कहानियाँ

Short Stories

भारतीय जनजीवन और समाज की यथार्थ तस्वीर प्रस्तुत करती प्रेमचंद की 300 से अधिक कालजयी कहानियाँ।

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मुंशी प्रेमचंद कृत आँसुओं की होली का कवर इमेज
कहानी1926

आँसुओं की होली

Aansuon Ki Holi

प्रेमचंद की कहानी 'आँसुओं की होली' होली के उल्लास और एक गरीब परिवार के दुःख के बीच का मार्मिक विरोधाभास प्रस्तुत करती है। रंगों और उत्सव के बीच परिवार की गरीबी, बीमारी और पीड़ा कहानी को करुण मानवीय अनुभव में बदल देती है।

22 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत बाबाजी का भोग का कवर इमेज
कहानी1926

बाबाजी का भोग

Babaji Ka Bhog

प्रेमचंद की 'बाबाजी का भोग' धार्मिक आडंबर, अंधविश्वास और गरीब ग्रामीण परिवारों के शोषण पर तीखा व्यंग्य है। रामधन अहीर और उसकी पत्नी के घर में अनाज का लगभग कोई भंडार नहीं बचा है। महाजन और जमींदार के प्यादे उनकी उपज का बड़ा हिस्सा ले चुके हैं। ऐसे समय में एक साधु उनके द्वार पर आकर साधु-सेवा के नाम पर भोजन माँगता है। रामधन और उसकी पत्नी अपने घर के लिए बचाकर रखा थोड़ा-सा आटा, दाल, ईंधन, आलू और अंत में घी तक उसे दे देते हैं। साधु विधि-विधान से भोग तैयार करता है, स्वयं पेट भरकर खाता है और वहीं आराम से सो जाता है, जबकि रामधन का घर भूखा रह जाता है। प्रेमचंद दिखाते हैं कि धार्मिक श्रद्धा जब विवेकहीन सामाजिक दबाव में बदल जाती है, तब वह गरीबों की सहायता करने के बजाय उनके सीमित संसाधनों के शोषण का माध्यम बन सकती है।

8 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत बहिष्कार का कवर इमेज
कहानी1926

बहिष्कार

Bahishkar

प्रेमचंद की 'बहिष्कार' सामाजिक बहिष्कार, स्त्री की गरिमा, दांपत्य-निष्ठा और सामाजिक दबाव की त्रासदीपूर्ण कहानी है। गोविंदी अपने घर में परित्यक्ता कालिंदी को बहन के समान आश्रय देती है, लेकिन सोमदत्त अपने प्रभाव का उपयोग करके उसे कालिंदी को घर से निकालने के लिए बाध्य करना चाहता है। जब ज्ञानचंद्र और उनका परिवार सामाजिक बहिष्कार का शिकार होते हैं, तो आर्थिक संकट, भूख और अंततः मृत्यु उनका पीछा करती है। इसके बावजूद ज्ञानचंद्र गोविंदी के प्रति अपनी निष्ठा नहीं छोड़ते।

39 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत आभूषण का कवर इमेज
कहानी1923

आभूषण

Aabhushan

प्रेमचंद की कहानी 'आभूषण' आभूषणों के मोह, धन-संपत्ति और पारिवारिक सुख के बीच के संघर्ष को प्रस्तुत करती है। कहानी दिखाती है कि बाहरी वैभव और सामाजिक प्रतिष्ठा की चाह किस प्रकार पारिवारिक संबंधों और जीवन के वास्तविक सुख को प्रभावित कर सकती है।

49 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत आप-बीती का कवर इमेज
कहानी1923

आप-बीती

Aap Beeti

प्रेमचंद की कहानी 'आप-बीती' विश्वास, छल, स्वार्थ, दया और आत्मग्लानि की यथार्थवादी कथा है। एक कवि-मित्र द्वारा ठगे जाने के बाद कथावाचक एक बीमार युवक की आर्थिक सहायता करने से केवल इस डर से इनकार कर देता है कि कहीं वह भी उसके साथ धोखा न कर दे। बाद में उसे अपने व्यवहार और दूसरों को दिए जाने वाले अपने नैतिक उपदेशों के बीच का विरोधाभास समझ में आता है।

27 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत आदर्श विरोध का कवर इमेज
कहानी1921

आदर्श विरोध

Adarsh Virodh

प्रेमचंद की कहानी 'आदर्श विरोध' अंग्रेजी शासन के उच्च पद पर पहुँचने के बाद अपने आदर्शों से समझौता करने वाले दयाकृष्ण मेहता और उनके राष्ट्रवादी पुत्र बालकृष्ण के बीच वैचारिक संघर्ष की कहानी है। पिता-पुत्र के आदर्शों का यह टकराव अंततः एक अत्यंत दुखद परिणाम तक पहुँचता है।

25 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत आत्माराम का कवर इमेज
कहानी1921

आत्माराम

Atmaram

प्रेमचंद की कहानी 'आत्माराम' महादेव नाम के एक वृद्ध सुनार और उसके प्रिय तोते आत्माराम की मार्मिक कहानी है। तोते के पिंजरे से उड़ जाने के बाद उसकी तलाश में निकला महादेव संयोग से मोहरों से भरा एक कलसा पा जाता है। यह घटना उसके जीवन में ऐसा परिवर्तन लाती है कि उसकी अंतरात्मा जाग उठती है और वह अपने पुराने छल-कपट तथा बेईमानी का प्रायश्चित करने लगता है।

21 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत आबे-हयात का कवर इमेज
कहानी1920

आबे-हयात

Aab-e-Hayat

प्रेमचंद की कहानी 'आबे-हयात' डॉक्टर घोष और उनके चार वृद्ध मित्रों द्वारा आबे-हयात (अमृत) पीकर पुनः युवा होने तथा मानव स्वभाव की चंचलता और मूर्खताओं के दोहराव की एक विचारोत्तेजक कहानी है।

31 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत अनिष्ट शंका का कवर इमेज
कहानी1919

अनिष्ट शंका

Anisht Shanka

प्रेमचंद की कहानी 'अनिष्ट शंका' मनोरमा के गहरे प्रेम, भय और पति के वियोग की कथा है। बुंदेलखंड गए अमरनाथ के पत्र देर से आने पर उसके मन में अनिष्ट की आशंका बढ़ती जाती है। भयानक स्वप्न और ज्योतिषी की भविष्यवाणी उसके भय को और गहरा कर देते हैं और अंततः वह पति से मिलने के लिए निकल पड़ती है, जहाँ एक दुखद दुर्घटना उसका जीवन समाप्त कर देती है।

19 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत बैंक का दिवाला का कवर इमेज
कहानी1919

बैंक का दिवाला

Bank Ka Diwala

प्रेमचंद की कहानी 'बैंक का दिवाला' लखनऊ नेशनल बैंक, बरहल रियासत और उसके कर्ज से जुड़े लोगों की कहानी है। बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर लाला साईंदास बरहल की महारानी को भारी ऋण दिलाते हैं, लेकिन महारानी की मृत्यु के बाद रियासत उस ऋण को चुकाने से इनकार कर देती है। बैंक के डूबने पर हजारों जमाकर्ताओं के सामने संकट खड़ा हो जाता है और नए राजा कुँवर जगदीश सिंह के सामने कानूनी अधिकार और मानवीय जिम्मेदारी के बीच कठिन निर्णय आता है।

1 घंटे