कहानियाँ

Short Stories

भारतीय जनजीवन और समाज की यथार्थ तस्वीर प्रस्तुत करती प्रेमचंद की 300 से अधिक कालजयी कहानियाँ।

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मुंशी प्रेमचंद कृत नेउर का कवर इमेज
कहानी1933

नेउर

Neur

प्रेमचंद की 'नेउर' ग्रामीण श्रमजीवी जीवन, दांपत्य-प्रेम, धार्मिक छल, गरीबी, लज्जा और अंतरात्मा की कहानी है। पचास वर्ष से अधिक आयु का मेहनती मजदूर नेउर अपनी बूढ़ी पत्नी बुधिया के लिए दिन-रात काम करता है ताकि उसके बाद भी उसे किसी के सामने हाथ न फैलाना पड़े। एक घूमता हुआ साधु उसे विश्वास दिलाता है कि उसकी चाँदी और पत्नी के गहने चमत्कार से बढ़कर धन बन सकते हैं। नेउर अपनी सारी बचत और बुधिया के गहने लेकर साधु को दे देता है और ठगा जाता है। गाँव में लोगों से उधार लिए पैसे लौटाने में असमर्थ होने के कारण वह शर्म से भाग जाता है और अंततः उसी प्रकार का साधु बन बैठता है जिसने उसे ठगा था। लेकिन जब एक दुखी युवती अपने पति को वश में करने की आशा में उसके सामने गहनों की पेटारी रखती है, तो नेउर की अंतरात्मा उसे वही छल दोहराने नहीं देती। वह गाँव लौटता है, जहाँ उसे पता चलता है कि बुधिया मर चुकी है। इसके बाद उसका जीवन मौन दुःख और निष्क्रिय अस्तित्व में बदल जाता है।

28 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत क़ातिल का कवर इमेज
कहानी1933

क़ातिल

Qatil

‘क़ातिल’ प्रेमचंद के नाम से संबद्ध एक त्रासद राजनीतिक कहानी है, जिसमें धर्मवीर नामक युवक हिंसक क्रांतिकारी मार्ग अपनाकर यह मानता है कि अंग्रेजों की हत्या के द्वारा भारत को स्वतंत्र कराया जा सकता है। उसकी विधवा माँ उसे इस रास्ते से रोकने का प्रयास करती है, लेकिन जब उसे लगता है कि धर्मवीर अपने निर्णय से पीछे नहीं हटेगा, तो वह उसके साथ जाने का निश्चय करती है ताकि एक बड़ी हत्या को रोका जा सके। अंततः धर्मवीर की गोली उसके अपने ही माँ की जान ले लेती है और कहानी हिंसक क्रांति की मानवीय कीमत को अत्यंत मार्मिक ढंग से सामने रखती है।

34 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत रसिक संपादक का कवर इमेज
कहानी1933

रसिक संपादक

Rasik Sampadak

प्रेमचंद की 'रसिक संपादक' संपादकीय सत्ता, पुरुष-मानसिकता और स्त्री लेखिकाओं के प्रति दोहरे व्यवहार पर तीखा और हास्यपूर्ण व्यंग्य है। 'नवरस' के विधुर संपादक पंडित चोखेलाल शर्मा स्त्री लेखिकाओं की रचनाएँ तुरंत स्वीकार करते हैं और उनकी अत्यधिक प्रशंसा करते हैं, जबकि पुरुषों की अच्छी रचनाएँ भी रद्दी में डाल देते हैं। लेकिन उनकी कथित साहित्यिक उदारता वास्तव में साहित्यिक गुणों से अधिक स्त्रियों के प्रति उनके आकर्षण पर आधारित है। कामाक्षी नाम की एक लेखिका की प्रेमपूर्ण कविता पढ़कर वे उसके बारे में अपनी कल्पना में एक सुंदर स्त्री की तस्वीर बना लेते हैं और उसे मिलने के लिए बुलाते हैं। जब कामाक्षी वास्तव में उनके सामने आती है और उनकी कल्पना से बिल्कुल अलग निकलती है, तो उनका सारा उत्साह समाप्त हो जाता है। प्रेमचंद इस विडंबना के माध्यम से दिखाते हैं कि स्त्रियों की प्रशंसा करने वाला पुरुष भी उन्हें स्वतंत्र रचनाकार के रूप में नहीं, बल्कि अपनी कल्पना और आकर्षण की वस्तु के रूप में देख सकता है।

20 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत मृतक-भोज का कवर इमेज
कहानी1932

मृतक-भोज

Mritak Bhoj

प्रेमचंद की 'मृतक-भोज' सामाजिक रूढ़ियों, बिरादरी के दबाव, धार्मिक आडंबर और आर्थिक शोषण पर तीखा प्रहार करने वाली कहानी है। सेठ रामनाथ की मृत्यु के बाद उनकी विधवा सुशीला पर बिरादरी के लोग मृतक-भोज कराने का दबाव डालते हैं। इस भोज के लिए उसका घर और गहने बिक जाते हैं, लेकिन जिन लोगों के लिए भोज दिया जाता है वही उसके और उसके बच्चों के संकट में कोई सहायता नहीं करते।

48 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत नया विवाह का कवर इमेज
कहानी1932

नया विवाह

Naya Vivah

प्रेमचंद की 'नया विवाह' वृद्धावस्था में एक पुरुष द्वारा युवा स्त्री से विवाह करके अपनी खोती हुई जवानी को फिर से पाने की मानसिकता की तीखी मनोवैज्ञानिक पड़ताल है। लाला डंगामल ने अपनी पहली पत्नी लीला के पच्चीस वर्ष के साथ को प्रेम और आत्मीयता में बदलने के बजाय उसकी ढलती उम्र को उसके विरुद्ध इस्तेमाल किया। लीला की मृत्यु के बाद वे युवा आशा से दूसरा विवाह करते हैं और मानते हैं कि नया विवाह उनके जीवन में फिर से यौवन भर देगा। लेकिन आशा उनकी तरह दिखावे, सैर-सपाटे और भोग-विलास में रुचि नहीं रखती। वह गृहस्थी, भोजन और सेवा को अधिक महत्व देती है। डंगामल उसकी उदासीनता को अपने प्रति असफलता मानते हैं। इसी बीच युवा नौकर जुगल आशा की ओर आकर्षित होने लगता है और आशा भी उसकी सहज प्रशंसा तथा सरलता से प्रभावित होती है। कहानी के माध्यम से प्रेमचंद पुरुष के स्वामित्व-बोध, उम्र के दोहरे मानदंड, विवाह में भावनात्मक उपेक्षा और खरीदी हुई सुख-सुविधा तथा वास्तविक आत्मीयता के बीच के अंतर को उजागर करते हैं।

37 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत मैकू का कवर इमेज
कहानी1930

मैकू

Maiku

प्रेमचंद की कहानी 'मैकू' एक लठैत की अंतरात्मा के जागरण की कहानी है। शराब की दुकान के सामने सत्याग्रह कर रहे कांग्रेस स्वयंसेवकों को हटाने के लिए बुलाया गया मैकू एक स्वयंसेवक को थप्पड़ मार देता है, लेकिन उसके धैर्य और त्याग से प्रभावित होकर उसके भीतर गहरा पश्चात्ताप पैदा होता है। वह शराब छोड़ने और राष्ट्रीय आंदोलन का साथ देने का निर्णय करता है।

13 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत पत्नी से पति का कवर इमेज
कहानी1930

पत्नी से पति

Patni Se Pati

प्रेमचंद की कहानी 'पत्नी से पति' गोदावरी और उसके पति मिस्टर सेठ के वैचारिक संघर्ष की कहानी है। सेठ अंग्रेज़ी शासन की नौकरी और विदेशी वस्तुओं के समर्थक हैं, जबकि गोदावरी स्वदेशी और स्वतंत्रता आंदोलन से प्रभावित है। गोदावरी के साहस और देशभक्ति के कारण अंततः उनके वैवाहिक संबंध में भी एक महत्वपूर्ण परिवर्तन आता है।

31 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत पिसनहारी का कुआँ का कवर इमेज
कहानी1930

पिसनहारी का कुआँ

Pisanhari Ka Kuan

प्रेमचंद की कहानी 'पिसनहारी का कुआँ' एक गरीब विधवा की मेहनत, आत्मसम्मान और लोकसेवा की मार्मिक कथा है। जीवन भर पिसाई करके जमा किए गए उसके रुपये गाँव के लिए कुआँ बनवाने में लगते हैं और उसकी अधूरी इच्छा अंततः उसके पौत्र द्वारा पूरी होती है।

30 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत प्रायश्चित का कवर इमेज
कहानी1929

प्रायश्चित

Prayashchit

प्रेमचंद की कहानी 'प्रायश्चित' अपराध-बोध, पश्चाताप और नैतिक जिम्मेदारी की कथा है। एक भूल से उत्पन्न संकट पात्रों को अपने कर्मों के परिणामों का सामना करने और सच्चे प्रायश्चित का अर्थ समझने के लिए विवश करता है।

35 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत रामलीला का कवर इमेज
कहानी1926

रामलीला

Ramleela

प्रेमचंद की 'रामलीला' बचपन की श्रद्धा, निष्कपट प्रेम और वयस्क समाज के पाखंड से हुए नैतिक जागरण की मार्मिक कहानी है। कथावाचक अपने बचपन को याद करता है, जब रामलीला में राम की भूमिका निभाने वाले रामचंद्र के प्रति उसकी श्रद्धा लगभग भक्ति जैसी थी। लेकिन दशहरे के अवसर पर वह देखता है कि समाज रामलीला के कलाकारों की उपेक्षा करते हुए एक नर्तकी पर धन लुटाता है। यह अनुभव उसके बाल-मन में धार्मिक आडंबर, सामाजिक प्रतिष्ठा और वास्तविक भक्ति के बीच का अंतर उजागर करता है।

23 मिनट