मुंशी प्रेमचंद की कालजयी कहानियाँ (भाग-5)
मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी श्रृंखला ‘मानसरोवर भाग-5’ में संकलित कुल 23 अमर रचनाएँ। ऑनलाइन निःशुल्क पढ़ें।
Agni Samadhi
प्रेमचंद की मार्मिक कहानी 'अग्नि-समाधि' गरीबी, नशे, दांपत्य संघर्ष, स्त्री-पीड़ा और आत्मबलिदान की कथा है। पयाग के नशे और साधु-संग में फँसने तथा सिलिया के घर आने से रुक्मिन का जीवन संकटों से भर जाता है। अंत में खेत को आग से बचाने के प्रयास में रुक्मिन का आत्मबलिदान कहानी को करुण त्रासदी में बदल देता है।
Actress
प्रेमचंद की कहानी 'एक्ट्रेस' सिनेमा, प्रसिद्धि, प्रेम, विवाह और ईर्ष्या की दुनिया को सामने लाती है। एक प्रसिद्ध अभिनेत्री के जीवन के माध्यम से कहानी दिखाती है कि मंच और पर्दे की चमक के पीछे व्यक्तिगत संबंध कितने जटिल और अस्थिर हो सकते हैं।
Atma Sangeet
प्रेमचंद की कहानी 'आत्म-संगीत' रानी मनोरमा की आध्यात्मिक खोज की कथा है। आधी रात नदी के किनारे सुनाई देने वाला रहस्यमय संगीत उसे राजमहल, धन और ऐश्वर्य से दूर खींच ले जाता है और अंततः उसे आत्मिक आनंद तथा भीतर के संगीत का अनुभव होता है।
Aansuon Ki Holi
प्रेमचंद की कहानी 'आँसुओं की होली' होली के उल्लास और एक गरीब परिवार के दुःख के बीच का मार्मिक विरोधाभास प्रस्तुत करती है। रंगों और उत्सव के बीच परिवार की गरीबी, बीमारी और पीड़ा कहानी को करुण मानवीय अनुभव में बदल देती है।
Bahishkar
प्रेमचंद की 'बहिष्कार' सामाजिक बहिष्कार, स्त्री की गरिमा, दांपत्य-निष्ठा और सामाजिक दबाव की त्रासदीपूर्ण कहानी है। गोविंदी अपने घर में परित्यक्ता कालिंदी को बहन के समान आश्रय देती है, लेकिन सोमदत्त अपने प्रभाव का उपयोग करके उसे कालिंदी को घर से निकालने के लिए बाध्य करना चाहता है। जब ज्ञानचंद्र और उनका परिवार सामाजिक बहिष्कार का शिकार होते हैं, तो आर्थिक संकट, भूख और अंततः मृत्यु उनका पीछा करती है। इसके बावजूद ज्ञानचंद्र गोविंदी के प्रति अपनी निष्ठा नहीं छोड़ते।
Chori
प्रेमचंद की 'चोरी' गरीबी, भूख, बाल-मन, अपराध-बोध और मानवीय करुणा पर आधारित संक्षिप्त कहानी है। भूख से विवश होकर एक बच्चा चोरी करता है, लेकिन यह घटना उसके भीतर गहरे अपराध-बोध और नैतिक संघर्ष को जन्म देती है। प्रेमचंद चोरी को केवल व्यक्तिगत अपराध के रूप में नहीं देखते, बल्कि उन सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों पर भी प्रश्न उठाते हैं जो एक बच्चे को गलत रास्ते पर जाने के लिए विवश कर सकती हैं।
Istifa
प्रेमचंद की कहानी 'इस्तीफ़ा' सरकारी नौकरी, आत्मसम्मान और राष्ट्रीय चेतना के संघर्ष की कथा है। औपनिवेशिक शासन की सेवा और अपने देश के प्रति कर्तव्य के बीच उत्पन्न नैतिक द्वंद्व अंततः त्याग और आत्मसम्मान की ओर ले जाता है।
Hinsa Parmo Dharma
प्रेमचंद की 'हिंसा परमो धर्म' धार्मिक पाखंड, सांप्रदायिक पूर्वाग्रह और धर्म के नाम पर होने वाली हिंसा पर तीखा व्यंग्य है। सरल और परोपकारी स्वभाव का जामिद पहले इसलिए सम्मानित किया जाता है क्योंकि कुछ लोग उसे अपने धर्म में शामिल करना चाहते हैं, लेकिन जब वह एक हिंदू वृद्ध को अत्याचार से बचाता है तो वही लोग उस पर हमला कर देते हैं। बाद में वह एक हिंदू स्त्री को जबरन धर्मांतरण और अत्याचार से बचाता है। जामिद के अनुभवों के माध्यम से प्रेमचंद दिखाते हैं कि मनुष्य की नैतिकता उसकी धार्मिक पहचान से नहीं, बल्कि उसके व्यवहार और मानवता से निर्धारित होती है।
Ishwariya Nyay
प्रेमचंद की कहानी 'ईश्वरीय न्याय' मनुष्य के कर्म, अपराध, दंड और न्याय की धारणा पर विचार करती है। कहानी यह प्रश्न उठाती है कि क्या न्याय केवल मनुष्य की अदालतों से मिलता है या कर्मों के परिणाम अंततः अपना न्याय स्वयं करते हैं।
Kaptan Sahab
प्रेमचंद की कहानी 'कप्तान साहब' मित्रता, सामाजिक प्रतिष्ठा और दिखावे पर आधारित हास्य-व्यंग्यपूर्ण कथा है। कथावाचक की स्मृतियों के माध्यम से कहानी बाहरी पद और प्रतिष्ठा के पीछे छिपी मानवीय कमजोरियों तथा सामाजिक मानसिकता पर व्यंग्य करती है।
Kamna-Taru
प्रेमचंद की 'कामना-तरु' प्रेम, वियोग, स्मृति, प्रतीक्षा और त्याग की अत्यंत मार्मिक कहानी है। कुँवर राजनाथ शत्रुओं से बचकर एक छोटे-से गाँव के जागीरदार कुबेरसिंह के यहाँ आश्रय लेते हैं और उनकी पुत्री चंदा से प्रेम करने लगते हैं। चंदा द्वारा लगाया गया एक छोटा-सा पौधा दोनों के प्रेम और उनकी साझा स्मृतियों का प्रतीक बन जाता है। राजनाथ की गिरफ्तारी के बाद बीस वर्ष का वियोग उन्हें उस स्थान की ओर खींचता रहता है जहाँ उनका प्रेम अंकुरित हुआ था।
Kazaki
प्रेमचंद की कहानी 'कज़ाकी' बचपन की स्मृतियों, स्नेह, करुणा और मानवीय गरिमा की मार्मिक कथा है। कज़ाकी डाक विभाग का एक हँसमुख और साहसी हरकारा है, जो एक हिरन के बच्चे को पकड़ने में देर कर देता है और नौकरी खो देता है। उसके प्रति बालक का प्रेम और कज़ाकी का आत्मसम्मान कहानी को अत्यंत भावुक बना देते हैं।
Lanchhan
प्रेमचंद की कहानी 'लांछन' दांपत्य जीवन में संदेह, अविश्वास और चरित्र पर लगाए गए झूठे आरोपों की मार्मिक कथा है। श्यामकिशोर अपनी पत्नी देवी के चरित्र पर संदेह करने लगते हैं और उनका अविश्वास धीरे-धीरे परिवार के प्रेम और विश्वास को नष्ट कर देता है।
Pisanhari Ka Kuan
प्रेमचंद की कहानी 'पिसनहारी का कुआँ' एक गरीब विधवा की मेहनत, आत्मसम्मान और लोकसेवा की मार्मिक कथा है। जीवन भर पिसाई करके जमा किए गए उसके रुपये गाँव के लिए कुआँ बनवाने में लगते हैं और उसकी अधूरी इच्छा अंततः उसके पौत्र द्वारा पूरी होती है।
Prayashchit
प्रेमचंद की कहानी 'प्रायश्चित' अपराध-बोध, पश्चाताप और नैतिक जिम्मेदारी की कथा है। एक भूल से उत्पन्न संकट पात्रों को अपने कर्मों के परिणामों का सामना करने और सच्चे प्रायश्चित का अर्थ समझने के लिए विवश करता है।
Ramleela
प्रेमचंद की 'रामलीला' बचपन की श्रद्धा, निष्कपट प्रेम और वयस्क समाज के पाखंड से हुए नैतिक जागरण की मार्मिक कहानी है। कथावाचक अपने बचपन को याद करता है, जब रामलीला में राम की भूमिका निभाने वाले रामचंद्र के प्रति उसकी श्रद्धा लगभग भक्ति जैसी थी। लेकिन दशहरे के अवसर पर वह देखता है कि समाज रामलीला के कलाकारों की उपेक्षा करते हुए एक नर्तकी पर धन लुटाता है। यह अनुभव उसके बाल-मन में धार्मिक आडंबर, सामाजिक प्रतिष्ठा और वास्तविक भक्ति के बीच का अंतर उजागर करता है।
Mandir
प्रेमचंद की 'मंदिर' जातिगत भेदभाव, मातृ-प्रेम, धार्मिक पाखंड और सामाजिक बहिष्कार पर आधारित अत्यंत मार्मिक कहानी है। दलित विधवा सुखिया अपने बीमार पुत्र जियावन के जीवन के लिए ठाकुर जी से प्रार्थना करना चाहती है, लेकिन मंदिर में प्रवेश करने से उसे रोक दिया जाता है। अंततः जब वह अपने बच्चे को लेकर मंदिर के भीतर जाने का साहस करती है, तो जाति-व्यवस्था के रक्षक उस पर हिंसक प्रहार करते हैं और उसका पुत्र तथा स्वयं सुखिया प्राण खो देते हैं।
Mantra
प्रेमचंद की कहानी 'मंत्र' आस्था, करुणा और मानवीयता की मार्मिक कथा है। एक गरीब बूढ़े भगत का वही डॉक्टर के पुत्र को बचाने के लिए आधी रात दौड़कर पहुँचना, जिसने कभी उसकी सहायता नहीं की थी, पेशेवर कर्तव्य और सच्ची मानवता के अंतर को उजागर करता है।
Nimantran
प्रेमचंद की 'निमंत्रण' हास्य-व्यंग्य से भरपूर कहानी है, जिसमें पंडित मोटेराम शास्त्री और उनके मित्र पंडित चिंतामणि के माध्यम से भोजन-लालच, स्वार्थ, दिखावा, मित्रता, प्रतिस्पर्धा और सामाजिक प्रतिष्ठा की विडंबनाओं को उजागर किया गया है। रानी साहब के यहाँ सात ब्राह्मणों के भोज का निमंत्रण मिलने पर मोटेराम अपने पूरे परिवार को अलग-अलग नामों से ब्राह्मण बनाकर ले जाने की योजना बनाते हैं। चिंतामणि को भोज से दूर रखने की कोशिश अंततः दोनों मित्रों के बीच हास्यास्पद प्रतिस्पर्धा और एक विचित्र भोजन-कांड को जन्म देती है।
Mamta
प्रेमचंद की कहानी 'ममता' मातृप्रेम, अहंकार, दिखावटी समाजसेवा और पारिवारिक संबंधों की मार्मिक कथा है। बाबू रामरक्षादास धन और प्रतिष्ठा के अहंकार में अपनी माँ से अलग हो जाते हैं, लेकिन माँ का निस्वार्थ प्रेम अंततः संकट में पड़े पुत्र की रक्षा करता है।
Sohag Ka Shav
प्रेमचंद की कहानी 'सोहाग का शव' विवाह, प्रेम, विश्वासघात और स्त्री के आत्मसम्मान की मार्मिक कथा है। प्रोफेसर केशव उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड जाते हैं और वहाँ दूसरी युवती के प्रेम में पड़ जाते हैं। उनकी पत्नी सुभद्रा जब उनके पास पहुँचती है तो उसे पता चलता है कि उसके विवाह का प्रेम भीतर से मर चुका है।
Sati
प्रेमचंद की कहानी 'सती' स्त्री के जीवन, विधवा होने की सामाजिक पीड़ा और पारंपरिक मर्यादाओं के दबाव की कथा है। कहानी स्त्री की गरिमा और स्वतंत्र भावनाओं को केवल पति और विवाह से जोड़कर देखने वाली सामाजिक मानसिकता पर प्रश्न उठाती है।
Sujan Bhagat
प्रेमचंद की कहानी 'सुजान भगत' एक किसान की आत्मसम्मान और पारिवारिक अधिकार की मार्मिक कथा है। धन और धार्मिक प्रतिष्ठा पाने के बाद सुजान अपने ही घर में अधिकार खो देते हैं, लेकिन फिर कठोर परिश्रम करके अपनी उपयोगिता और सम्मान पुनः प्राप्त करते हैं।
मानसरोवर भाग 5 मुंशी प्रेमचंद के सर्वश्रेष्ठ कथा-साहित्य का एक महत्वपूर्ण स्तम्भ है। इसमें संग्रहीत कहानियाँ सामाजिक यथार्थ, ग्रामीण जीवन की करुणा और मानवीय संवेदनाओं का सजीव वर्णन प्रस्तुत करती हैं। ऊपर दी गई सूची से आप भाग 5 की किसी भी कहानी को चुनकर उसका पूर्ण पाठ पढ़ सकते हैं।