कहानियाँ

Short Stories

भारतीय जनजीवन और समाज की यथार्थ तस्वीर प्रस्तुत करती प्रेमचंद की 300 से अधिक कालजयी कहानियाँ।

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मुंशी प्रेमचंद कृत सुजान भगत का कवर इमेज
कहानी

सुजान भगत

Sujan Bhagat

प्रेमचंद की कहानी 'सुजान भगत' एक किसान की आत्मसम्मान और पारिवारिक अधिकार की मार्मिक कथा है। धन और धार्मिक प्रतिष्ठा पाने के बाद सुजान अपने ही घर में अधिकार खो देते हैं, लेकिन फिर कठोर परिश्रम करके अपनी उपयोगिता और सम्मान पुनः प्राप्त करते हैं।

31 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत वेश्या का कवर इमेज
कहानी1933

वेश्या

Veshya

प्रेमचंद की 'वेश्या' समाज द्वारा वेश्याओं के प्रति किए जाने वाले तिरस्कार और उसी समाज के पुरुषों के दोहरे नैतिक मानदंडों की कहानी है। दयाकृष्ण, सिंगारसिंह, लीला और माधुरी इसके प्रमुख पात्र हैं। संपन्न युवक सिंगारसिंह अपनी पत्नी लीला की उपेक्षा करके माधुरी के पास जाता है और विलासिता में डूब जाता है। उसका मित्र दयाकृष्ण शुरू में माधुरी के प्रभाव से सिंगारसिंह को बचाने के उद्देश्य से उसके पास जाता है, लेकिन धीरे-धीरे माधुरी की बुद्धिमत्ता, संवेदनशीलता और प्रेम की क्षमता को पहचानने लगता है। माधुरी ऐसे पुरुषों की आदी है जो उसे केवल भोग की वस्तु समझते हैं; इसलिए दयाकृष्ण का संयम और निःस्वार्थ व्यवहार उसके लिए नया अनुभव बन जाता है। दोनों के बीच वास्तविक भावनात्मक संबंध विकसित होता है, लेकिन सामाजिक प्रतिष्ठा और 'कुलवधू' तथा 'वेश्या' के बीच बनाई गई नैतिक दीवार उनके संबंध को असंभव बना देती है। प्रेमचंद इस विरोधाभास के माध्यम से दिखाते हैं कि समाज पुरुषों को वेश्याओं का उपभोग करने की स्वतंत्रता देता है, लेकिन उन्हीं स्त्रियों को सम्मान और मानवीय प्रेम का अधिकार नहीं देता।

55 मिनट
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कहानी1932

तगादा

Tagada

प्रेमचंद की कहानी 'तगादा' सेठ चेतराम के माध्यम से महाजनी लालच, धार्मिक दिखावे, डर और मानवीय कमजोरियों पर तीखा व्यंग्य करती है। कर्ज़ वसूलने निकला सेठ एक चालाक इक्केवाले और एक आकर्षक स्त्री के संपर्क में आकर अपनी ही नैतिक कमजोरियों से सामना करता है।

23 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत तावान का कवर इमेज
कहानी1931

तावान

Tawan

प्रेमचंद की 'तावान' स्वदेशी आंदोलन, गरीबी और आर्थिक दबाव के बीच पैदा होने वाले नैतिक संघर्ष की कहानी है। छकौड़ीलाल एक गरीब कपड़ा व्यापारी है जो विदेशी कपड़े के बहिष्कार के आंदोलन में शामिल होता है। लेकिन घर में बूढ़ी माँ, बीमार पत्नी और पाँच बच्चों का खर्च चलाना कठिन हो जाता है। मजबूरी में वह फिर विदेशी कपड़ा बेच देता है। बहिष्कार समिति उस पर 101 रुपये का तावान लगा देती है, जबकि उसके घर में दो दिन से चूल्हा तक नहीं जला है। प्रेमचंद इस घटना के माध्यम से दिखाते हैं कि राष्ट्रीय आंदोलन के आदर्श और गरीब व्यक्ति की आर्थिक वास्तविकता हमेशा एक-दूसरे से आसानी से मेल नहीं खाते। कहानी आंदोलन की भावना का विरोध नहीं करती, बल्कि यह प्रश्न उठाती है कि क्या आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति को सुधार या राष्ट्रहित के नाम पर ऐसी सजा देना न्यायपूर्ण है जो उसके परिवार को भूख के कगार पर पहुँचा दे।

19 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत उन्माद का कवर इमेज
कहानी1931

उन्माद

Unmaad

प्रेमचंद की 'उन्माद' महत्वाकांक्षा, दांपत्य-त्याग, पश्चिमी जीवन के आकर्षण और स्वार्थ से पैदा होने वाली आत्म-विनाशकारी मानसिक स्थिति की त्रासद कहानी है। मनहर एक साधारण क्लर्क है, जिसकी पत्नी वागेश्वरी उसके अध्ययन और उन्नति के लिए अपना जीवन समर्पित कर देती है। उसकी मेहनत और त्याग से मनहर को इंग्लैंड जाकर गुप्तचर-कला का प्रशिक्षण लेने का अवसर मिलता है। इंग्लैंड पहुँचकर वह पश्चिमी सामाजिक जीवन, विलासिता और जेनी नामक अंग्रेज युवती के आकर्षण में पड़ जाता है। वह अपनी पत्नी के त्याग और सरलता को तुच्छ समझने लगता है और जेनी से विवाह कर लेता है। जेनी के सामाजिक प्रभाव से उसे भारत लौटने पर गुप्तचर विभाग में ऊँचा पद भी मिल जाता है। लेकिन दोनों के विवाह की बुनियाद अलग-अलग अपेक्षाओं पर है। मनहर जेनी से पारंपरिक पत्नी जैसी निष्ठा और अधीनता चाहता है, जबकि जेनी अपने स्वतंत्र जीवन और अधिकारों को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। संबंध बिगड़ते-बिगड़ते मनहर शराब और मानसिक विघटन की ओर चला जाता है। वर्षों बाद वह भारत लौटता है, लेकिन इंग्लैंड, जेनी और अपने ऊँचे पद से जुड़े जीवन की स्मृति लगभग खो चुका है। वागेश्वरी उसके साथ फिर भी वही प्रेम और सेवा करती है। अंततः जेनी मनहर को खोजते हुए आती है और वागेश्वरी पर हमला करने का प्रयास करती है। मनहर अपनी पहली पत्नी की रक्षा करते हुए पिस्तौल छीन लेता है और स्वयं को गोली मार लेता है। प्रेमचंद दिखाते हैं कि जिस सफलता के लिए मनुष्य सच्चे संबंधों और कृतज्ञता को त्याग देता है, वह सफलता अंततः उसके लिए विनाश का कारण बन सकती है।

49 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत विद्रोही का कवर इमेज
कहानी1928

विद्रोही

Vidrohi

प्रेमचंद की 'विद्रोही' कृष्ण और तारा के बाल्यकाल से विकसित हुए प्रेम की मार्मिक कहानी है। दोनों परिवारों को विश्वास है कि उनका विवाह होगा, लेकिन कृष्ण के चाचा आठ हजार रुपये के दहेज के लालच में एक धनवान परिवार का रिश्ता स्वीकार करना चाहते हैं। तारा के पिता आर्थिक रूप से इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थ हैं और वर्षों से चले आ रहे संबंध को ही पर्याप्त समझते हैं। चाचा इस पुराने संबंध से मुकर जाते हैं। कृष्ण को विवाद की पूरी सच्चाई जानने के बजाय चाची से एकतरफा विवरण मिलता है और वह स्वयं तारा या उसके माता-पिता से बात करने का साहस नहीं जुटा पाता। तारा भी उसके पत्र की प्रतीक्षा करती रहती है। दोनों की चुप्पी और गलतफहमी ऐसी दूरी पैदा कर देती है जिसे बाद में कोई साहस भी नहीं भर पाता। कृष्ण अंततः चाचा के निर्णय का विरोध करता है, लेकिन तब तक देर हो चुकी होती है। वह तारा का विवाह अपनी आँखों से देखता है और वर्षों तक उसी दुःख में जीता है। बहुत बाद में तारा के पति से उसे पता चलता है कि तारा ने भी उसे कभी नहीं भुलाया था और उनके प्रेम को अपने जीवन की सबसे मधुर स्मृति मानती थी। कहानी में 'विद्रोह' इसलिए विडंबनापूर्ण है कि कृष्ण परिवार और दहेज-आधारित विवाह के विरुद्ध विद्रोह तो करता है, लेकिन उसका साहस समय पर नहीं जागता। प्रेमचंद दहेज, पारिवारिक अधिकार और सामाजिक प्रतिष्ठा की आलोचना के साथ-साथ संकोच, आत्म-संदेह, मौन और गलतफहमी की मनोवैज्ञानिक त्रासदी को भी सामने रखते हैं।

37 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत स्वर्ग की देवी का कवर इमेज
कहानी1925

स्वर्ग की देवी

Swarg Ki Devi

प्रेमचंद की 'स्वर्ग की देवी' लीला के त्याग, धैर्य, बुद्धिमत्ता और दांपत्य-प्रेम की कहानी है। शिक्षित और स्वच्छताप्रिय परिवार में पली लीला का विवाह सीतासरन से होता है, जिसके घर की रूढ़ियाँ और अस्वच्छ जीवन-पद्धति उसके संस्कारों से बिल्कुल अलग हैं। विवाह के बाद उसके दो बच्चों की हैजे से मृत्यु हो जाती है। लीला शोक में डूब जाती है, जबकि सीतासरन धीरे-धीरे अपने दुख से बचने के लिए भोग-विलास, शराब और बुरे मित्रों की संगति में पड़ जाता है। लीला स्वयं टूट चुकी होने पर भी समझती है कि यदि वह पति को छोड़ देगी तो उसका जीवन नष्ट हो जाएगा। वह अपने शोक को पीछे रखकर अपनी बुद्धि, धैर्य और स्नेह से उसे फिर परिवार की ओर खींचती है। अंततः सीतासरन उसकी इस निःस्वार्थ शक्ति को पहचानता है और उसे 'स्वर्ग की देवी' कहता है।

27 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत विश्वास का कवर इमेज
कहानी1925

विश्वास

Vishwas

प्रेमचंद की 'विश्वास' राजनीतिक चेतना, नैतिक विश्वास, प्रेम और आत्म-परिवर्तन की कहानी है। मिस जोशी बंबई के उच्चवर्गीय समाज की प्रभावशाली और आधुनिक विधवा है, जिसका संबंध गवर्नर मिस्टर जौहरी से है। दूसरी ओर आपटे गरीब, निर्भीक और जनपक्षधर राजनीतिक नेता हैं, जो अनाज पर लगाए गए कर और शासन की विलासिता के विरुद्ध जनता को संबोधित करते हैं। आपटे की गिरफ्तारी के बाद मिस्टर जौहरी मिस जोशी से उसे बदनाम और पराजित करने के लिए उसके विश्वास का लाभ उठाने को कहते हैं। लेकिन आपटे के घर जाकर उसके जीवन को जानने के बाद मिस जोशी का दृष्टिकोण पूरी तरह बदल जाता है। वह उसके निष्कपट चरित्र और त्याग से प्रभावित होकर अपने पुराने जीवन और सत्ता-सम्बंधों को चुनौती देती है।

43 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत तेंतर का कवर इमेज
कहानी1924

तेंतर

Tentar

प्रेमचंद की 'तेंतर' अंधविश्वास, पुत्र-प्राथमिकता और कन्या-भेदभाव पर तीखा प्रहार करने वाली कहानी है। पंडित दामोदरदत्त के तीन बेटों के बाद एक बेटी जन्म लेती है। परिवार की वृद्ध दादी मानती है कि तीन बेटों के बाद जन्मी लड़की 'तेंतर' होती है और उसके जन्म से माता-पिता या स्वयं लड़की पर कोई बड़ा अनिष्ट आता है। यह अंधविश्वास धीरे-धीरे पूरे परिवार के व्यवहार को प्रभावित करता है। माँ बच्ची की उपेक्षा करती है और उसे शांत रखने के लिए अफीम तक देती है। बच्ची भूख और उपेक्षा से कमजोर होती जाती है। दामोदरदत्त एक रात उसकी दशा देखकर समझते हैं कि किसी कल्पित अनिष्ट के डर से एक निर्दोष शिशु को दंड देना अमानवीय है। वे उसे स्नेह देते हैं और उनके बेटे भी अपनी छोटी बहन से प्रेम करने लगते हैं। वे एक बकरी का दूध पिलाकर उसका पालन करने में मदद करते हैं और बच्ची स्वस्थ होने लगती है। लेकिन दादी का अंधविश्वास समाप्त नहीं होता। अंततः जब वह स्वयं बीमार पड़ती है तो वह अपनी बीमारी को भी तेंतर के अभिशाप का प्रमाण मानती है। प्रेमचंद दिखाते हैं कि अंधविश्वास केवल विचार की भूल नहीं है; वह परिवार के व्यवहार को बदलकर एक निर्दोष बच्चे के जीवन के लिए वास्तविक खतरा पैदा कर सकता है।

24 मिनट