मुंशी प्रेमचंद की कालजयी कहानियाँ (भाग-1)
मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी श्रृंखला ‘मानसरोवर भाग-1’ में संकलित कुल 27 अमर रचनाएँ। ऑनलाइन निःशुल्क पढ़ें।
Aakhiri Heela
प्रेमचंद की कहानी 'आखिरी हिला' एक निस्वार्थ पुत्र रग्घू की कथा है जो अपनी सौतेली माँ और भाइयों के लिए सब कुछ त्याग देता है।
Anubhav
प्रेमचंद की कहानी 'अनुभव' दर्शाती है कि कैसे जीवन के अनुभव चरित्र को बदलते हैं और कठिनाइयों से ज्ञान प्राप्त होता है।
Algyojha
प्रेमचंद की 'अलग्योझा' संयुक्त परिवार के बँटवारे, आर्थिक कठिनाइयों, सौतेले संबंधों, ईर्ष्या और पारिवारिक स्वार्थ की मार्मिक कहानी है। रग्घू, पन्ना और मुलिया के माध्यम से प्रेमचंद दिखाते हैं कि घर का विभाजन केवल संपत्ति का बँटवारा नहीं करता, बल्कि संबंधों और बच्चों के जीवन को भी तोड़ देता है; वहीं त्याग, ममता और पश्चात्ताप टूटे हुए परिवार को फिर से जोड़ सकते हैं।
Dhikkar
प्रेमचंद की यह मार्मिक कहानी 'धिक्कार' एक विधवा की कहानी है जो परिवार की क्रूरता और समाज की निंदा से इतनी अभिभूत हो जाती है कि अंततः आत्महत्या कर लेती है।
Dil ki Rani
प्रेमचंद की यह ऐतिहासिक कहानी एक महिला योद्धा की है जो पुरुष के वेश में तैमूरलंग को बुद्धि और करुणा से सुधारती है।
Beton Wali Vidhwa
प्रेमचंद की कहानी 'बेटों वाली विधवा' एक विधवा की त्रासदी है जो चार योग्य बेटों के बावजूद अपना अधिकार खो देती है।
Bade Bhai Sahab
प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी 'बड़े भाई साहब' दो भाइयों के प्रेम, शिक्षा, अनुशासन और बालमन की चंचलता की हास्यपूर्ण कथा है। बड़ा भाई पढ़ाई को लेकर अत्यंत गंभीर है, जबकि छोटा भाई खेल-कूद में अधिक रुचि रखता है और फिर भी परीक्षाओं में बार-बार सफल होता है।
Eidgah
प्रेमचंद की कहानी 'ईदगाह' छोटे हामिद की कहानी है जो ईद के मेले में खिलौने की जगह दादी के लिए चिमटा खरीदता है।
Gulli Danda
प्रेमचंद की कहानी 'गुल्ली डंडा' बचपन के खेलों की याद और दोस्ती के अदा न चुकाए गए कर्ज़ की कहानी है।
Gila
प्रेमचंद की 'गिला' पति-पत्नी के संबंधों में छिपी शिकायतों, असमान अपेक्षाओं और घरेलू जिम्मेदारियों पर केंद्रित एक रोचक व्यंग्यात्मक कहानी है। पत्नी की दृष्टि से कही गई कहानी में उसका पति बाहर के लोगों के प्रति अत्यंत उदार, विनम्र और परोपकारी है, लेकिन उसकी यही उदारता घर की आवश्यकताओं की उपेक्षा बन जाती है। वह मित्रों पर पैसे खर्च करता है, गरीबों को अपना सामान दे देता है, खराब दुकानदारों से सामान खरीदता है और बच्चों के प्रति अनुशासन में भी अत्यधिक नरम है। पत्नी की शिकायत केवल उसके व्यवहार से नहीं, बल्कि इस बात से है कि समाज जिस उदारता की प्रशंसा करता है, उसका भार घरवालों को उठाना पड़ता है। हास्य और घरेलू प्रसंगों के माध्यम से प्रेमचंद बाहरी यश और वास्तविक पारिवारिक जिम्मेदारी के बीच के विरोधाभास को उजागर करते हैं।
Jhanki
प्रेमचंद की 'झाँकी' एक मध्यवर्गीय परिवार में सास-बहू के संघर्ष और उसके बीच पिसते पति की मनोवैज्ञानिक स्थिति की कहानी है। तीज के अवसर पर बहन के घर भेजे जाने वाले उपहारों को लेकर माँ और पत्नी विद्या के बीच विवाद शुरू होता है। घटती आय और बढ़ते खर्च के बीच यह मामूली आर्थिक प्रश्न धीरे-धीरे पुराने आरोपों, अधिकार-बोध, रूढ़ियों और बदलते समय के संघर्ष में बदल जाता है। जन्माष्टमी के दिन घर में ऐसा तनाव फैल जाता है कि बच्चों तक को स्नेह नहीं मिलता। एक धार्मिक झाँकी और उससे जुड़ी स्मृतियाँ कथावाचक के भीतर अचानक परिवर्तन पैदा करती हैं। उसे अपने मृत भाई, अपनी माँ और विवाह के शुरुआती दिनों की याद आती है और जिन लोगों से वह क्रोधित था, उन्हीं के प्रति उसके भीतर करुणा और प्रेम जाग उठता है। प्रेमचंद दिखाते हैं कि स्मृति और आत्मचिंतन कभी-कभी लंबे समय से जमा पारिवारिक कटुता को पिघला सकते हैं।
Ghaswali
प्रेमचंद की 'घासवाली' जाति, गरीबी, स्त्री-अस्मिता और यौन उत्पीड़न पर केंद्रित एक सशक्त कहानी है। गरीब चमार स्त्री मुलिया घास बेचकर अपने परिवार का पालन करने में मदद करती है। ठाकुर चैनसिंह उसकी सुंदरता का लाभ उठाकर उसके साथ अनुचित व्यवहार करने की कोशिश करता है। मुलिया डरने या झुकने के बजाय उसके सामने निर्भीकता से खड़ी होती है और उसे बताती है कि उसकी हिम्मत का आधार केवल जातिगत और आर्थिक सत्ता है। उसके तीखे प्रश्न चैनसिंह को अपने व्यवहार और सामाजिक पूर्वाग्रहों पर विचार करने के लिए मजबूर करते हैं। इसके बाद चैनसिंह का व्यवहार बदलने लगता है और वह अपने मजदूरों के साथ अधिक मानवीय व्यवहार करने लगता है। कहानी दिखाती है कि गरीबी स्त्री को असुरक्षित बनाती है, लेकिन उसकी गरिमा और आत्मसम्मान को समाप्त नहीं करती।
Ghar Jamai
प्रेमचंद की 'घर जमाई' आर्थिक निर्भरता, पारिवारिक स्वार्थ और आत्मसम्मान की मार्मिक ग्रामीण कहानी है। हरिधन विवाह के बाद ससुराल में ही बस जाता है और अपनी संपत्ति भी ससुरालवालों को सौंप देता है। उसे लगता है कि सास-ससुर और पत्नी का प्रेम सच्चा है और यही घर अब उसका स्थायी घर है। लेकिन जैसे-जैसे उसकी संपत्ति समाप्त होती जाती है, परिवार का व्यवहार बदल जाता है। जो दामाद कभी घर का लाड़ला था, वही धीरे-धीरे सबसे अधिक काम करने वाला और सबसे कम सम्मान पाने वाला व्यक्ति बन जाता है। उसे भोजन तक के लिए उपेक्षा और अपमान सहना पड़ता है। अंततः एक तीखी पारिवारिक घटना के बाद हरिधन अपने गाँव लौटता है। वहाँ वह अपनी माँ की स्मृतियों, अपनी जमीन और श्रम के माध्यम से फिर से आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान प्राप्त करता है। कहानी दिखाती है कि जब रिश्तों में आर्थिक स्वार्थ प्रवेश कर जाता है तो स्नेह भी शोषण में बदल सकता है।
Kayar
प्रेमचंद की 'कायर' प्रेम, जाति और सामाजिक दबाव के सामने व्यक्ति के साहस की परीक्षा की त्रासद कहानी है। प्रगतिशील विचारों वाला ब्राह्मण युवक केशव वैश्य कन्या प्रेमा से प्रेम करता है और जातिगत बंधनों को तोड़कर उससे विवाह करना चाहता है। प्रेमा भी उससे प्रेम करती है, लेकिन प्रारंभ में माता-पिता और कुल-मर्यादा के प्रति अपनी जिम्मेदारी के कारण विवाह का निर्णय स्वयं लेने से हिचकती है। धीरे-धीरे वह अपने जीवन पर अधिकार और प्रेम-आधारित विवाह की आवश्यकता को स्वीकार करती है। लेकिन जब केशव के पिता उसे घर से निकालने और संपत्ति से वंचित करने की धमकी देते हैं, तो केशव अपने सिद्धांतों से पीछे हट जाता है और प्रेमा को स्वीकार करने से इंकार कर देता है। प्रेमा के लिए यह केवल प्रेम की असफलता नहीं बल्कि विश्वास का टूटना है। प्रेमचंद केशव की कायरता के माध्यम से दिखाते हैं कि सामाजिक रूढ़ियों का विरोध केवल भाषणों से नहीं, बल्कि उनके परिणामों को सहने के साहस से सिद्ध होता है।
Maa
प्रेमचंद की कहानी 'माँ' करुणा की कहानी है जिसका स्वतंत्रता सेनानी पति जेल से टूटा हुआ आदमी बनकर लौटता है।
Lanchhan
प्रेमचंद की 'लांछन' चुगली, अफवाह, नैतिक पहरेदारी और बिना प्रमाण स्त्रियों के चरित्र पर आरोप लगाने की प्रवृत्ति पर तीखा व्यंग्य है। महिला-आश्रम की वृद्ध सेविका जुगनूबाई ने स्वयं को दूसरी स्त्रियों के चरित्र की अनौपचारिक प्रहरी बना लिया है। वह उनके निजी जीवन की टोह लेती, छोटी-छोटी बातों को संदेह की दृष्टि से देखती और फिर उन्हें बढ़ा-चढ़ाकर पूरे समाज में फैलाती है। जब नई शिक्षित प्रधानाध्यापिका मिस खुरशेद उसकी निगाह का निशाना बनती हैं, तो वे उसकी इसी प्रवृत्ति को उसके सामने उजागर करने का निर्णय लेती हैं। अपनी डॉक्टर मित्र लीलावती की सहायता से वे ऐसा अभिनय करती हैं जिससे जुगनूबाई को विश्वास हो जाता है कि उसने एक अनैतिक संबंध देख लिया है। जुगनूबाई बिना सत्य जाने यह अफवाह पूरे शहर में फैला देती है। अंत में पता चलता है कि जिस पुरुष को उसने विलियम किंग समझा था, वह वास्तव में डॉक्टर लीलावती थी जो पुरुष का वेश धारण किए हुए थी। इस प्रकार आरोप लगाने वाली स्वयं उपहास का पात्र बन जाती है। प्रेमचंद हास्य के माध्यम से दिखाते हैं कि अफवाह और चरित्र-हनन सामाजिक नियंत्रण के साधन कैसे बन जाते हैं और स्त्रियाँ स्वयं भी दूसरी स्त्रियों की स्वतंत्रता पर पहरा देने वाली व्यवस्था का हिस्सा कैसे बन सकती हैं।
Jyoti
प्रेमचंद की 'ज्योति' एक युवा विधवा बूटी के भीतर आए भावनात्मक परिवर्तन की कहानी है। पति की मृत्यु के बाद पाँच वर्षों से बूटी अपने तीन बच्चों को कठिन परिस्थितियों में पाल रही है। उसने अपने लिए दूसरा विवाह करने की संभावना छोड़ दी और अपनी इच्छाओं को दबाते-दबाते उसका स्वभाव कठोर हो गया। वह अपने बड़े बेटे मोहन के रूपिया से प्रेम को भी संदेह की दृष्टि से देखती है। लेकिन जब मोहन परिवार के प्रति स्नेह और उदारता दिखाने लगता है, तो बूटी के भीतर वर्षों से दबा मातृत्व और प्रेम फिर जाग उठता है। बाद में उसे पता चलता है कि जिसे वह केवल शौक-सिंगार में लगी लड़की समझती थी, वही रूपिया कठिन समय में पड़ोस की स्त्री की सहायता करती रही है। बूटी का संदेह करुणा में बदल जाता है और अंततः वह स्वयं मोहन और रूपिया के विवाह की बात आगे बढ़ाती है। कहानी दिखाती है कि स्नेह मनुष्य के भीतर जमी कटुता, अकेलेपन और संदेह को बदल सकता है।
Manovritti
प्रेमचंद की 'मनोवृत्ति' समाज की उस मानसिकता पर तीखा व्यंग्य है जो किसी स्त्री के बारे में बिना सत्य जाने उसके चरित्र और नैतिकता के निर्णय कर देती है। गांधी पार्क की एक बेंच पर सोती हुई एक युवती को देखकर वहाँ आने वाले पुरुष और स्त्रियाँ अपने-अपने पूर्वाग्रहों के आधार पर उसके बारे में तरह-तरह की धारणाएँ बनाने लगते हैं। कोई उसे वेश्या समझता है, कोई आधुनिकता का प्रतीक, तो कोई कुलवधू। अंत में युवती की वास्तविक स्थिति सामने आने पर स्पष्ट होता है कि लोगों के सारे अनुमान निराधार थे। प्रेमचंद इस विरोधाभास के माध्यम से स्त्री की स्वतंत्रता, सामाजिक निगरानी और लैंगिक दोहरे मानदंड पर प्रश्न उठाते हैं।
Nasha
प्रेमचंद की कहानी 'नशा' में एक गरीब छात्र अपने अमीर दोस्त की जागीर में जाकर धन-सत्ता के नशे में चूर हो जाता है।
Rasik Sampadak
प्रेमचंद की 'रसिक संपादक' संपादकीय सत्ता, पुरुष-मानसिकता और स्त्री लेखिकाओं के प्रति दोहरे व्यवहार पर तीखा और हास्यपूर्ण व्यंग्य है। 'नवरस' के विधुर संपादक पंडित चोखेलाल शर्मा स्त्री लेखिकाओं की रचनाएँ तुरंत स्वीकार करते हैं और उनकी अत्यधिक प्रशंसा करते हैं, जबकि पुरुषों की अच्छी रचनाएँ भी रद्दी में डाल देते हैं। लेकिन उनकी कथित साहित्यिक उदारता वास्तव में साहित्यिक गुणों से अधिक स्त्रियों के प्रति उनके आकर्षण पर आधारित है। कामाक्षी नाम की एक लेखिका की प्रेमपूर्ण कविता पढ़कर वे उसके बारे में अपनी कल्पना में एक सुंदर स्त्री की तस्वीर बना लेते हैं और उसे मिलने के लिए बुलाते हैं। जब कामाक्षी वास्तव में उनके सामने आती है और उनकी कल्पना से बिल्कुल अलग निकलती है, तो उनका सारा उत्साह समाप्त हो जाता है। प्रेमचंद इस विडंबना के माध्यम से दिखाते हैं कि स्त्रियों की प्रशंसा करने वाला पुरुष भी उन्हें स्वतंत्र रचनाकार के रूप में नहीं, बल्कि अपनी कल्पना और आकर्षण की वस्तु के रूप में देख सकता है।
Poos Ki Raat
प्रेमचंद की कहानी 'पूस की रात' किसान हल्कू की कहानी है जो बिना कंबल के जाड़े की रात में अपनी फसल की रखवाली करता है।
Shanti
शांति प्रेमचंद की मार्मिक कहानी है जो पति की मृत्यु के बाद अकेले बेटी का पालन करती एक विधवा की शांत शक्ति और गरिमा को दर्शाती है।
Subhagi
प्रेमचंद की 'सुभागी' एक बाल-विधवा के श्रम, आत्मसम्मान और पारिवारिक कर्तव्य की अत्यंत प्रभावशाली ग्रामीण कहानी है। तुलसी महतो की बेटी सुभागी बचपन में ही विधवा हो जाती है, लेकिन अपने बूढ़े माता-पिता का सहारा बनने के लिए स्वयं विवाह से इंकार कर देती है। उसका भाई रामू आलसी और स्वार्थी है तथा उसे लगता है कि बहन और माता-पिता उसके ऊपर बोझ हैं। परिवार के बँटवारे के बाद भी सुभागी अपने माता-पिता की सेवा करती है और खेती तथा मजदूरी करके उनका जीवन चलाती है। माता-पिता की मृत्यु के बाद वह उनके अंतिम संस्कार पर लिया गया कर्ज अपने श्रम से चुकाने का संकल्प करती है और तीन वर्षों तक कठिन परिश्रम करके पाँच सौ रुपये का पूरा ऋण चुका देती है। उसकी मेहनत, आत्मनिर्भरता और चरित्र से प्रभावित होकर गाँव के मुखिया सज्जन सिंह उसे अपनी बहू बनाने का प्रस्ताव देते हैं। कहानी बेटी को बोझ और बेटे को स्वाभाविक सहारा मानने वाली मानसिकता को चुनौती देती है और स्त्री के श्रम तथा आत्मसम्मान को उसकी वास्तविक शक्ति के रूप में प्रस्तुत करती है।
Swamini
प्रेमचंद की 'स्वामिनी' एक विधवा के परिवर्तन की कहानी है जो घर की मालकिन बनकर शक्ति का अनुभव करती है।
Shikar
प्रेमचंद की 'शिकार' दांपत्य जीवन में भावनात्मक उपेक्षा, स्त्री की आत्मसम्मानपूर्ण स्वतंत्रता और प्रेम की पुनर्खोज की कहानी है। रानी वसुधा एक समृद्ध घर में विवाह करके आती है और आरंभ में उसे लगता है कि संपत्ति ही सुख का आधार है। लेकिन शीघ्र ही उसे अनुभव होता है कि पति का प्रेम और साथ संपत्ति से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
Thakur Ka Kuan
प्रेमचंद की कहानी 'ठाकुर का कुआँ' गंगी की कहानी है जो अपने बीमार पति के लिए ठाकुर के कुएँ से पानी चुराने जाती है।
Tawan
प्रेमचंद की 'तावान' स्वदेशी आंदोलन, गरीबी और आर्थिक दबाव के बीच पैदा होने वाले नैतिक संघर्ष की कहानी है। छकौड़ीलाल एक गरीब कपड़ा व्यापारी है जो विदेशी कपड़े के बहिष्कार के आंदोलन में शामिल होता है। लेकिन घर में बूढ़ी माँ, बीमार पत्नी और पाँच बच्चों का खर्च चलाना कठिन हो जाता है। मजबूरी में वह फिर विदेशी कपड़ा बेच देता है। बहिष्कार समिति उस पर 101 रुपये का तावान लगा देती है, जबकि उसके घर में दो दिन से चूल्हा तक नहीं जला है। प्रेमचंद इस घटना के माध्यम से दिखाते हैं कि राष्ट्रीय आंदोलन के आदर्श और गरीब व्यक्ति की आर्थिक वास्तविकता हमेशा एक-दूसरे से आसानी से मेल नहीं खाते। कहानी आंदोलन की भावना का विरोध नहीं करती, बल्कि यह प्रश्न उठाती है कि क्या आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति को सुधार या राष्ट्रहित के नाम पर ऐसी सजा देना न्यायपूर्ण है जो उसके परिवार को भूख के कगार पर पहुँचा दे।
मानसरोवर भाग 1 मुंशी प्रेमचंद के सर्वश्रेष्ठ कथा-साहित्य का एक महत्वपूर्ण स्तम्भ है। इसमें संग्रहीत कहानियाँ सामाजिक यथार्थ, ग्रामीण जीवन की करुणा और मानवीय संवेदनाओं का सजीव वर्णन प्रस्तुत करती हैं। ऊपर दी गई सूची से आप भाग 1 की किसी भी कहानी को चुनकर उसका पूर्ण पाठ पढ़ सकते हैं।