कहानियाँ

Short Stories

भारतीय जनजीवन और समाज की यथार्थ तस्वीर प्रस्तुत करती प्रेमचंद की 300 से अधिक कालजयी कहानियाँ।

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मुंशी प्रेमचंद कृत बोहनी का कवर इमेज
कहानी

बोहनी

Bohani

प्रेमचंद की कहानी 'बोहनी' एक पान-प्रेमी कथावाचक की हास्यस्पद दास्तान है, जो अपनी बोहनी को अपशकुन बताने वाली तंबोलिन के सामने आत्मसम्मान बचाने के चक्कर में नई मुसीबतों में फंस जाता है।

18 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत चकमा का कवर इमेज
कहानी

चकमा

Chakma

प्रेमचंद की कहानी 'चकमा' स्वदेशी आंदोलन, विदेशी कपड़ों के बहिष्कार और औपनिवेशिक पुलिस-व्यवस्था पर आधारित राजनीतिक कथा है। सेठ चंदूमल अपने व्यापार और सरकारी संबंधों के कारण कांग्रेस का विरोध करते हैं, लेकिन पुलिस की क्रूरता का प्रत्यक्ष अनुभव उनके दृष्टिकोण को बदल देता है।

17 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत गृह-नीति का कवर इमेज
कहानी1935

गृह-नीति

Grih Neeti

प्रेमचंद की 'गृह-नीति' सास-बहू के संघर्ष के माध्यम से घरेलू सत्ता, स्त्री की गरिमा और परंपरा तथा आधुनिक वैवाहिक संबंधों के टकराव को सामने लाती है। विधवा माँ लगातार अपने बेटे से बहू की शिकायत करती है। वह चाहती है कि बहू पुराने ढंग से सेवा करे, चरण दबाए, बड़ों के सामने झुके और घर के काम को अपना कर्तव्य माने। बेटा इस धारणा का विरोध करता है। वह कहता है कि पत्नी उसकी जीवन-संगिनी है, लौंडी नहीं, और पति-पत्नी दोनों बराबर हैं। बहू अचानक उनकी बातचीत सुन लेती है और स्पष्ट शब्दों में कहती है कि वह इस घर में गुलामी करने नहीं, जीवन-संगिनी बनकर आई है। उसके अनुसार कर्तव्य प्रेम से पैदा होना चाहिए, तिरस्कार और दबाव से नहीं। इसके बाद पति अपनी माँ के कथित हृदय-परिवर्तन की बात पत्नी को बताता है। बहू तुरंत बदला लेने के बजाय स्वयं आगे बढ़कर सास के प्रति प्रेम और सेवा का भाव अपनाने को तैयार हो जाती है। कहानी दिखाती है कि परिवार में अधिकार और परंपरा से पैदा हुआ संघर्ष संवेदना, संवाद और पारस्परिक सम्मान से समाप्त किया जा सकता है।

36 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत जीवन का शाप का कवर इमेज
विशेष
कहानी1935

जीवन का शाप

Jeevan Ka Shaap

प्रेमचंद की 'जीवन का शाप' धन, विवाह, दांपत्य-संबंध और मनुष्य की इच्छाओं के भ्रम पर केंद्रित एक तीखा मनोवैज्ञानिक-सामाजिक व्यंग्य है। निर्धन समाचारपत्र-संपादक कावसजी अपने धनी मित्र शापूरजी के सुखी जीवन से ईर्ष्या करते हैं और उनकी पत्नी शीरीं में वह आदर्श देखते हैं जो उन्हें अपनी पत्नी गुलशन में दिखाई नहीं देता। लेकिन शीरीं बताती है कि धन और ऐश के बावजूद उसके विवाह में प्रेम और सहचर्य का अभाव है और शापूरजी रातें भोग-विलास में बिताते हैं। कावसजी धीरे-धीरे शीरीं के साथ नया जीवन बसाने की कल्पना करने लगते हैं। जब शीरीं सचमुच उनके साथ चलने के लिए तैयार हो जाती है, तब कावसजी पहली बार उस जीवन की वास्तविक आर्थिक कठिनाइयों के बारे में सोचते हैं जो वे उसे दे सकते हैं। उन्हें गुलशन की शिकायतों और कठोरता के पीछे छिपी निष्ठा, घरेलू जिम्मेदारी और त्याग दिखाई देने लगता है। अंततः गुलशन कहती है कि मनुष्य अक्सर उसी चीज की ओर दौड़ता है जिसमें उसका अमंगल छिपा होता है—यही 'जीवन का शाप' है।

33 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत दूध का दाम का कवर इमेज
विशेष
कहानी1934

दूध का दाम

Doodh Ka Daam

प्रेमचंद की 'दूध का दाम' जाति-व्यवस्था, छुआछूत और श्रम के शोषण पर तीखा प्रहार करने वाली कहानी है। गरीब भंगी स्त्री भुंगी अपने बेटे मंगल के साथ-साथ जमींदार महेशनाथ के बेटे सुरेश को भी अपना दूध पिलाकर पालती है। उसका मातृ-दूध उस संपन्न परिवार के बच्चे के जीवन का आधार बनता है, लेकिन भुंगी और उसके बेटे को इसके बदले सम्मान या सुरक्षा नहीं मिलती। बाद में भुंगी को घर से निकाल दिया जाता है और उसकी मृत्यु के बाद मंगल अनाथ तथा निर्धन हो जाता है। सुरेश विशेषाधिकार और सुविधा में बड़ा होता है, जबकि मंगल जूठे भोजन और टुकड़ों पर जीवित रहने को मजबूर है। भुंगी के दूध के उस नैतिक ऋण को, जिसे समाज कहता है कि कोई चुका नहीं सकता, मंगल के हिस्से में सम्मान के बजाय भूख, अपमान और बहिष्कार मिलता है। शीर्षक इसी विडंबना को सामने लाता है।

26 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत दूसरी शादी का कवर इमेज
कहानी1934

दूसरी शादी

Dusari Shadi

प्रेमचंद की कहानी 'दूसरी शादी' पुनर्विवाह, पारिवारिक जिम्मेदारी और सामाजिक सुधार के प्रश्न को एक पिता के आत्मसंघर्ष के माध्यम से प्रस्तुत करती है। कहानी दिखाती है कि दूसरी शादी का निर्णय किस प्रकार एक छोटे बच्चे, वैवाहिक वचन और व्यक्ति के अपने आदर्शों के बीच गहरा तनाव पैदा कर सकता है।

10 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत जादू का कवर इमेज
कहानी1934

जादू

Jaadu

प्रेमचंद की 'जादू' एक अत्यंत संक्षिप्त, संवादप्रधान कहानी है जिसमें दो बहनों को पता चलता है कि एक ही पुरुष दोनों से प्रेम के समान दावे कर रहा है। नीला पहले मीना से इसलिए नाराज़ होती है कि वह उस पुरुष को पत्र क्यों लिख रही है जिसने पहले उसका अपमान किया और उसके नाम को बदनाम किया था। बातचीत आगे बढ़ने पर पता चलता है कि वह पुरुष मीना से भी वही बातें कहता है जो कभी नीला से कहता था—प्यार, मर जाने और ज़हर खा लेने जैसी भावुक धमकियाँ। दोनों बहनों को समझ में आता है कि उसकी प्रेम-भाषा वास्तव में छल और शिकार करने की एक तय तरकीब है। कहानी ईर्ष्या को बहनापा और समझ में बदलते हुए पुरुष की भावनात्मक चालबाजी तथा स्त्री के आत्मसम्मान पर तीखा व्यंग्य करती है।

8 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत गिला का कवर इमेज
कहानी1932

गिला

Gila

प्रेमचंद की 'गिला' पति-पत्नी के संबंधों में छिपी शिकायतों, असमान अपेक्षाओं और घरेलू जिम्मेदारियों पर केंद्रित एक रोचक व्यंग्यात्मक कहानी है। पत्नी की दृष्टि से कही गई कहानी में उसका पति बाहर के लोगों के प्रति अत्यंत उदार, विनम्र और परोपकारी है, लेकिन उसकी यही उदारता घर की आवश्यकताओं की उपेक्षा बन जाती है। वह मित्रों पर पैसे खर्च करता है, गरीबों को अपना सामान दे देता है, खराब दुकानदारों से सामान खरीदता है और बच्चों के प्रति अनुशासन में भी अत्यधिक नरम है। पत्नी की शिकायत केवल उसके व्यवहार से नहीं, बल्कि इस बात से है कि समाज जिस उदारता की प्रशंसा करता है, उसका भार घरवालों को उठाना पड़ता है। हास्य और घरेलू प्रसंगों के माध्यम से प्रेमचंद बाहरी यश और वास्तविक पारिवारिक जिम्मेदारी के बीच के विरोधाभास को उजागर करते हैं।

38 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत झाँकी का कवर इमेज
कहानी1932

झाँकी

Jhanki

प्रेमचंद की 'झाँकी' एक मध्यवर्गीय परिवार में सास-बहू के संघर्ष और उसके बीच पिसते पति की मनोवैज्ञानिक स्थिति की कहानी है। तीज के अवसर पर बहन के घर भेजे जाने वाले उपहारों को लेकर माँ और पत्नी विद्या के बीच विवाद शुरू होता है। घटती आय और बढ़ते खर्च के बीच यह मामूली आर्थिक प्रश्न धीरे-धीरे पुराने आरोपों, अधिकार-बोध, रूढ़ियों और बदलते समय के संघर्ष में बदल जाता है। जन्माष्टमी के दिन घर में ऐसा तनाव फैल जाता है कि बच्चों तक को स्नेह नहीं मिलता। एक धार्मिक झाँकी और उससे जुड़ी स्मृतियाँ कथावाचक के भीतर अचानक परिवर्तन पैदा करती हैं। उसे अपने मृत भाई, अपनी माँ और विवाह के शुरुआती दिनों की याद आती है और जिन लोगों से वह क्रोधित था, उन्हीं के प्रति उसके भीतर करुणा और प्रेम जाग उठता है। प्रेमचंद दिखाते हैं कि स्मृति और आत्मचिंतन कभी-कभी लंबे समय से जमा पारिवारिक कटुता को पिघला सकते हैं।

21 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत दो कब्रें का कवर इमेज
कहानी1930

दो कब्रें

Do Kabren

प्रेमचंद की कहानी 'दो कब्रें' प्रेम, त्याग, स्मृति और मृत्यु के पार बने मानवीय संबंध की मार्मिक कथा है। दो कब्रें एक ऐसे रिश्ते की स्मृति बन जाती हैं जिसकी सच्चाई सामाजिक दूरी और मृत्यु के बाद भी बनी रहती है।

40 मिनट