सती
Sati
प्रेमचंद की कहानी 'सती' स्त्री के जीवन, विधवा होने की सामाजिक पीड़ा और पारंपरिक मर्यादाओं के दबाव की कथा है। कहानी स्त्री की गरिमा और स्वतंत्र भावनाओं को केवल पति और विवाह से जोड़कर देखने वाली सामाजिक मानसिकता पर प्रश्न उठाती है।
Short Stories
भारतीय जनजीवन और समाज की यथार्थ तस्वीर प्रस्तुत करती प्रेमचंद की 300 से अधिक कालजयी कहानियाँ।
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Sati
प्रेमचंद की कहानी 'सती' स्त्री के जीवन, विधवा होने की सामाजिक पीड़ा और पारंपरिक मर्यादाओं के दबाव की कथा है। कहानी स्त्री की गरिमा और स्वतंत्र भावनाओं को केवल पति और विवाह से जोड़कर देखने वाली सामाजिक मानसिकता पर प्रश्न उठाती है।
Stree Aur Purush
प्रेमचंद की 'स्त्री और पुरुष' बाहरी सौंदर्य और आंतरिक सौंदर्य, आकर्षण और प्रेम, तथा दांपत्य में स्त्री की गरिमा पर केंद्रित मनोवैज्ञानिक कहानी है। कवि विपिन बाबू ने अपने मन में एक आदर्श सुंदर स्त्री की कल्पना कर रखी है। विवाह के बाद जब उन्हें पता चलता है कि उनकी पत्नी आशा उस कल्पित सौंदर्य के अनुरूप नहीं है, तो वे उससे घृणा करने लगते हैं और उसका अपमान करते हैं। वे घर से दूर रहने और विषय-भोग में डूबने लगते हैं। लेकिन जब विपिन को लकवा मार जाता है और उनका अपना चेहरा विकृत हो जाता है, तब आशा बिना किसी प्रतिशोध के उनकी सेवा करती है। उसके त्याग और प्रेम से विपिन को समझ आता है कि वास्तविक सौंदर्य शरीर में नहीं, आत्मा और चरित्र में है।
Saubhagya Ke Kode
प्रेमचंद की 'सौभाग्य के कोड़े' नथुवा नामक अनाथ बालक की कहानी है, जो जातिगत भेदभाव और गरीबी के कारण एक संपन्न घर में नौकर जैसा जीवन बिताता है। एक दिन वह घर की बेटी रत्ना के पलंग पर सो जाता है और इसके लिए राय भोलानाथ उसे बुरी तरह कोड़े मारकर घर से निकाल देते हैं। घर से निकाला जाना उसके जीवन का निर्णायक मोड़ बनता है। उसे उस्ताद घूरे के पास संगीत सीखने का अवसर मिलता है और उसकी असाधारण प्रतिभा उसे आगे चलकर प्रसिद्ध आचार्य नाथूराम बना देती है। वह ग्वालियर में शिक्षा पाता है, यूरोप जाकर पश्चिमी संगीत का अध्ययन करता है और अंतरराष्ट्रीय ख्याति अर्जित करके लखनऊ लौटता है। वहाँ उसे पता चलता है कि राय भोलानाथ जुए और सट्टे में अपनी संपत्ति गँवा चुके हैं। रत्ना अब शिक्षित युवती है और नाथूराम के संगीत से प्रभावित है। दोनों में प्रेम विकसित होता है और विवाह हो जाता है। नाथूराम को भय रहता है कि यदि उसकी जातिगत पहचान सामने आई तो रत्ना उससे घृणा करेगी, लेकिन रत्ना पहले से जानती है कि वही बचपन का नथुवा है और फिर भी उसे स्वीकार करती है। कहानी जातिगत अपमान, प्रतिभा के दमन, शिक्षा और अवसर की शक्ति तथा मानवीय संबंधों की जाति से परे संभावनाओं को सामने लाती है।
Sava Ser Gehun
प्रेमचंद की 'सवा सेर गेहूँ' ग्रामीण ऋण-व्यवस्था, सूदखोरी, किसान-शोषण और बंधुआ मजदूरी पर तीखा प्रहार करने वाली कहानी है। गरीब किसान शंकर एक साधु अतिथि को भोजन कराने के लिए केवल सवा सेर गेहूँ उधार लेता है। बाद में वह खलिहानी में उससे अधिक अनाज दे भी देता है, लेकिन महाजन उस उधार को अपने बही-खाते में जीवित रखता है। सात वर्ष बाद वही छोटा-सा ऋण साढ़े पाँच मन गेहूँ और फिर साठ रुपये के दस्तावेजी कर्ज में बदल जाता है। बढ़ते ब्याज के कारण शंकर अंततः जीवन-भर के लिए बंधुआ मजदूर बन जाता है और उसकी मृत्यु के बाद वही कर्ज उसके बेटे पर डाल दिया जाता है। प्रेमचंद दिखाते हैं कि गरीबी, अशिक्षा, धार्मिक भय और शोषणकारी ऋण-व्यवस्था मिलकर एक मामूली उधार को पीढ़ी-दर-पीढ़ी गुलामी में बदल सकती है।
Shatranj Ke Khiladi
प्रेमचंद की 'शतरंज के खिलाड़ी' उनकी सबसे प्रसिद्ध राजनीतिक व्यंग्य-कथाओं में से एक है। 1856 के लखनऊ और अवध के अंग्रेजी अधिग्रहण की पृष्ठभूमि में लिखी गई यह कहानी दो सामंती जागीरदारों—मिर्जा सज्जाद अली और मीर रोशन अली—के शतरंज-प्रेम के माध्यम से उस वर्ग की राजनीतिक निष्क्रियता और सामाजिक पतन पर व्यंग्य करती है जो अपने कर्तव्य से विमुख होकर विलासिता में डूबा हुआ है। जब अंग्रेजी सेना अवध पर अधिकार कर रही है और वाजिद अली शाह का शासन समाप्त हो रहा है, दोनों मित्र वास्तविक राजनीतिक संकट से पूरी तरह उदासीन होकर शतरंज की बाजी में डूबे रहते हैं। शतरंज उनकी निजी लत ही नहीं बल्कि उस सामंती मानसिकता का प्रतीक बन जाती है जो वास्तविक सत्ता, स्वतंत्रता और सामाजिक उत्तरदायित्व के स्थान पर निजी मनोरंजन को प्राथमिकता देती है। कहानी का सबसे तीखा व्यंग्य तब सामने आता है जब ये दोनों वास्तविक राजनीतिक संघर्ष से बचते रहने वाले व्यक्ति शतरंज की एक चाल को लेकर एक-दूसरे पर तलवारें खींच लेते हैं।
Satyagrah
प्रेमचंद की 'सत्याग्रह' औपनिवेशिक शासन, राजनीतिक स्वार्थ और धार्मिक आडंबर पर तीखा व्यंग्य है। वायसराय के बनारस आगमन के समय कांग्रेस शहर में हड़ताल का आह्वान करती है। सरकारी अधिकारी और राजभक्त स्थानीय अभिजात वर्ग दुकानों को खुला रखने की हर कोशिश में असफल होते हैं। तब वे कांग्रेस के नैतिक बल की नकल करने के लिए पंडित मोटेराम शास्त्री को अनशन पर बैठाने की योजना बनाते हैं। मोटेराम धन और प्रतिष्ठा के लालच में इस 'सत्याग्रह' को स्वीकार कर लेते हैं, लेकिन उनका सबसे बड़ा शत्रु स्वयं उनका पेट बन जाता है। प्रेमचंद हास्य के माध्यम से दिखाते हैं कि धार्मिक आस्था और नैतिक बल का इस्तेमाल राजनीतिक स्वार्थ के लिए कैसे किया जा सकता है और नकली नैतिकता वास्तविक जन-आंदोलन की बराबरी नहीं कर सकती।
Saut
प्रेमचंद की कहानी 'सौत' विवाह में ईर्ष्या, असुरक्षा और त्याग की कहानी है। पति के दूसरा विवाह करने के बाद दो स्त्रियों के बीच उत्पन्न तनाव और संबंधों के बदलते रूप के माध्यम से प्रेमचंद स्त्री-प्रतिस्पर्धा, प्रेम, ईर्ष्या और करुणा को सामने लाते हैं।
Sachchai Ka Uphar
प्रेमचंद की कहानी 'सच्चाई का उपहार' बाजबहादुर नामक एक सत्यवादी विद्यार्थी की कहानी है, जो अपने सहपाठियों द्वारा मदरसे की पुष्पवाटिका उजाड़े जाने पर झूठ बोलने से इनकार कर देता है। उसकी सच्चाई के कारण उसे मार सहनी पड़ती है, लेकिन उसके साहस, क्षमाशीलता और उदारता से अंततः सभी विद्यार्थी उसके प्रशंसक बन जाते हैं।
Seva Marg
प्रेमचंद की कहानी 'सेवा-मार्ग' तारा की कहानी है, जो बारह वर्षों की कठोर तपस्या के बाद धन, सौंदर्य और संसार के सभी सुख प्राप्त करती है। लेकिन उसे अनुभव होता है कि ऐश्वर्य और सौंदर्य प्रेम को नहीं पा सकते। अंततः वह सब कुछ त्यागकर सेवा का मार्ग अपनाती है और समझती है कि सेवा स्वयं सबसे बड़ा सुख और पुरस्कार है।
Sajjanta Ka Dand
प्रेमचंद की कहानी 'सज्जनता का दंड' शाहजहाँपुर के जिला इंजीनियर सरदार शिवसिंह की कहानी है, जो ईमानदार, न्यायप्रिय और निःस्वार्थ हैं तथा रिश्वत और कमीशन लेने से साफ इनकार करते हैं। उनकी ईमानदारी भ्रष्ट अधिकारियों और ठेकेदारों को खटकती है और अंततः उन्हें अपने सिद्धांतों की कीमत पदावनति और तबादले के रूप में चुकानी पड़ती है।
Shankhnaad
प्रेमचंद की कहानी 'शंखनाद' गुमान नामक एक मस्तमौला और गैर-जिम्मेदार युवक के आत्मजागरण की कहानी है। परिवार से उपेक्षित और काम से दूर रहने वाला गुमान अपने बेटे के साथ घटी एक मार्मिक घटना के बाद अचानक अपनी जिम्मेदारियों को समझता है और कर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प करता है।
Saut
प्रेमचंद की कहानी 'सौत' निःसंतानता, सौतिया डाह और आत्मत्याग के दुखांत परिणामों को दर्शाती एक मार्मिक कहानी है।