माता का हृदय
Mata Ka Hriday
प्रेमचंद की 'माता का हृदय' एक माँ के प्रतिशोध से करुणा की ओर हुए नैतिक परिवर्तन की अत्यंत मार्मिक कहानी है। निर्धन विधवा माधवी का इकलौता बेटा आत्मानंद झूठी गवाहियों और राजनीतिक दमन से जुड़े मुकदमे में आठ वर्ष के कठोर कारावास की सजा पाता है। माधवी पुलिस अधिकारी मिस्टर बागची को अपने बेटे की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार मानकर उनसे बदला लेने का निश्चय करती है। वह मजदूरनी का वेश बनाकर उनके घर में नौकरी कर लेती है। लेकिन बागची के छोटे बच्चे को माधवी से गहरा लगाव हो जाता है। जब बच्चा गंभीर रूप से बीमार पड़ता है, तो माधवी अपना प्रतिशोध भूलकर पूरी निष्ठा से उसकी सेवा करती है। परिवार उसे बच्चे की वास्तविक माँ के समान मानने लगता है। बच्चे की अचानक मृत्यु के बाद माधवी का दुःख उसके पुराने प्रतिशोध से भी अधिक गहरा हो जाता है। प्रेमचंद दिखाते हैं कि मातृत्व की करुणा व्यक्तिगत चोट, सामाजिक अन्याय और प्रतिशोध की भावना से भी अधिक शक्तिशाली हो सकती है।