सुहाग की साड़ी
Suhag Ki Sari
प्रेमचंद की कहानी 'सुहाग की साड़ी' स्वतंत्रता आंदोलन और स्वदेशी भावना की पृष्ठभूमि में लिखी गई मार्मिक कहानी है। श्यामा के पति वियोग और देशसेवा के आदर्श को अपने जीवन में धारण करने के बाद, वह उनके द्वारा लाई गई सुहाग की साड़ी को भी देशहित में त्याग देती है। निजी प्रेम और वैवाहिक स्मृति से जुड़ी वस्तु का यह त्याग उसके देशप्रेम और बलिदान का प्रतीक बन जाता है।