कहानियाँ

Short Stories

भारतीय जनजीवन और समाज की यथार्थ तस्वीर प्रस्तुत करती प्रेमचंद की 300 से अधिक कालजयी कहानियाँ।

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मुंशी प्रेमचंद कृत मनुष्य का परम धर्म का कवर इमेज
कहानी1920

मनुष्य का परम धर्म

Manushya Ka Param Dharma

प्रेमचंद की 'मनुष्य का परम धर्म' धार्मिक पाखंड, रूढ़िवादिता और स्वार्थ के लिए धर्म के दुरुपयोग पर तीखा हास्य-व्यंग्य है। होली के दिन पंडित मोटेराम शास्त्री और उनके मित्र चिंतामणि इस बात से परेशान हैं कि कहीं से दावत का निमंत्रण नहीं आया। वे गंगा तट पर पहुँचकर अपनी भूख को धर्मोपदेश का रूप देते हैं। मोटेराम शास्त्रों की मनमानी व्याख्या करते हुए सिद्ध करते हैं कि चूँकि ब्राह्मण ब्रह्मा के मुख से निकले हैं, इसलिए मुख को सुख देना मनुष्य का परम धर्म है और ब्राह्मणों को उत्तम-से-उत्तम मिठाइयाँ खिलाना सबसे बड़ा धार्मिक कर्तव्य है। उनका पूरा तर्क वास्तव में मुफ्त भोजन प्राप्त करने का साधन है। जब चिंतामणि भी मिठाइयों की श्रेष्ठता को लेकर अपना अलग 'शास्त्रोक्त' सिद्धांत पेश करता है, तो दोनों पाखंडी धर्माचार्य तर्क-वितर्क से आगे बढ़कर हास्यास्पद शारीरिक झगड़े में उतर आते हैं। प्रेमचंद इस हास्य के माध्यम से सच्चे धर्म और स्वार्थपूर्ण धार्मिक प्रदर्शन के बीच का अंतर उजागर करते हैं।

16 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत मूठ का कवर इमेज
कहानी1920

मूठ

Mooth

प्रेमचंद की कहानी 'मूठ' अंधविश्वास, भय और तर्क के बीच के संघर्ष को प्रस्तुत करती है। बीमारी और अलौकिक शक्ति के विश्वास से जुड़ी घटना के माध्यम से प्रेमचंद दिखाते हैं कि भय और अंधविश्वास मनुष्य के अनुभव और सोच को किस प्रकार प्रभावित कर सकते हैं।

41 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत मृत्यु के पीछे का कवर इमेज
कहानी1920

मृत्यु के पीछे

Mrityu Ke Pichhe

प्रेमचंद की कहानी 'मृत्यु के पीछे' ईश्वरचंद्र नामक एक वकील की कहानी है जो कानून का पेशा छोड़कर पत्रकारिता और समाजसेवा को अपना जीवन समर्पित कर देता है। उसकी पत्नी मानकी उसके आदर्शों के कारण होने वाले आर्थिक और पारिवारिक कष्टों से दुखी रहती है, लेकिन ईश्वरचंद्र की मृत्यु के बाद जब पूरा समाज उसके त्याग और सेवा का सम्मान करता है, तब मानकी को अपने पति के जीवन का वास्तविक मूल्य समझ में आता है।

32 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत पशु से मनुष्य का कवर इमेज
कहानी1920

पशु से मनुष्य

Pashu Se Manushya

प्रेमचंद की कहानी 'पशु से मनुष्य' गरीब माली दुर्गा की कहानी है, जिसे डॉक्टर मेहरा के यहाँ शोषण और अपमान सहना पड़ता है। प्रेमशंकर के सहकारी बाग में पहुँचकर उसे सम्मान, न्याय और आत्मसम्मान मिलता है और उसका जीवन बदल जाता है।

33 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत महातीर्थ का कवर इमेज
कहानी1918

महातीर्थ

Mahateerth

प्रेमचंद की कहानी 'महातीर्थ' कैलाशी नाम की एक दाई के निःस्वार्थ प्रेम और सेवा की मार्मिक कहानी है। रुद्र नामक बच्चे से गहरा लगाव होने के बाद उससे बिछड़ने पर कैलाशी का जीवन सूना हो जाता है। अंततः बच्चे के प्रति उसका प्रेम और सेवा ही उसके लिए उस तीर्थ से भी महान बन जाते हैं, जिसकी यात्रा करने वह निकली थी।

31 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत मर्यादा की वेदी का कवर इमेज
कहानी1917

मर्यादा की वेदी

Maryada Ki Vedi

प्रेमचंद की कहानी 'मर्यादा की वेदी' राजपूत राजकुमारी प्रभा की त्रासद प्रेमकथा है, जिसे उसके विवाह के दिन चित्तौड़ का राणा भोजराज बलपूर्वक उठा ले जाता है। अपने प्रेम, कर्तव्य, लोक-लाज और राजपूत मर्यादा के बीच संघर्ष करती प्रभा अंततः ऐसा त्याग करती है जिसका अंत उसके और मंदार कुमार दोनों के जीवन के बलिदान में होता है।

42 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत पंच परमेश्वर का कवर इमेज
कहानी1916

पंच परमेश्वर

Panch Parmeshwar

प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी 'पंच परमेश्वर' जुम्मन शेख और अलगू चौधरी की गहरी मित्रता तथा न्याय के प्रति उनकी निष्ठा की कहानी है। जब दोनों को एक-दूसरे के विरुद्ध पंचायत में पंच बनने का अवसर मिलता है, तो व्यक्तिगत मित्रता और शत्रुता के ऊपर न्याय और कर्तव्य की भावना विजयी होती है।

32 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत नमक का दारोगा का कवर इमेज
कहानी1914

नमक का दारोगा

Namak Ka Daroga

प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी 'नमक का दारोगा' ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ मुंशी वंशीधर की कहानी है, जो नमक की तस्करी करते हुए शक्तिशाली पंडित अलोपीदीन को पकड़ लेते हैं और भारी रिश्वत के बावजूद अपने कर्तव्य से नहीं हटते। ईमानदारी के कारण उन्हें सरकारी नौकरी से हाथ धोना पड़ता है, लेकिन अंततः अलोपीदीन उनकी निष्ठा से प्रभावित होकर उन्हें अपनी पूरी जायदाद का स्थायी मैनेजर नियुक्त करता है।

24 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत ममता का कवर इमेज
कहानी1912

ममता

Mamta

प्रेमचंद की कहानी 'ममता' मातृप्रेम, अहंकार, दिखावटी समाजसेवा और पारिवारिक संबंधों की मार्मिक कथा है। बाबू रामरक्षादास धन और प्रतिष्ठा के अहंकार में अपनी माँ से अलग हो जाते हैं, लेकिन माँ का निस्वार्थ प्रेम अंततः संकट में पड़े पुत्र की रक्षा करता है।

36 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत नसीहतों का दफ्तर का कवर इमेज
कहानी1912

नसीहतों का दफ्तर

Nasihaton Ka Daftar

प्रेमचंद की कहानी 'नसीहतों का दफ्तर' दिखावटी नैतिकता, कंजूसी, ईर्ष्या और दांपत्य जीवन में अधिकार-बोध पर व्यंग्य करती है। बाबू अक्षयकुमार अपनी पत्नी हेमवती को लगातार नसीहतें देते हैं, लेकिन अंततः परिस्थितियाँ उन्हें अपने ही उपदेशों और व्यवहार का सामना करने पर मजबूर कर देती हैं।

26 मिनट