कहानियाँ

Short Stories

भारतीय जनजीवन और समाज की यथार्थ तस्वीर प्रस्तुत करती प्रेमचंद की 300 से अधिक कालजयी कहानियाँ।

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मुंशी प्रेमचंद कृत उद्धार का कवर इमेज
कहानी1924

उद्धार

Uddhar

प्रेमचंद की 'उद्धार' सामाजिक सुधार और आत्म-त्याग की मार्मिक कहानी है। हजारीलाल क्षय रोग से पीड़ित है और डॉक्टर स्पष्ट चेतावनी देते हैं कि विवाह उसके जीवन को और छोटा कर देगा। इसके बावजूद उसके माता-पिता उसका विवाह अंबा से करने पर अड़े रहते हैं। हजारीलाल अपने परिवार को समझाने में असफल रहता है और विवाह के दिन घर से गायब हो जाता है, ताकि एक निर्दोष लड़की को अल्पायु में विधवा होने के लिए विवश न होना पड़े। बाद में अंबा को उसके त्याग का पता चलता है और वह उसे अपना उद्धारक और जीवनदाता मानती है। प्रेमचंद इस कथा के माध्यम से बाल-विवाह, अदूरदर्शी अभिभावकीय निर्णय और ऐसी विवाह-व्यवस्था की आलोचना करते हैं जिसमें लड़की के जीवन और भविष्य से अधिक परिवार की सामाजिक इच्छा को महत्व दिया जाता है।

24 मिनट
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कहानी1924

विनोद

Vinod

प्रेमचंद की 'विनोद' कॉलेज जीवन, प्रेम-आसक्ति, मित्रों की शरारत, पश्चिमी तौर-तरीकों की नकल और आत्मसम्मान पर आधारित हास्य-व्यंग्यात्मक कहानी है। पंडित चक्रधर एक गंभीर, धार्मिक और परंपरागत विद्यार्थी हैं। कॉलेज में नई आई लूसी के प्रति उनका आकर्षण उनके शरारती सहपाठियों नईम और गिरिधर सहाय की नजर से बच नहीं पाता। दोनों लूसी के नाम से नकली प्रेम-पत्र लिखकर चक्रधर को भेजते हैं। पत्रों को सच मानकर चक्रधर अपने कपड़े, बाल, भाषा और व्यवहार तक बदल डालते हैं। वे अंग्रेजी बोलने का अभ्यास करते हैं, खेलों में रुचि दिखाने की कोशिश करते हैं और लूसी को प्रभावित करने के लिए अपनी सामर्थ्य से अधिक खर्च करते हैं। अंततः मित्रों की शरारत इतनी बढ़ जाती है कि चक्रधर लूसी के सामने अपने प्रेम का इजहार करने पहुँच जाते हैं और उसे अपमानजनक परिणाम भुगतना पड़ता है। बाद में उन्हें पता चलता है कि पूरा प्रेम-प्रसंग उनके मित्रों की बनाई हुई चाल थी। कहानी हास्य के माध्यम से युवा मन की कल्पना, दिखावे, मित्र-दबाव और पश्चिमी आधुनिकता की सतही नकल पर व्यंग्य करती है।

48 मिनट
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कहानी1923

वैर का अंत

Vair Ka Ant

प्रेमचंद की कहानी 'वैर का अंत' दो भाइयों के बीच जमीन के विवाद से पैदा हुई वर्षों पुरानी दुश्मनी की कहानी है। मुकदमे, स्वार्थ और प्रतिशोध दोनों परिवारों को बर्बाद कर देते हैं, लेकिन जागेश्वर अपने चाचा के अनाथ बच्चों के प्रति करुणा दिखाकर अंततः पुरानी वैर-भावना को समाप्त कर देता है।

23 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत स्वत्व-रक्षा का कवर इमेज
कहानी1922

स्वत्व-रक्षा

S4Twatva Raksha

प्रेमचंद की कहानी 'स्वत्व-रक्षा' एक आत्मसम्मानी घोड़े की कहानी है, जो अपने विश्राम और स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा के लिए हर प्रकार की मार और जबरदस्ती का सामना करता है। विवाह की बारात में उसे ले जाने के प्रयास के बावजूद वह अपने स्वत्व से समझौता नहीं करता।

19 मिनट
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कहानी1922

वज्रपात

Vajrapat

प्रेमचंद की 'वज्रपात' नादिरशाह के दिल्ली-विजय और मुगले-आजम हीरे के इर्द-गिर्द बुनी गई ऐतिहासिक कहानी है। दिल्ली में भयंकर कत्लेआम के बाद मुहम्मदशाह का वज़ीर अपनी काव्य-बुद्धि से नादिरशाह के क्रोध को शांत करता है। लेकिन शीघ्र ही नादिरशाह की लालसा मुगले-आजम नामक प्रसिद्ध हीरे पर केंद्रित हो जाती है, जिसके बारे में वह अलौकिक शक्तियों की कथाएँ सुन चुका है। मुहम्मदशाह हीरे को छिपा देता है और वज़ीर उसे पगड़ी में रखने की युक्ति बताता है। अंततः नादिरशाह संधि के अवसर पर पगड़ियों की अदला-बदली के बहाने हीरा प्राप्त कर लेता है। उसे लगता है कि यह रत्न उसकी विजय और भाग्य का प्रतीक है, लेकिन ईरान लौटने के बाद उसके पुत्र की अचानक हत्या हो जाती है। तब उसकी सारी विजय, संपत्ति और हीरे की लालसा अर्थहीन हो जाती है। अंत में वह हीरे को अपने मृत पुत्र के साथ दफना देता है।

26 मिनट
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कहानी1921

विचित्र होली

Vichitra Holi

प्रेमचंद की 'विचित्र होली' औपनिवेशिक सत्ता, अंग्रेज़परस्ती और राष्ट्रीय चेतना के जागरण पर केंद्रित तीखा राजनीतिक व्यंग्य है। होली के दिन अंग्रेज़ कलेक्टर मिस्टर क्रास शिकार पर गए हुए हैं और उनके भारतीय नौकर उनके बंगले के भोजन-कक्ष में स्वतंत्र होकर होली मनाने लगते हैं। खानसामा शेख नूरअली घोषणा करता है कि अब वह गुलामी नहीं करेगा और सबको शराब, गीत और नृत्य के लिए बुलाता है। अंग्रेज़ों का सहयोगी सेठ उजागरमल यह समझकर इस उत्सव में शामिल हो जाता है कि साहब ने स्वयं इसकी अनुमति दी है। क्रास लौटता है तो नौकर उसे रंग और कालिख से रंग देते हैं और वह उन्हें कोड़े से पीटता है। उजागरमल भी अपमानित होकर भागता है। यह अनुभव उसके भीतर औपनिवेशिक सत्ता के प्रति गहरा मोहभंग पैदा करता है। वह सीधे कांग्रेस की सभा में पहुँचता है, जहाँ हिंदू-मुसलमान और विभिन्न सामाजिक समूह मिलकर होली मना रहे हैं। वहाँ वह सार्वजनिक रूप से अंग्रेज़ी सत्ता के सहयोग से तौबा करता है और अपना तन-मन-धन राष्ट्रीय आंदोलन को समर्पित करने की घोषणा करता है। प्रेमचंद होली के हास्य और उन्मुक्तता को राजनीतिक मुक्ति के रूपक में बदल देते हैं।

18 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत विध्वंस का कवर इमेज
कहानी1921

विध्वंस

Vidhwans

प्रेमचंद की कहानी 'विध्वंस' भुनगी नाम की एक गरीब, निःसंतान गोंड़ विधवा की त्रासद कहानी है, जो बनारस के पास एक गाँव में भाड़ चलाकर अपना जीवनयापन करती है। जमींदार पंडित उदयभान उसके जीवन के एकमात्र सहारे को नष्ट कर देते हैं और उसे फिर से भाड़ बनाने से रोकते हैं। संघर्ष अंततः ऐसी विनाशकारी आग में बदल जाता है जो गाँव और स्वयं पंडित उदयभान की संपत्ति को भी भस्म कर देती है।

16 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत विषम समस्या का कवर इमेज
कहानी1921

विषम समस्या

Visham Samasya

प्रेमचंद की कहानी 'विषम समस्या' गरीब नामक एक ईमानदार और मेहनती चपरासी की कहानी है, जिसे केवल इसलिए अपमान और उपेक्षा सहनी पड़ती है क्योंकि वह अधिकारियों को उपहार नहीं देता। जब कथावाचक उसे घर की चीजें लाकर देने की सलाह देता है, तो उपहारों से उसे सम्मान तो मिलता है, लेकिन धीरे-धीरे वही व्यवस्था उसकी सरलता और ईमानदारी को नष्ट कर देती है।

17 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत त्यागी का प्रेम का कवर इमेज
कहानी1920

त्यागी का प्रेम

Tyagi Ka Prem

प्रेमचंद की कहानी 'त्यागी का प्रेम' प्रेम, त्याग और निःस्वार्थ भावना की मार्मिक कहानी है, जिसमें व्यक्तिगत इच्छा से ऊपर दूसरे के सुख और कल्याण को महत्व दिया गया है।

43 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत विस्मृति का कवर इमेज
कहानी1918

विस्मृति

Vismriti

प्रेमचंद की कहानी 'विस्मृति' प्रेम, कुल-मर्यादा, त्याग और पश्चात्ताप की मार्मिक कहानी है। ललनसिंह और दूजी के संबंध को लेकर दूजी के भाई शानसिंह और गुमानसिंह हिंसा का मार्ग अपनाते हैं, जिसके कारण भाई-बहन चौदह वर्षों के लिए बिछड़ जाते हैं। वर्षों का वनवास अंततः उनके बीच एक अत्यंत भावुक पुनर्मिलन और पुराने घावों के भरने का कारण बनता है।

59 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत उपदेश का कवर इमेज
कहानी1917

उपदेश

Updesh

प्रेमचंद की कहानी 'उपदेश' खोखली देशभक्ति और उच्च वर्ग के दिखावटी समाज-सेवा की तीखी आलोचना है। पंडित देवरत्न शर्मा जैसे शिक्षित और प्रतिष्ठित समाजसेवी के माध्यम से प्रेमचंद दिखाते हैं कि देशसेवा और किसानों के प्रति वास्तविक जिम्मेदारी की बातें करना आसान है, लेकिन संकट और स्वार्थ के सामने उन आदर्शों पर अमल करना कठिन है।

59 मिनट