कहानी
बालक
Balak
प्रेमचंद की 'बालक' कहानी सामाजिक प्रतिष्ठा, विधवा-विवाह, जातिगत रूढ़ियों और मनुष्यता की वास्तविक कसौटी पर केंद्रित है। कथावाचक एक संपन्न जमींदार है, जिसके यहाँ गंगू नाम का नौकर काम करता है। गंगू ब्राह्मण है और अपने आत्मसम्मान के कारण सामान्य नौकरों की तरह मालिक की खुशामद नहीं करता। जब वह गोमती देवी नाम की एक विधवा से विवाह करने का निर्णय लेता है, तो कथावाचक इस विवाह को अनुचित समझता है। गंगू नौकरी छोड़ देता है और गोमती से विवाह कर लेता है। दोनों साधारण जीवन शुरू करते हैं और कुछ समय बाद उनके यहाँ एक बच्चा जन्म लेता है। बच्चे के प्रति गंगू का प्रेम, जिम्मेदारी और आत्मीयता धीरे-धीरे कथावाचक की धारणाएँ बदल देते हैं। कहानी दिखाती है कि सामाजिक पद, शिक्षा और प्रतिष्ठा मनुष्य के चरित्र के विश्वसनीय प्रमाण नहीं हैं; वास्तविक श्रेष्ठता स्वतंत्र विचार, प्रेम, जिम्मेदारी और मनुष्यता में है।
24 मिनट