानी1935

जुरमाना

Jurmana

प्रेमचंद की ‘जुरमाना’ अलारक्खी नामक गरीब मेहतरानी के जीवन के माध्यम से आर्थिक शोषण, सत्ता के दुरुपयोग, स्त्री की असुरक्षा और श्रमिक जीवन की कठिनाइयों को सामने लाने वाली सामाजिक कहानी है। सफाई के दारोगा मुंशी खैरात अली खाँ उसके वेतन में बार-बार जुर्माना काटते हैं, जबकि अलारक्खी मेहनती और अपने काम के प्रति ईमानदार है। कहानी आगे चलकर यह भी दिखाती है कि अधिकार रखने वाला व्यक्ति अपनी गलती पहचानकर मानवीयता की ओर लौट सकता है।

13 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत खुदाई फ़ौज़दार का कवर इमेज
कहानी1934

खुदाई फ़ौज़दार

Khudai Fauzdar

प्रेमचंद की 'खुदाई फ़ौज़दार' धन के लालच, धार्मिक पाखंड, पुलिस-व्यवस्था की भ्रष्टता और धनवानों के लिए उपलब्ध विशेष सुरक्षा पर तीखा व्यंग्य है। सेठ नानकचंद एक धनी महाजन हैं जो स्वयं को अत्यंत धर्मनिष्ठ और परोपकारी दिखाते हैं, लेकिन अपने असामियों से कठोर ब्याज वसूलते हैं। जब उन्हें पच्चीस हजार रुपये की फिरौती माँगने वाले धमकी भरे पत्र मिलते हैं, तो वे अपनी संपत्ति, बंदूकों और पुलिस पर भरोसा करते हैं। पुलिस के नाम पर आए कुछ लोग उन्हें समझाते हैं कि अपनी कीमती संपत्ति सरकारी खजाने में जमा कर दें। नानकचंद उनकी बात पर विश्वास कर लेते हैं। लेकिन यही लोग असली 'खुदाई फ़ौज़दार' निकलते हैं—ऐसे लुटेरे जो स्वयं को कानून और न्याय का रक्षक समझकर दूसरों पर अपना अधिकार जताते हैं। प्रेमचंद इस विडंबना के माध्यम से दिखाते हैं कि धर्म, धन और सरकारी अधिकार का बाहरी प्रदर्शन मनुष्य को वास्तविक नैतिकता से नहीं बचा सकता।

31 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत कायर का कवर इमेज
कहानी1933

कायर

Kayar

प्रेमचंद की 'कायर' प्रेम, जाति और सामाजिक दबाव के सामने व्यक्ति के साहस की परीक्षा की त्रासद कहानी है। प्रगतिशील विचारों वाला ब्राह्मण युवक केशव वैश्य कन्या प्रेमा से प्रेम करता है और जातिगत बंधनों को तोड़कर उससे विवाह करना चाहता है। प्रेमा भी उससे प्रेम करती है, लेकिन प्रारंभ में माता-पिता और कुल-मर्यादा के प्रति अपनी जिम्मेदारी के कारण विवाह का निर्णय स्वयं लेने से हिचकती है। धीरे-धीरे वह अपने जीवन पर अधिकार और प्रेम-आधारित विवाह की आवश्यकता को स्वीकार करती है। लेकिन जब केशव के पिता उसे घर से निकालने और संपत्ति से वंचित करने की धमकी देते हैं, तो केशव अपने सिद्धांतों से पीछे हट जाता है और प्रेमा को स्वीकार करने से इंकार कर देता है। प्रेमा के लिए यह केवल प्रेम की असफलता नहीं बल्कि विश्वास का टूटना है। प्रेमचंद केशव की कायरता के माध्यम से दिखाते हैं कि सामाजिक रूढ़ियों का विरोध केवल भाषणों से नहीं, बल्कि उनके परिणामों को सहने के साहस से सिद्ध होता है।

29 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत लॉटरी का कवर इमेज
विशेष
कहानी1933

लॉटरी

Lottery

प्रेमचंद की 'लॉटरी' अचानक मिलने वाले धन की लालसा, कल्पना और मानवीय स्वार्थ पर व्यंग्यपूर्ण कहानी है। एक स्कूल-मास्टर और उसका मित्र विक्रम मिलकर लॉटरी का टिकट खरीदते हैं और दस लाख रुपये जीतने की कल्पना करने लगते हैं। पुरस्कार अभी मिला भी नहीं है, लेकिन दोनों उसके उपयोग की योजनाएँ बनाने लगते हैं। धीरे-धीरे धन की कल्पना उनके बीच विश्वास, साझेदारी और स्वार्थ के प्रश्न खड़े कर देती है। कहानी दिखाती है कि वास्तविक धन से पहले उसका भ्रम ही मनुष्य के व्यवहार को बदल सकता है। प्रेमचंद हास्य और विडंबना के माध्यम से यह भी पूछते हैं कि अचानक मिली संपत्ति के सामने दोस्ती और नैतिकता कितनी स्थिर रह सकती है।

40 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत कुसुम का कवर इमेज
कहानी1932

कुसुम

Kusum

प्रेमचंद की 'कुसुम' पत्रात्मक शैली में लिखी गई ऐसी सामाजिक कहानी है जिसमें एक नवविवाहिता का पति विवाह के बाद उससे बात तक नहीं करता, क्योंकि वह चाहता है कि उसके ससुर उसे विलायत जाकर पढ़ने के लिए धन दें। कुसुम बार-बार प्रेम और विनम्रता से पत्र लिखकर पूछती है कि उससे क्या अपराध हुआ है, लेकिन पति कोई उत्तर नहीं देता। जब कुसुम के पिता पति की शिक्षा के लिए पैसे भेजने की सोचते हैं, तो कुसुम इसका विरोध करती है। वह समझ जाती है कि पति की उदासीनता वास्तव में एक आर्थिक रणनीति है—वह उसे भावनात्मक रूप से तोड़कर उसके मायके से अपनी शिक्षा का खर्च निकलवाना चाहता है। अंततः बार-बार संबंध सुधारने के प्रयास विफल होने पर कुसुम आत्मसम्मान को ऐसे विवाह से ऊपर रखती है जिसमें उसके साथ अन्याय हो रहा है। प्रेमचंद दहेज-सदृश आर्थिक मांग, पितृसत्तात्मक वैवाहिक सत्ता और उस दोहरे सामाजिक मानदंड की आलोचना करते हैं जिसमें पति पत्नी की उपेक्षा कर सकता है, लेकिन पत्नी के परिवार से लगातार त्याग की अपेक्षा की जाती है।

52 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत कुत्सा का कवर इमेज
कहानी1932

कुत्सा

Kutsa

प्रेमचंद की 'कुत्सा' चुगली, अपुष्ट आरोप और राजनीतिक-सामाजिक जीवन में फैली निंदा के दुष्परिणामों पर केंद्रित कहानी है। कथावाचक अपने मित्रों के साथ एक राष्ट्रीय संस्था के तीन प्रमुख कार्यकर्ताओं की आलोचना करता है और उन पर धन के दुरुपयोग, शराबखोरी तथा दिखावे जैसे आरोप लगाए जाते हैं। बाद में जब वह लगभग दस वर्ष की एक बालिका को उसके घर पहुँचाने जाता है, तो उसे पता चलता है कि वही अफवाहें बच्ची के मन में भी पहुँच चुकी हैं। कथावाचक स्वयं उन आरोपों की चर्चा कर चुका है, फिर भी वह बच्ची के निर्मल मन को कटुता और निंदा से बचाने के लिए उन्हें झूठा बताता है। कहानी का अंतिम व्यंग्य यही है कि उस दिन उसे एक सुरक्षात्मक झूठ बोलकर जितनी खुशी होती है, उतनी शायद कभी सच बोलकर भी नहीं हुई थी।

13 मिनट