कहानियाँ

Short Stories

भारतीय जनजीवन और समाज की यथार्थ तस्वीर प्रस्तुत करती प्रेमचंद की 300 से अधिक कालजयी कहानियाँ।

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मुंशी प्रेमचंद कृत माता का हृदय का कवर इमेज
कहानी1925

माता का हृदय

Mata Ka Hriday

प्रेमचंद की 'माता का हृदय' एक माँ के प्रतिशोध से करुणा की ओर हुए नैतिक परिवर्तन की अत्यंत मार्मिक कहानी है। निर्धन विधवा माधवी का इकलौता बेटा आत्मानंद झूठी गवाहियों और राजनीतिक दमन से जुड़े मुकदमे में आठ वर्ष के कठोर कारावास की सजा पाता है। माधवी पुलिस अधिकारी मिस्टर बागची को अपने बेटे की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार मानकर उनसे बदला लेने का निश्चय करती है। वह मजदूरनी का वेश बनाकर उनके घर में नौकरी कर लेती है। लेकिन बागची के छोटे बच्चे को माधवी से गहरा लगाव हो जाता है। जब बच्चा गंभीर रूप से बीमार पड़ता है, तो माधवी अपना प्रतिशोध भूलकर पूरी निष्ठा से उसकी सेवा करती है। परिवार उसे बच्चे की वास्तविक माँ के समान मानने लगता है। बच्चे की अचानक मृत्यु के बाद माधवी का दुःख उसके पुराने प्रतिशोध से भी अधिक गहरा हो जाता है। प्रेमचंद दिखाते हैं कि मातृत्व की करुणा व्यक्तिगत चोट, सामाजिक अन्याय और प्रतिशोध की भावना से भी अधिक शक्तिशाली हो सकती है।

27 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत नरक का मार्ग का कवर इमेज
कहानी1925

नरक का मार्ग

Narak Ka Marg

प्रेमचंद की 'नरक का मार्ग' एक ऐसी युवती की प्रथम-पुरुष आत्मकथात्मक कथा है जिसका विवाह उससे बहुत अधिक उम्र के, संदेहशील और अधिकारवादी पुरुष से कर दिया जाता है। विवाह उसे प्रेम, सहचर्य और मानसिक सुख देने के बजाय कैद जैसा अनुभव होता है। वह अपनी सहेली सुशीला के सुखी दांपत्य को देखकर उस प्रेम और आत्मीयता के लिए तरसती रहती है जो उसे अपने विवाह में कभी नहीं मिली। पति की मृत्यु के बाद उसकी यह आकांक्षा और तीव्र हो जाती है। एक वृद्धा उसे प्रेम पाने का आश्वासन देकर अपने साथ ले जाती है, लेकिन वह रास्ता अंततः उसे शोषण और सामाजिक पतन की ओर ले जाता है। कहानी के अंत में नायिका अपने पतन की जिम्मेदारी केवल स्वयं पर नहीं रखती, बल्कि उन माता-पिता और सामाजिक परंपराओं को भी दोष देती है जो लड़कियों का विवाह धन, संपत्ति और सामाजिक प्रतिष्ठा देखकर असमान वरों से कर देते हैं।

26 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत सभ्यता का रहस्य का कवर इमेज
कहानी1925

सभ्यता का रहस्य

Sabhyata Ka Rahasya

प्रेमचंद की 'सभ्यता का रहस्य' सभ्यता की प्रचलित परिभाषा पर तीखा व्यंग्य है। राय रतनकिशोर जैसे प्रभावशाली अधिकारी और उनके गरीब नौकर दमड़ी के माध्यम से प्रेमचंद दिखाते हैं कि समाज में सभ्यता अक्सर नैतिकता से नहीं, बल्कि धन, पद, प्रतिष्ठा और अपने अपराधों पर पर्दा डालने की क्षमता से तय होती है।

21 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत मुक्ति-मार्ग का कवर इमेज
विशेष
कहानी1924

मुक्ति-मार्ग

Mukti Marg

प्रेमचंद की 'मुक्ति-मार्ग' ग्रामीण जीवन, अहंकार, ईर्ष्या और प्रतिशोध की विनाशकारी शक्ति की कहानी है। किसान झींगुर और गड़ेरिया बुद्धू के बीच एक मामूली खेत-विवाद से दुश्मनी शुरू होती है। झींगुर के अहंकार और क्रोध के कारण बुद्धू उसकी ऊख की फसल जला देता है। बदला लेने के लिए झींगुर हरिहर की सहायता से बुद्धू की बछिया को मरवा देता है और उस पर गोहत्या का आरोप लगवाकर कठोर प्रायश्चित का दंड दिलवाता है। इस दंड से बुद्धू की आर्थिक स्थिति नष्ट हो जाती है और दोनों अंततः मजदूर बन जाते हैं। निर्माण-स्थल पर फिर मिलने के बाद दोनों एक-दूसरे के सामने अपने अपराध स्वीकार करते हैं। उसी क्षण उनके भीतर का बैर समाप्त होता है। कहानी बताती है कि वास्तविक मुक्ति दूसरे को नष्ट करने में नहीं, बल्कि प्रतिशोध और अहंकार से मुक्त होने में है।

29 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत मुक्तिधन का कवर इमेज
विशेष
कहानी1924

मुक्तिधन

Muktidhan

प्रेमचंद की 'मुक्तिधन' ग्रामीण गरीबी, कर्ज, महाजनी व्यवस्था और हिंदू-मुस्लिम सौहार्द की अत्यंत मार्मिक कहानी है। गरीब मुसलमान किसान रहमान अपनी प्रिय गाय को इसलिए बेचने को मजबूर होता है क्योंकि उसे जमींदार के लगान संबंधी मुकदमे के लिए रुपये चाहिए। वह गाय को कसाइयों के हाथ जाने से बचाने के लिए दाऊदयाल को पाँच रुपये कम में बेच देता है। बाद में वह अपनी बूढ़ी माँ को हज कराने, उसकी बीमारी और मृत्यु से जुड़े खर्चों के लिए उसी महाजन से बार-बार कर्ज लेता है। फसल की बर्बादी और अंततः खेत में लगी आग उसके लिए कर्ज चुकाना असंभव बना देती है। फिर भी रहमान अपने कर्ज से भागना नहीं चाहता और दाऊदयाल से कहता है कि वह मेहनत-मजदूरी करके जीवन भर उनका पैसा चुकाएगा। दाऊदयाल को रहमान की पुरानी शराफत याद आती है। उन्हें एहसास होता है कि गाय ने अब तक उन्हें कर्ज से कहीं अधिक मूल्य का दूध और दो बछड़े दिए हैं। वे पूरा कर्ज माफ कर देते हैं और कहते हैं कि रहमान उनका कर्जदार नहीं, बल्कि मित्र है। कहानी आर्थिक लेन-देन को नैतिक संबंध में बदल देती है और करुणा, कृतज्ञता तथा हिंदू-मुस्लिम सौहार्द को वास्तविक 'धन' के रूप में प्रस्तुत करती है।

29 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत नैराश्य का कवर इमेज
कहानी1924

नैराश्य

Nairashya

प्रेमचंद की 'नैराश्य' पुत्र-प्राथमिकता, वैवाहिक क्रूरता और स्त्री पर सामाजिक दबाव की मार्मिक त्रासदी है। निरुपमा की तीन बेटियाँ हैं और उसका पति घमंडीलाल तथा उसका परिवार पुत्र न होने के कारण उसे अभागिनी समझते हैं। पति का प्रेम समाप्त हो जाता है, वह घर छोड़ने की धमकी देता है और निरुपमा को ऐसी बात के लिए दोषी ठहराता है जिस पर उसका कोई नियंत्रण नहीं। निराश होकर निरुपमा की भाभी एक कथित महात्मा की कहानी गढ़ती है जो पुत्र का आशीर्वाद देने का दावा करता है। निरुपमा इस छल का सहारा लेकर घर लौटती है और कुछ समय बाद गर्भवती होने पर परिवार का व्यवहार पूरी तरह बदल जाता है। परिवार को विश्वास है कि अब पुत्र ही होगा। निरुपमा को स्वयं पता है कि गर्भ में फिर बेटी है, लेकिन वह अपने साथ होने वाले व्यवहार को कुछ समय तक बनाए रखने के लिए गर्भावस्था के शुभ लक्षणों का अभिनय करती है। प्रसव के समय जब फिर बेटी जन्म लेती है तो परिवार का सारा उत्साह शोक और क्रोध में बदल जाता है। उसी समय निरुपमा की मृत्यु हो जाती है। प्रेमचंद दिखाते हैं कि जिस समाज में स्त्री का सम्मान उसके मातृत्व के साथ-साथ बच्चे के लिंग पर निर्भर कर दिया जाए, वहाँ निराशा केवल मानसिक अवस्था नहीं रहती बल्कि जीवन-विनाशक सामाजिक शक्ति बन जाती है।

27 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत निर्वासन का कवर इमेज
कहानी1924

निर्वासन

Nirvasan

प्रेमचंद की 'निर्वासन' स्त्री की गरिमा, पितृसत्तात्मक नैतिकता और वैवाहिक विश्वास पर तीखा प्रश्न उठाने वाली कहानी है। धार्मिक मेले में भीड़ के कारण मर्यादा अपने पति परशुराम से बिछड़ जाती है और खोई हुई स्त्रियों के शिविर में पहुँचती है। घर लौटने की बेचैनी में वह एक ऐसे व्यक्ति के छल का शिकार होती है जो उसके पति को जानने का झूठा दावा करके उसे एक गलत स्थान पर ले जाता है। मर्यादा अपनी पवित्रता की रक्षा करते हुए वहाँ से भाग निकलती है और अंततः घर लौटती है। लेकिन परशुराम उसकी बात पर विश्वास नहीं करता। उसके लिए केवल यह तथ्य पर्याप्त है कि मर्यादा कई दिनों तक घर से बाहर रही और दूसरे पुरुषों की निगाहों तथा संगति के बीच रही। मर्यादा के साथ हुए अपराध का दोषी होने के बजाय वही संदेह और सामाजिक 'मर्यादा' के नाम पर उसे घर से निकाल देता है। कहानी दिखाती है कि पितृसत्तात्मक समाज में स्त्री की गरिमा को अक्सर उसके अपने चरित्र और अनुभव से नहीं, बल्कि पुरुष की दृष्टि और संदेह से आँका जाता है।

18 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत नैराश्य लीला का कवर इमेज
कहानी1923

नैराश्य लीला

Nairashya Leela

प्रेमचंद की 'नैराश्य लीला' बाल-विधवा के जीवन पर सामाजिक नियंत्रण और स्त्री की स्वतंत्रता की मार्मिक कहानी है। कैलासकुमारी का विवाह तेरह वर्ष की उम्र में हो जाता है और गौना होने से पहले ही वह विधवा हो जाती है। उसे अभी विवाह का अर्थ भी समझ में नहीं आया है, इसलिए माता-पिता के विपरीत वह पति की मृत्यु को वैसा शोक नहीं मानती जैसा समाज उससे अपेक्षा करता है। माता-पिता पहले उसका मन बहलाने के लिए थिएटर, संगीत, सैर और मनोरंजन की व्यवस्था करते हैं, लेकिन पड़ोस और बिरादरी विधवा के लिए ऐसे जीवन को अनुचित मानकर परिवार पर दबाव डालते हैं। इसके बाद कैलासकुमारी धार्मिक जीवन की ओर मुड़ती है और संन्यास लेना चाहती है। पिता उसे सेवा और शिक्षा के मार्ग पर ले आते हैं और वह बालिकाओं के लिए पाठशाला चलाने लगती है। लेकिन एक बीमार बालिका की सेवा करने और उसके घर कई दिन रहने पर समाज फिर उसके चरित्र पर प्रश्न उठाता है और पाठशाला बंद करनी पड़ती है। तब कैलासकुमारी खुलकर कहती है कि वह स्वयं को अभागिनी नहीं मानती और अपने आत्मसम्मान की रक्षा स्वयं कर सकती है। वह विधवा को जीवित रहते हुए सामाजिक मृत्यु स्वीकार करने से इंकार करती है। कहानी का अंत उसकी स्वतंत्रता की आकांक्षा और समाज की असहिष्णुता के बीच एक अत्यंत त्रासद टकराव पर होता है।

32 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत परीक्षा का कवर इमेज
विशेष
कहानी1923

परीक्षा

Pariksha

प्रेमचंद की 'परीक्षा' व्यक्ति के वास्तविक चरित्र को उसकी डिग्री, पद या बाहरी व्यवहार के बजाय उसके कर्मों से परखने वाली कहानी है। देवगढ़ रियासत के वृद्ध दीवान सरदार सुजानसिंह चालीस वर्ष की सेवा के बाद अवकाश लेना चाहते हैं। राजा उनसे नया दीवान चुनने को कहते हैं। सुजानसिंह ऐसी परीक्षा रखते हैं जिसमें उम्मीदवारों की डिग्री से अधिक उनके आचरण, कर्तव्य-बोध और चरित्र को देखा जाना है। उम्मीदवार एक महीने तक अपने व्यवहार को कृत्रिम रूप से अच्छा दिखाने का प्रयास करते हैं। वास्तविक परीक्षा तब होती है जब एक गरीब किसान की अनाज से भरी गाड़ी कीचड़ में फँस जाती है। अधिकांश उम्मीदवार उसकी सहायता किए बिना निकल जाते हैं, लेकिन हॉकी खेल में घायल होने के बावजूद पंडित जानकीनाथ किसान की सहायता करते हैं और गाड़ी को बाहर निकाल देते हैं। सुजानसिंह इस घटना को छिपकर देख रहे थे। वे जानकीनाथ को नया दीवान चुनते हैं क्योंकि उनके कार्य में दया, साहस, आत्मबल और उदारता का वास्तविक प्रमाण मिलता है। कहानी का संदेश है कि शिक्षा और बाहरी शिष्टाचार से अधिक महत्वपूर्ण मनुष्य का चरित्र और कठिन परिस्थिति में किया गया निःस्वार्थ कर्म है।

13 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत नागपूजा का कवर इमेज
कहानी1922

नागपूजा

Nag Puja

प्रेमचंद की कहानी 'नागपूजा' तिलोत्तमा के जीवन की रहस्यमय और त्रासद कहानी है, जिसके जन्म से एक काले नाग का संबंध माना जाता है। विवाह के अवसर पर उसके पति की सर्पदंश से मृत्यु हो जाती है और बाद में उसके पुनर्विवाह के समय भी एक नाग प्रकट होता है। कहानी अंधविश्वास, विधवा-विवाह, भाग्य, विज्ञान, भय और मानवीय विश्वास के रहस्यमय संबंध को सामने लाती है।

28 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत पूर्व-संस्कार का कवर इमेज
कहानी1922

पूर्व-संस्कार

Purva Sanskar

प्रेमचंद की कहानी 'पूर्व-संस्कार' दो भाइयों रामटहल और शिवटहल की विपरीत जीवन-दृष्टि, कर्म और पुनर्जन्म की कथा है। शिवटहल की मृत्यु के वर्षों बाद रामटहल अपने प्रिय बैल जवाहिर में एक असाधारण आत्मीयता अनुभव करते हैं। उसकी मृत्यु और एक साधु के रहस्योद्घाटन से उन्हें पूर्व कर्मों, प्रायश्चित और अपने जीवन के प्रति नई दृष्टि का बोध होता है।

22 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत प्रारब्ध का कवर इमेज
कहानी1921

प्रारब्ध

Prarabdh

प्रेमचंद की कहानी 'प्रारब्ध' लाला जीवनदास की मनोवैज्ञानिक और मार्मिक कहानी है, जो गंभीर बीमारी के कारण अपनी पत्नी प्रभावती और पुत्र लखनदास के भविष्य को लेकर निराश हो जाता है। वह उन्हें अपने पीछे होने वाले कष्टों से बचाने के लिए विष देने का प्रयास करता है और घर छोड़कर चला जाता है। पंद्रह वर्ष बाद लौटने पर जब उसे पता चलता है कि उसका परिवार उसके बिना सुखी और संपन्न हो गया, तो उसके भीतर अपराध-बोध, आस्था और प्रारब्ध को लेकर गहरा आत्ममंथन शुरू होता है।

31 मिनट