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Must Read Classics

प्रेमचंद साहित्य की वे कालजयी रचनाएँ जिन्हें हर पाठक को अवश्य पढ़ना चाहिए

इस संग्रह में कुल 8 रचनाएँ शामिल हैं
मुंशी प्रेमचंद कृत बड़े भाई साहब का कवर इमेज
कहानी1910

बड़े भाई साहब

Bade Bhai Sahab

प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी 'बड़े भाई साहब' दो भाइयों के प्रेम, शिक्षा, अनुशासन और बालमन की चंचलता की हास्यपूर्ण कथा है। बड़ा भाई पढ़ाई को लेकर अत्यंत गंभीर है, जबकि छोटा भाई खेल-कूद में अधिक रुचि रखता है और फिर भी परीक्षाओं में बार-बार सफल होता है।

28 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत पंच परमेश्वर का कवर इमेज
कहानी1916

पंच परमेश्वर

Panch Parmeshwar

प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी 'पंच परमेश्वर' जुम्मन शेख और अलगू चौधरी की गहरी मित्रता तथा न्याय के प्रति उनकी निष्ठा की कहानी है। जब दोनों को एक-दूसरे के विरुद्ध पंचायत में पंच बनने का अवसर मिलता है, तो व्यक्तिगत मित्रता और शत्रुता के ऊपर न्याय और कर्तव्य की भावना विजयी होती है।

32 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत नमक का दारोगा का कवर इमेज
कहानी1914

नमक का दारोगा

Namak Ka Daroga

प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी 'नमक का दारोगा' ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ मुंशी वंशीधर की कहानी है, जो नमक की तस्करी करते हुए शक्तिशाली पंडित अलोपीदीन को पकड़ लेते हैं और भारी रिश्वत के बावजूद अपने कर्तव्य से नहीं हटते। ईमानदारी के कारण उन्हें सरकारी नौकरी से हाथ धोना पड़ता है, लेकिन अंततः अलोपीदीन उनकी निष्ठा से प्रभावित होकर उन्हें अपनी पूरी जायदाद का स्थायी मैनेजर नियुक्त करता है।

24 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत शतरंज के खिलाड़ी का कवर इमेज
विशेष
कहानी1924

शतरंज के खिलाड़ी

Shatranj Ke Khiladi

प्रेमचंद की 'शतरंज के खिलाड़ी' उनकी सबसे प्रसिद्ध राजनीतिक व्यंग्य-कथाओं में से एक है। 1856 के लखनऊ और अवध के अंग्रेजी अधिग्रहण की पृष्ठभूमि में लिखी गई यह कहानी दो सामंती जागीरदारों—मिर्जा सज्जाद अली और मीर रोशन अली—के शतरंज-प्रेम के माध्यम से उस वर्ग की राजनीतिक निष्क्रियता और सामाजिक पतन पर व्यंग्य करती है जो अपने कर्तव्य से विमुख होकर विलासिता में डूबा हुआ है। जब अंग्रेजी सेना अवध पर अधिकार कर रही है और वाजिद अली शाह का शासन समाप्त हो रहा है, दोनों मित्र वास्तविक राजनीतिक संकट से पूरी तरह उदासीन होकर शतरंज की बाजी में डूबे रहते हैं। शतरंज उनकी निजी लत ही नहीं बल्कि उस सामंती मानसिकता का प्रतीक बन जाती है जो वास्तविक सत्ता, स्वतंत्रता और सामाजिक उत्तरदायित्व के स्थान पर निजी मनोरंजन को प्राथमिकता देती है। कहानी का सबसे तीखा व्यंग्य तब सामने आता है जब ये दोनों वास्तविक राजनीतिक संघर्ष से बचते रहने वाले व्यक्ति शतरंज की एक चाल को लेकर एक-दूसरे पर तलवारें खींच लेते हैं।

29 मिनट