कहानियाँ

Short Stories

भारतीय जनजीवन और समाज की यथार्थ तस्वीर प्रस्तुत करती प्रेमचंद की 300 से अधिक कालजयी कहानियाँ।

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मुंशी प्रेमचंद कृत फ़ातिहा का कवर इमेज
कहानी1929

फ़ातिहा

Fatiha

प्रेमचंद की कहानी 'फ़ातिहा' अनाथ और सैनिक असदखाँ की मार्मिक कहानी है, जो सीमा पर संघर्ष के दौरान अनजाने में अपने ही पिता की हत्या कर देता है। बाद में उसकी मुलाकात तूरया से होती है, जिसके माध्यम से उसे अपने परिवार और अपने अतीत का सत्य पता चलता है। कहानी अपराध-बोध, त्याग, पारिवारिक संबंध, प्रेम, प्रतिशोध और क्षमा को सामने लाती है।

52 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत घासवाली का कवर इमेज
कहानी1929

घासवाली

Ghaswali

प्रेमचंद की 'घासवाली' जाति, गरीबी, स्त्री-अस्मिता और यौन उत्पीड़न पर केंद्रित एक सशक्त कहानी है। गरीब चमार स्त्री मुलिया घास बेचकर अपने परिवार का पालन करने में मदद करती है। ठाकुर चैनसिंह उसकी सुंदरता का लाभ उठाकर उसके साथ अनुचित व्यवहार करने की कोशिश करता है। मुलिया डरने या झुकने के बजाय उसके सामने निर्भीकता से खड़ी होती है और उसे बताती है कि उसकी हिम्मत का आधार केवल जातिगत और आर्थिक सत्ता है। उसके तीखे प्रश्न चैनसिंह को अपने व्यवहार और सामाजिक पूर्वाग्रहों पर विचार करने के लिए मजबूर करते हैं। इसके बाद चैनसिंह का व्यवहार बदलने लगता है और वह अपने मजदूरों के साथ अधिक मानवीय व्यवहार करने लगता है। कहानी दिखाती है कि गरीबी स्त्री को असुरक्षित बनाती है, लेकिन उसकी गरिमा और आत्मसम्मान को समाप्त नहीं करती।

32 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत जिहाद का कवर इमेज
कहानी1929

जिहाद

Jihad

प्रेमचंद की कहानी 'जिहाद' धर्म, प्रेम, त्याग और मानवीयता के बीच संघर्ष की मार्मिक कहानी है। पश्चिमोत्तर के पर्वतीय क्षेत्र में एक हिंदू काफिले पर पठानों का हमला होता है। ख़ज़ाँचंद इस्लाम स्वीकार करने से इनकार कर मृत्यु को गले लगा लेता है, जबकि उसका मित्र धर्मदास प्राण बचाने के लिए धर्म परिवर्तन स्वीकार कर लेता है। ख़ज़ाँचंद का बलिदान अंततः श्यामा के हृदय को बदल देता है और पठानों के भीतर भी धर्मांधता को करुणा में बदल देता है।

28 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत इस्तीफ़ा का कवर इमेज
कहानी1928

इस्तीफ़ा

Istifa

प्रेमचंद की कहानी 'इस्तीफ़ा' सरकारी नौकरी, आत्मसम्मान और राष्ट्रीय चेतना के संघर्ष की कथा है। औपनिवेशिक शासन की सेवा और अपने देश के प्रति कर्तव्य के बीच उत्पन्न नैतिक द्वंद्व अंततः त्याग और आत्मसम्मान की ओर ले जाता है।

27 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत दो सखियाँ का कवर इमेज
कहानी1926

दो सखियाँ

Do Sakhiyan

प्रेमचंद की 'दो सखियाँ' पत्र-शैली में लिखी गई कहानी है, जिसमें पद्मा और चन्दा अपने-अपने वैवाहिक जीवन के अनुभव एक-दूसरे को पत्रों के माध्यम से बताती हैं। दोनों के विवाह और प्रेम के आदर्श अलग हैं, लेकिन अपने अनुभवों से दोनों को समझ में आता है कि सच्चा दांपत्य केवल स्वतंत्रता, रूप, उपहार या अधिकार पर नहीं, बल्कि विश्वास, आत्मीयता, त्याग, संवाद और एक-दूसरे की भावनात्मक आवश्यकताओं को समझने पर आधारित होता है।

2 घंटे 36 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत गुरु-मंत्र का कवर इमेज
कहानी1926

गुरु-मंत्र

Guru Mantra

प्रेमचंद की 'गुरु-मंत्र' धार्मिक पाखंड और बनावटी साधु-संस्कृति पर केंद्रित एक संक्षिप्त व्यंग्य-कथा है। घर के झगड़ों और निमंत्रणों की कमी से परेशान पंडित चिंतामणि अचानक वैराग्य ग्रहण कर साधु बनने का निश्चय करते हैं। उनके मित्र पंडित मोटेराम शास्त्री उन्हें साधु बनने की व्यावहारिक कला सिखाते हैं—कैसे दान माँगना है, गृहस्थों को किस प्रकार संबोधित करना है और कैसी टेढ़ी-मेढ़ी भाषा बोलनी है। लेकिन चिंतामणि को शीघ्र ही पता चलता है कि साधु का वेश धारण करना और वास्तव में साधु-संस्कृति के आचरण निभाना अलग बातें हैं। गांजा पीने वाले साधुओं के बीच उनकी चिलम न पी पाने की असमर्थता उनकी पोल खोल देती है। प्रेमचंद हास्य और व्यंग्य के माध्यम से वास्तविक आध्यात्मिकता और धार्मिक प्रदर्शन के बीच का अंतर उजागर करते हैं।

10 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत हिंसा परमो धर्म का कवर इमेज
कहानी1926

हिंसा परमो धर्म

Hinsa Parmo Dharma

प्रेमचंद की 'हिंसा परमो धर्म' धार्मिक पाखंड, सांप्रदायिक पूर्वाग्रह और धर्म के नाम पर होने वाली हिंसा पर तीखा व्यंग्य है। सरल और परोपकारी स्वभाव का जामिद पहले इसलिए सम्मानित किया जाता है क्योंकि कुछ लोग उसे अपने धर्म में शामिल करना चाहते हैं, लेकिन जब वह एक हिंदू वृद्ध को अत्याचार से बचाता है तो वही लोग उस पर हमला कर देते हैं। बाद में वह एक हिंदू स्त्री को जबरन धर्मांतरण और अत्याचार से बचाता है। जामिद के अनुभवों के माध्यम से प्रेमचंद दिखाते हैं कि मनुष्य की नैतिकता उसकी धार्मिक पहचान से नहीं, बल्कि उसके व्यवहार और मानवता से निर्धारित होती है।

27 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत एक आँच की कसर का कवर इमेज
कहानी1924

एक आँच की कसर

Ek Aanch Ki Kasar

प्रेमचंद की 'एक आँच की कसर' सामाजिक और राजनीतिक पाखंड पर तीखा व्यंग्य है। महाशय यशोदानंद समाज-सेवी, शिक्षित और दहेज-प्रथा के विरोधी नेता के रूप में प्रसिद्ध हैं। अपने बेटे के विवाह में वे सार्वजनिक रूप से दहेज की निंदा करते हैं और अपने छोटे बेटे से भी दहेज-विरोधी भाषण दिलवाते हैं। लेकिन पर्दे के पीछे उन्होंने वधू-पक्ष से भारी दहेज लेने का सौदा कर रखा है। उनकी बनाई हुई प्रतिष्ठा उस समय ध्वस्त हो जाती है जब उनका छोटा बेटा अनजाने में वधू-पक्ष का वह पत्र पढ़ देता है जिसमें पच्चीस हजार रुपये के दहेज को घटाकर बीस हजार करने का अनुरोध किया गया है। कहानी सुधारवादी भाषण और निजी लालच के बीच के अंतर को उजागर करती है और दिखाती है कि सामाजिक प्रतिष्ठा स्वयं छल का साधन बन सकती है।

15 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत गुप्त धन का कवर इमेज
कहानी1923

गुप्त धन

Gupt Dhan

प्रेमचंद की कहानी 'गुप्त धन' दो भाइयों रामनाथ और हरिदत्त की कहानी है, जिनके जीवन में छिपे हुए धन की खोज लोभ, संदेह और पारिवारिक संघर्ष पैदा कर देती है। कहानी धन के मोह की विनाशकारी शक्ति और मानवीय संबंधों के महत्व को सामने लाती है।

23 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत घर जमाई का कवर इमेज
कहानी1922

घर जमाई

Ghar Jamai

प्रेमचंद की 'घर जमाई' आर्थिक निर्भरता, पारिवारिक स्वार्थ और आत्मसम्मान की मार्मिक ग्रामीण कहानी है। हरिधन विवाह के बाद ससुराल में ही बस जाता है और अपनी संपत्ति भी ससुरालवालों को सौंप देता है। उसे लगता है कि सास-ससुर और पत्नी का प्रेम सच्चा है और यही घर अब उसका स्थायी घर है। लेकिन जैसे-जैसे उसकी संपत्ति समाप्त होती जाती है, परिवार का व्यवहार बदल जाता है। जो दामाद कभी घर का लाड़ला था, वही धीरे-धीरे सबसे अधिक काम करने वाला और सबसे कम सम्मान पाने वाला व्यक्ति बन जाता है। उसे भोजन तक के लिए उपेक्षा और अपमान सहना पड़ता है। अंततः एक तीखी पारिवारिक घटना के बाद हरिधन अपने गाँव लौटता है। वहाँ वह अपनी माँ की स्मृतियों, अपनी जमीन और श्रम के माध्यम से फिर से आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान प्राप्त करता है। कहानी दिखाती है कि जब रिश्तों में आर्थिक स्वार्थ प्रवेश कर जाता है तो स्नेह भी शोषण में बदल सकता है।

31 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत दुस्साहस का कवर इमेज
कहानी1921

दुस्साहस

Dussahas

प्रेमचंद की कहानी 'दुस्साहस' लखनऊ के मुख्तार मुंशी मैकूलाल की कहानी है, जिनका जीवन शराब और नशे की महफिलों में बीतता है। शराब की दुकान पर स्वराज्य आंदोलन के स्वयंसेवकों के धरने का विरोध करने पहुँचने पर उनका सामना स्वामी घनानंद के नैतिक प्रभाव से होता है और अंततः वे शराब छोड़ने का निर्णय लेते हैं।

22 मिनट