महिला सशक्तिकरण

Women's Stories

महिलाओं के अधिकारों, संघर्षों और समाज में उनके स्थान पर केंद्रित संवेदनशील रचनाएँ

इस संग्रह में कुल 8 रचनाएँ शामिल हैं
मुंशी प्रेमचंद कृत निर्मला का कवर इमेज
विशेष
उपन्यास1927

निर्मला

Nirmala

प्रेमचंद का उपन्यास 'निर्मला' एक युवा लड़की की त्रासदी है जिसकी शादी दहेज के कारण एक बूढ़े विधुर से होती है। यह दहेज प्रथा की बुराई का मार्मिक चित्रण है।

7 घंटे 11 मिनट12 अध्याय
मुंशी प्रेमचंद कृत बड़े घर की बेटी का कवर इमेज
कहानी1910

बड़े घर की बेटी

Bade Ghar Ki Beti

प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी 'बड़े घर की बेटी' आनंदी की समझदारी, धैर्य और उदारता की कहानी है। ससुराल में देवर लालबिहारी के साथ हुए विवाद के बाद परिवार टूटने की स्थिति में पहुँच जाता है, लेकिन आनंदी अपनी सूझ-बूझ और क्षमाशीलता से दोनों भाइयों के बीच फिर से मेल करा देती है।

20 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत सुभागी का कवर इमेज
कहानी1930

सुभागी

Subhagi

प्रेमचंद की 'सुभागी' एक बाल-विधवा के श्रम, आत्मसम्मान और पारिवारिक कर्तव्य की अत्यंत प्रभावशाली ग्रामीण कहानी है। तुलसी महतो की बेटी सुभागी बचपन में ही विधवा हो जाती है, लेकिन अपने बूढ़े माता-पिता का सहारा बनने के लिए स्वयं विवाह से इंकार कर देती है। उसका भाई रामू आलसी और स्वार्थी है तथा उसे लगता है कि बहन और माता-पिता उसके ऊपर बोझ हैं। परिवार के बँटवारे के बाद भी सुभागी अपने माता-पिता की सेवा करती है और खेती तथा मजदूरी करके उनका जीवन चलाती है। माता-पिता की मृत्यु के बाद वह उनके अंतिम संस्कार पर लिया गया कर्ज अपने श्रम से चुकाने का संकल्प करती है और तीन वर्षों तक कठिन परिश्रम करके पाँच सौ रुपये का पूरा ऋण चुका देती है। उसकी मेहनत, आत्मनिर्भरता और चरित्र से प्रभावित होकर गाँव के मुखिया सज्जन सिंह उसे अपनी बहू बनाने का प्रस्ताव देते हैं। कहानी बेटी को बोझ और बेटे को स्वाभाविक सहारा मानने वाली मानसिकता को चुनौती देती है और स्त्री के श्रम तथा आत्मसम्मान को उसकी वास्तविक शक्ति के रूप में प्रस्तुत करती है।

24 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत स्त्री और पुरुष का कवर इमेज
कहानी1925

स्त्री और पुरुष

Stree Aur Purush

प्रेमचंद की 'स्त्री और पुरुष' बाहरी सौंदर्य और आंतरिक सौंदर्य, आकर्षण और प्रेम, तथा दांपत्य में स्त्री की गरिमा पर केंद्रित मनोवैज्ञानिक कहानी है। कवि विपिन बाबू ने अपने मन में एक आदर्श सुंदर स्त्री की कल्पना कर रखी है। विवाह के बाद जब उन्हें पता चलता है कि उनकी पत्नी आशा उस कल्पित सौंदर्य के अनुरूप नहीं है, तो वे उससे घृणा करने लगते हैं और उसका अपमान करते हैं। वे घर से दूर रहने और विषय-भोग में डूबने लगते हैं। लेकिन जब विपिन को लकवा मार जाता है और उनका अपना चेहरा विकृत हो जाता है, तब आशा बिना किसी प्रतिशोध के उनकी सेवा करती है। उसके त्याग और प्रेम से विपिन को समझ आता है कि वास्तविक सौंदर्य शरीर में नहीं, आत्मा और चरित्र में है।

18 मिनट