न्याय
Nyay
‘न्याय’, जिसे ‘नबी का नीति-निर्वाह’ के नाम से भी जाना जाता है, प्रेमचंद की ऐसी कहानी है जिसमें न्याय की सर्वोच्च कसौटी यह है कि व्यक्ति अपने प्रियजन के साथ भी वही व्यवहार करे जो किसी दूसरे व्यक्ति के साथ करता। कहानी प्रारंभिक इस्लामी समाज की पृष्ठभूमि में जैनब और अबुलआस के दांपत्य को केंद्र में रखती है। जैनब नए धर्म के प्रति आकर्षित है, जबकि उसका पति अबुलआस अपनी स्वतंत्र विचारधारा और पुराने विश्वासों पर कायम रहता है। धार्मिक संघर्ष और युद्ध के बीच अबुलआस बंदी बना लिया जाता है और अंततः उसे पैगंबर मुहम्मद के सामने लाया जाता है। मुहम्मद उसे केवल अपना दामाद मानकर विशेष रियायत नहीं देते, बल्कि न्याय के समान नियम को उस पर भी लागू करते हैं। उनका व्यक्तिगत प्रेम कर्तव्य के आगे नहीं आता। कहानी न्याय को प्रेम और द्वेष दोनों से ऊपर उठकर नीति निभाने की क्षमता के रूप में प्रस्तुत करती है। अंततः अबुलआस अपने धन-संपत्ति का हिसाब साफ करके ऋण चुकाता है और स्वयं मुहम्मद की सेवा में लौट आता है।