उद्धार
Uddhar
प्रेमचंद की 'उद्धार' सामाजिक सुधार और आत्म-त्याग की मार्मिक कहानी है। हजारीलाल क्षय रोग से पीड़ित है और डॉक्टर स्पष्ट चेतावनी देते हैं कि विवाह उसके जीवन को और छोटा कर देगा। इसके बावजूद उसके माता-पिता उसका विवाह अंबा से करने पर अड़े रहते हैं। हजारीलाल अपने परिवार को समझाने में असफल रहता है और विवाह के दिन घर से गायब हो जाता है, ताकि एक निर्दोष लड़की को अल्पायु में विधवा होने के लिए विवश न होना पड़े। बाद में अंबा को उसके त्याग का पता चलता है और वह उसे अपना उद्धारक और जीवनदाता मानती है। प्रेमचंद इस कथा के माध्यम से बाल-विवाह, अदूरदर्शी अभिभावकीय निर्णय और ऐसी विवाह-व्यवस्था की आलोचना करते हैं जिसमें लड़की के जीवन और भविष्य से अधिक परिवार की सामाजिक इच्छा को महत्व दिया जाता है।