कहानियाँ

Short Stories

भारतीय जनजीवन और समाज की यथार्थ तस्वीर प्रस्तुत करती प्रेमचंद की 300 से अधिक कालजयी कहानियाँ।

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मुंशी प्रेमचंद कृत दण्ड का कवर इमेज
कहानी1925

दण्ड

Dand

प्रेमचंद की 'दण्ड' रिश्वत, जातिगत बहिष्कार और सामुदायिक दंड की विडंबना पर तीखा व्यंग्य है। मिस्टर सिन्हा एक सम्मानित जज हैं जो अपने न्यायप्रिय और कानूननिष्ठ होने की छवि बनाए रखते हैं, लेकिन जगत पांडे से रिश्वत लेते हैं। मुकदमा हार जाने के बाद जगत पांडे उनके बंगले के सामने अनशन करके बैठ जाता है और अपनी मृत्यु के माध्यम से सिन्हा के भ्रष्टाचार को सार्वजनिक करने की धमकी देता है। अंततः सिन्हा पाँच हजार रुपये देने को तैयार होते हैं, लेकिन रकम हाथ में आते ही जगत पांडे गिरकर मर जाता है। इसके बाद बिरादरी और समाज सिन्हा का बहिष्कार कर देते हैं। सबसे बड़ा संकट तब आता है जब उनकी बेटी त्रिवेणी विवाह योग्य होती है और कोई भी परिवार बहिष्कृत सिन्हा के घर से संबंध स्वीकार नहीं करता। प्रेमचंद इस स्थिति के माध्यम से प्रश्न उठाते हैं कि अपराध यदि पिता ने किया है तो उसकी सजा निर्दोष बेटी को क्यों मिले?

35 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत डिक्री के रुपये का कवर इमेज
कहानी1925

डिक्री के रुपये

Decree Ke Rupaye

प्रेमचंद की 'डिक्री के रुपये' मित्रता, रिश्वत, औपनिवेशिक शासन, पत्रकारिता और व्यक्तिगत निष्ठा तथा सार्वजनिक कर्तव्य के बीच के संघर्ष की कहानी है। मिर्जा नईम को विष्णुपुर रियासत के मैनेजर की हत्या की जाँच सौंपी जाती है। रियासत की ओर से उसे उपहार और बीस हजार रुपये का प्रलोभन मिलता है और वह ऐसी रिपोर्ट तैयार करता है जिससे युवा कुँवर साहब हत्या के संदेह से बच जाएँ। उसका पुराना मित्र कैलास सब कुछ जानता है, क्योंकि नईम ने उससे अपने निर्णय की पूरी बात कही थी। कैलास लंबे समय तक इस धर्म-संकट में रहता है कि मित्रता निभाए या अपने पत्रकार और सार्वजनिक कर्तव्य का पालन करे। अंततः वह सत्य प्रकाशित करता है। नईम उसके विरुद्ध मानहानि का मुकदमा करता है, अदालत में सब कुछ नकार देता है और कैलास पर बीस हजार रुपये की डिक्री हो जाती है। कैलास की संपत्ति नीलाम होने और उसका अखबार बंद होने की नौबत आ जाती है। लेकिन अंत में नईम स्वयं उसके पास लौटता है और दोनों की मित्रता एक जटिल नैतिक रूप में सामने आती है—जहाँ एक मित्र सार्वजनिक रूप से दूसरे के विरुद्ध खड़ा होता है, फिर भी निजी रूप से उसे विनाश से बचाने का प्रयास करता है।

39 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत धिक्कार का कवर इमेज
विशेष
कहानी1925

धिक्कार

Dhikkar

प्रेमचंद की 'धिक्कार' देशभक्ति, राष्ट्रहित और निजी स्वार्थ के बीच संघर्ष की तीखी राजनीतिक कहानी है। ईरान और यूनान के युद्ध के दौरान यूनान की जनता को डेल्फी की पुजारिन बताती है कि देश की पराजय का कारण कोई देशद्रोही है। वह देशद्रोही पासोनियस निकलता है, जो धन और विलास के लोभ में यूनानी सैन्य योजनाएँ ईरानियों को बताता है। पकड़े जाने के बाद उसे देवी के मंदिर में बंद कर दिया जाता है। कठोर यातना के बाद वह पश्चात्ताप का अभिनय करते हुए जनता की सहानुभूति प्राप्त कर लेता है और लोग उसे छोड़ने को तैयार हो जाते हैं। लेकिन उसकी माँ समझ जाती है कि वह फिर देश के साथ विश्वासघात कर सकता है। वह मातृ-स्नेह को राष्ट्रहित से ऊपर नहीं रखती और स्वयं मंदिर का द्वार बंद करवाकर अपने पुत्र को भीतर कैद रहने देती है। कहानी का केंद्रीय संदेश है कि देशहित के सामने निजी मोह और स्वार्थ का स्थान नहीं होना चाहिए।

23 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत दीक्षा का कवर इमेज
कहानी1924

दीक्षा

Diksha

प्रेमचंद की 'दीक्षा' नशे की लत, आत्म-छल, सिद्धांतों से समझौते और औपनिवेशिक अपमान पर तीखा व्यंग्य है। कहानी का अनाम कथावाचक किशोरावस्था में नशानिवारणी सभा का उत्साही सदस्य बनता है और जीवन भर शराब न पीने की प्रतिज्ञा करता है। लेकिन कॉलेज, मित्रों का दबाव, पेशेगत तनाव और स्वयं को दिए गए तर्क धीरे-धीरे उसकी प्रतिज्ञा को कमजोर कर देते हैं। होली के दिन वह जानबूझकर शराब पीने की अपनी 'दीक्षा' की तैयारी करता है और मित्रों के दबाव में पहली बार पीता है। शीघ्र ही शराब मनोरंजन की वस्तु न रहकर उसके जीवन की आवश्यकता बन जाती है। एक बरसाती रात मुकदमे के सिलसिले में बाहर फँसे होने पर उसकी तलब इतनी बढ़ जाती है कि वह एक अंग्रेज अधिकारी के खानसामा से चोरी-छिपे शराब खरीदता है। चोरी पकड़ी जाती है और अंग्रेज साहब उसे सार्वजनिक रूप से अपमानित करते हुए उसके मुँह पर कालिख पोत देते हैं और लोगों के सामने दौड़ाते हैं। यही अपमान उसके लिए वह निर्णायक अनुभव बन जाता है जो उसके सभी पुराने तर्कों और प्रतिज्ञाओं से अधिक प्रभावी सिद्ध होता है। वह शराब पूरी तरह छोड़ देता है और पाँच वर्षों तक उसे हाथ नहीं लगाता। प्रेमचंद हास्य और आत्मव्यंग्य के माध्यम से दिखाते हैं कि मनुष्य अपने सिद्धांतों से गिरते समय किस प्रकार स्वयं को तर्क देकर धोखा देता है, साथ ही औपनिवेशिक सत्ता की नस्लीय और प्रशासनिक निरंकुशता को भी उजागर करते हैं।

40 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत बौड़म का कवर इमेज
कहानी1923

बौड़म

Baudam

प्रेमचंद की कहानी 'बौड़म' मुहम्मद खलील की कहानी है, जिसे लोग उसकी आदर्शवादिता और निःस्वार्थता के कारण बौड़म समझते हैं। वह धन और स्वार्थ के पीछे भागने के बजाय अन्याय का विरोध करता है, खिलाफत आंदोलन का समर्थन करता है, गायों की रक्षा करता है और जाति-धर्म से ऊपर उठकर जरूरतमंदों की सहायता करता है।

23 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत बूढ़ी काकी का कवर इमेज
कहानी1921

बूढ़ी काकी

Budhi Kaki

प्रेमचंद की कहानी 'बूढ़ी काकी' एक वृद्ध और असहाय स्त्री की मार्मिक कहानी है, जिसने अपनी संपत्ति भतीजे को सौंप दी है लेकिन बदले में उसे उपेक्षा और अपमान मिलता है। विवाह के अवसर पर एक छोटी लड़की की करुणा परिवार की स्वार्थपरता को उजागर करती है और बूढ़ी काकी को फिर से सम्मान और स्नेह मिलता है।

26 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत बोध का कवर इमेज
कहानी1920

बोध

Bodh

प्रेमचंद की कहानी 'बोध' पंडित चंद्रधर नामक एक अल्पवेतन शिक्षक की कहानी है, जो अपने प्रभावशाली पड़ोसियों के ठाट-बाट से ईर्ष्या करते हैं। अयोध्या की यात्रा और अपने पुराने शिष्य कृपाशंकर से मुलाकात के बाद उन्हें अपने शिक्षक पद की गरिमा और महत्त्व का बोध होता है।

19 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत ब्रह्म का स्वांग का कवर इमेज
कहानी1920

ब्रह्म का स्वांग

Brahm Ka Swaang

प्रेमचंद की कहानी 'ब्रह्म का स्वांग' जातिगत भेदभाव, धार्मिक रूढ़ियों और सामाजिक पाखंड पर तीखा व्यंग्य है। वृन्दा का पति उसे आत्मा की समानता और सभी मनुष्यों की एकता का उपदेश देता है, लेकिन जब वृन्दा इन सिद्धांतों को व्यवहार में उतारने लगती है, तो उसके पति का अपना आडंबर और स्वार्थ उजागर हो जाता है।

23 मिनट
मुंशी प्रेमचंद कृत दफ्तरी का कवर इमेज
कहानी1919

दफ्तरी

Daftari

प्रेमचंद की कहानी 'दफ्तरी' रफाकत हुसैन की कहानी है, जो कम वेतन में भी संतोषपूर्वक जीवन बिताता है और अपनी पहली पत्नी से गहरा प्रेम करता है। उसकी मृत्यु के बाद दूसरा विवाह उसके जीवन को आर्थिक संकट, घरेलू कलह और कर्ज में डाल देता है।

19 मिनट