गोदान
Godaan
प्रेमचंद की महान रचना 'गोदान' किसान होरी की कहानी है जो जीवन भर गाय की कामना करता है। यह ग्रामीण भारत के शोषण का मार्मिक चित्रण है।
Must Read Classics
प्रेमचंद साहित्य की वे कालजयी रचनाएँ जिन्हें हर पाठक को अवश्य पढ़ना चाहिए
Godaan
प्रेमचंद की महान रचना 'गोदान' किसान होरी की कहानी है जो जीवन भर गाय की कामना करता है। यह ग्रामीण भारत के शोषण का मार्मिक चित्रण है।
Sevasadan
प्रेमचंद का उपन्यास 'सेवासदन' सुमन के जीवन के माध्यम से विवाह, दहेज, स्त्री-पराधीनता, वेश्यावृत्ति और सामाजिक सुधार के प्रश्नों को प्रस्तुत करता है।
Bade Bhai Sahab
प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी 'बड़े भाई साहब' दो भाइयों के प्रेम, शिक्षा, अनुशासन और बालमन की चंचलता की हास्यपूर्ण कथा है। बड़ा भाई पढ़ाई को लेकर अत्यंत गंभीर है, जबकि छोटा भाई खेल-कूद में अधिक रुचि रखता है और फिर भी परीक्षाओं में बार-बार सफल होता है।
Mantra
प्रेमचंद की कहानी 'मंत्र' पंडित लीलाधर चौबे के हृदय परिवर्तन और सच्चे सेवाभाव की कहानी है, जो छुआछूत और आडंबर से परे वास्तविक धर्म और मानवता की सीख देती है।
Panch Parmeshwar
प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी 'पंच परमेश्वर' जुम्मन शेख और अलगू चौधरी की गहरी मित्रता तथा न्याय के प्रति उनकी निष्ठा की कहानी है। जब दोनों को एक-दूसरे के विरुद्ध पंचायत में पंच बनने का अवसर मिलता है, तो व्यक्तिगत मित्रता और शत्रुता के ऊपर न्याय और कर्तव्य की भावना विजयी होती है।
Namak Ka Daroga
प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी 'नमक का दारोगा' ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ मुंशी वंशीधर की कहानी है, जो नमक की तस्करी करते हुए शक्तिशाली पंडित अलोपीदीन को पकड़ लेते हैं और भारी रिश्वत के बावजूद अपने कर्तव्य से नहीं हटते। ईमानदारी के कारण उन्हें सरकारी नौकरी से हाथ धोना पड़ता है, लेकिन अंततः अलोपीदीन उनकी निष्ठा से प्रभावित होकर उन्हें अपनी पूरी जायदाद का स्थायी मैनेजर नियुक्त करता है।
Shatranj Ke Khiladi
प्रेमचंद की 'शतरंज के खिलाड़ी' उनकी सबसे प्रसिद्ध राजनीतिक व्यंग्य-कथाओं में से एक है। 1856 के लखनऊ और अवध के अंग्रेजी अधिग्रहण की पृष्ठभूमि में लिखी गई यह कहानी दो सामंती जागीरदारों—मिर्जा सज्जाद अली और मीर रोशन अली—के शतरंज-प्रेम के माध्यम से उस वर्ग की राजनीतिक निष्क्रियता और सामाजिक पतन पर व्यंग्य करती है जो अपने कर्तव्य से विमुख होकर विलासिता में डूबा हुआ है। जब अंग्रेजी सेना अवध पर अधिकार कर रही है और वाजिद अली शाह का शासन समाप्त हो रहा है, दोनों मित्र वास्तविक राजनीतिक संकट से पूरी तरह उदासीन होकर शतरंज की बाजी में डूबे रहते हैं। शतरंज उनकी निजी लत ही नहीं बल्कि उस सामंती मानसिकता का प्रतीक बन जाती है जो वास्तविक सत्ता, स्वतंत्रता और सामाजिक उत्तरदायित्व के स्थान पर निजी मनोरंजन को प्राथमिकता देती है। कहानी का सबसे तीखा व्यंग्य तब सामने आता है जब ये दोनों वास्तविक राजनीतिक संघर्ष से बचते रहने वाले व्यक्ति शतरंज की एक चाल को लेकर एक-दूसरे पर तलवारें खींच लेते हैं।
Karbala
मुंशी प्रेमचंद का ऐतिहासिक नाटक 'कर्बला' 680 ईस्वी में कर्बला की लड़ाई में इमाम हुसैन के बलिदान को दर्शाता है। यह बलिदान और सत्य के लिए खड़े होने की कहानी है।