कहानियाँ

Short Stories

भारतीय जनजीवन और समाज की यथार्थ तस्वीर प्रस्तुत करती प्रेमचंद की 300 से अधिक कालजयी कहानियाँ।

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मुंशी प्रेमचंद कृत सुहाग की साड़ी का कवर इमेज
कहानी1931

सुहाग की साड़ी

Suhag Ki Sari

प्रेमचंद की कहानी 'सुहाग की साड़ी' स्वतंत्रता आंदोलन और स्वदेशी भावना की पृष्ठभूमि में लिखी गई मार्मिक कहानी है। श्यामा के पति वियोग और देशसेवा के आदर्श को अपने जीवन में धारण करने के बाद, वह उनके द्वारा लाई गई सुहाग की साड़ी को भी देशहित में त्याग देती है। निजी प्रेम और वैवाहिक स्मृति से जुड़ी वस्तु का यह त्याग उसके देशप्रेम और बलिदान का प्रतीक बन जाता है।

23 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत सद्गति का कवर इमेज
कहानी1930

सद्गति

Sadgati

प्रेमचंद की कहानी 'सद्गति' जातिगत शोषण, गरीबी और धार्मिक पाखंड की तीखी कथा है। दुखी शुभ मुहूर्त पूछने के लिए पंडित घासीराम के घर जाता है और बदले में कठोर बेगार करता है, लेकिन अंततः उसकी मृत्यु हो जाती है और उसकी लाश के साथ भी जातिगत भेदभाव जारी रहता है।

22 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत समर यात्रा का कवर इमेज
कहानी1930

समर यात्रा

Samar Yatra

प्रेमचंद की कहानी 'समर यात्रा' सत्याग्रहियों के एक जत्थे के गाँव में पहुँचने और वहाँ के गरीब किसानों के भीतर स्वतंत्रता तथा आत्मसम्मान की चेतना जागने की कहानी है। नोहरी बुढ़िया, कोदई चौधरी और गाँव के अन्य लोगों के माध्यम से प्रेमचंद दिखाते हैं कि अंग्रेज़ी शासन के अत्याचार, बेगार, बढ़ते लगान और भय के बीच दबे हुए लोगों में साहस और प्रतिरोध की भावना कैसे पैदा होती है।

33 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत शराब की दुकान का कवर इमेज
कहानी1930

शराब की दुकान

Sharab Ki Dukan

प्रेमचंद की कहानी 'शराब की दुकान' भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और शराबबंदी के अभियान की पृष्ठभूमि में लिखी गई कहानी है। कांग्रेस के स्वयंसेवक शराब की दुकान के सामने धरना देकर लोगों को शराब छोड़ने के लिए प्रेरित करते हैं। मिसेज सक्सेना के साहस, जयराम के संघर्ष और शराबियों की प्रतिक्रिया के माध्यम से कहानी देशसेवा, अहिंसा, सामाजिक सुधार और स्वतंत्रता आंदोलन में महिलाओं की भूमिका को सामने लाती है।

42 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत सुभागी का कवर इमेज
कहानी1930

सुभागी

Subhagi

प्रेमचंद की 'सुभागी' एक बाल-विधवा के श्रम, आत्मसम्मान और पारिवारिक कर्तव्य की अत्यंत प्रभावशाली ग्रामीण कहानी है। तुलसी महतो की बेटी सुभागी बचपन में ही विधवा हो जाती है, लेकिन अपने बूढ़े माता-पिता का सहारा बनने के लिए स्वयं विवाह से इंकार कर देती है। उसका भाई रामू आलसी और स्वार्थी है तथा उसे लगता है कि बहन और माता-पिता उसके ऊपर बोझ हैं। परिवार के बँटवारे के बाद भी सुभागी अपने माता-पिता की सेवा करती है और खेती तथा मजदूरी करके उनका जीवन चलाती है। माता-पिता की मृत्यु के बाद वह उनके अंतिम संस्कार पर लिया गया कर्ज अपने श्रम से चुकाने का संकल्प करती है और तीन वर्षों तक कठिन परिश्रम करके पाँच सौ रुपये का पूरा ऋण चुका देती है। उसकी मेहनत, आत्मनिर्भरता और चरित्र से प्रभावित होकर गाँव के मुखिया सज्जन सिंह उसे अपनी बहू बनाने का प्रस्ताव देते हैं। कहानी बेटी को बोझ और बेटे को स्वाभाविक सहारा मानने वाली मानसिकता को चुनौती देती है और स्त्री के श्रम तथा आत्मसम्मान को उसकी वास्तविक शक्ति के रूप में प्रस्तुत करती है।

24 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत सम्पादक मोटेराम जी शास्त्री का कवर इमेज
कहानी1928

सम्पादक मोटेराम जी शास्त्री

Sampadak Moteram Jee Shastri

प्रेमचंद की कहानी 'सम्पादक मोटेराम जी शास्त्री' पंडित मोटेराम शास्त्री द्वारा 'सोना' नामक पत्रिका के सम्पादन और उसके पीछे के ढोंग व हास्यप्रद कारनामों पर एक तीखा व्यंग्य है।

21 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत शुद्धि का कवर इमेज
कहानी1928

शुद्धि

Shuddhi

प्रेमचंद की कहानी 'शुद्धि' लाला प्रेमनाथ की कहानी है, जो राह भटक कर धर्म परिवर्तन कर लेते हैं, पर अपनी निष्ठावान पत्नी गोमती के कारण पश्चात्ताप करते हुए शुद्धि स्वीकार करते हैं।

21 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत सोहाग का शव का कवर इमेज
कहानी1928

सोहाग का शव

Sohag Ka Shav

प्रेमचंद की कहानी 'सोहाग का शव' विवाह, प्रेम, विश्वासघात और स्त्री के आत्मसम्मान की मार्मिक कथा है। प्रोफेसर केशव उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड जाते हैं और वहाँ दूसरी युवती के प्रेम में पड़ जाते हैं। उनकी पत्नी सुभद्रा जब उनके पास पहुँचती है तो उसे पता चलता है कि उसके विवाह का प्रेम भीतर से मर चुका है।

58 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत सती का कवर इमेज
कहानी1927

सती

Sati

प्रेमचंद की कहानी 'सती' दांपत्य प्रेम, संदेह, ईर्ष्या, निष्ठा और पश्चाताप की मार्मिक कथा है। कल्लू अपनी सुंदर पत्नी मुलिया को लेकर हमेशा आशंकित रहता है और अपने चचेरे भाई राजा पर संदेह करता है। मुलिया की एक छोटी-सी भूल कल्लू के मन में गहरा अविश्वास पैदा कर देती है, लेकिन बाद में उसकी सेवा, निष्ठा और त्याग उसके सच्चे प्रेम को प्रमाणित करते हैं।

23 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत शूद्रा का कवर इमेज
विशेष
कहानी1926

शूद्रा

Shudra

प्रेमचंद की 'शूद्रा' प्रवासी भारतीयों, गिरमिटिया मजदूरी, स्त्री की असुरक्षा और औपनिवेशिक शोषण की अत्यंत मार्मिक कहानी है। गरीब युवती गौरा का पति मंगरू वर्षों पहले बिना बताए घर छोड़कर चला जाता है। एक दिन एक बूढ़ा ब्राह्मण यह झूठ बोलकर गौरा को अपने साथ ले जाता है कि मंगरू ने उसे बुलाया है। गौरा पति से मिलने की आशा में कलकत्ता पहुँचती है और वहाँ से जहाज द्वारा मॉरिशस भेज दी जाती है। वहाँ उसे पता चलता है कि मंगरू स्वयं गिरमिटिया मजदूर के रूप में बंधा हुआ है और भारतीय मजदूरों तथा स्त्रियों का भयंकर शोषण होता है। जब एक अंग्रेज अधिकारी गौरा को अपने अधिकार में लेना चाहता है और उसके प्रतिरोध पर मंगरू को बुरी तरह पीटता है, तब गौरा अपने पति को बचाने के लिए स्वयं को बलिदान करने को तैयार हो जाती है। कहानी प्रवासी मजदूरों को बहकाकर विदेश ले जाने वाली व्यवस्था, औपनिवेशिक सत्ता की हिंसा और स्त्री के शरीर पर अधिकार जमाने की मानसिकता को उजागर करती है।

54 मिनट