चमत्कार
Chamatkar
प्रेमचंद की 'चमत्कार' प्रलोभन, नैतिक पतन और आत्मशुद्धि की कहानी है। गरीब लेकिन शिक्षित युवक चन्द्रप्रकाश ठाकुर साहब के बेटे को पढ़ाता है और परिवार में नौकर की तरह नहीं बल्कि घर के सदस्य की तरह सम्मान पाता है। जब उसे विवाह की पूरी व्यवस्था का जिम्मा मिलता है, तब वह महँगे गहनों को देखकर अपनी गरीबी और पत्नी चम्पा के अभाव से तुलना करने लगता है। ईर्ष्या धीरे-धीरे लालच और फिर चोरी में बदल जाती है और वह दुल्हन के गहने चुरा लेता है। बाद में चम्पा को गहने मिल जाते हैं और वह पति को सार्वजनिक रूप से अपमानित करने के बजाय उसे ठाकुर साहब के विश्वास और उपकार याद दिलाती है। उसके शब्द चन्द्रप्रकाश के विवेक को जगा देते हैं। वह अंततः गहने चुपचाप वापस रख देता है और परिवार को लगता है कि गहने किसी चमत्कार से वापस मिल गए। वास्तविक 'चमत्कार' किसी दैवी घटना में नहीं, बल्कि एक अपराध की ओर जा चुके मनुष्य के भीतर नैतिक चेतना के जागने में है।