सप्त सरोज - मुंशी प्रेमचंद कहानी संग्रह
कथा-संग्रह1917
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सप्त सरोज

Sapta Saroj

मुंशी प्रेमचंद
मूल जीवनकाल संग्रह (1907–1936)प्रकाशन वर्ष: 1917

सप्त सरोज

Sapta Saroj

मूल प्रकाशक / संकलन संदर्भ: ग्रंथ भंडार, बंबई / हिंदी पुस्तक भंडार, कलकत्ता

हिंदी भाषा में प्रकाशित मुंशी प्रेमचंद का पहला ऐतिहासिक कहानी-संग्रह, जिसमें "पंच परमेश्वर" और "बड़े घर की बेटी" जैसी 7 अमर रचनाएँ शामिल थीं।

प्रमुख विषय:#ग्राम पंचायत#पारिवारिक मर्यादा#नैतिक न्याय#ग्रामीण जीवन

ऐतिहासिक संदर्भ एवं पृष्ठभूमि

1917 में प्रकाशित इस संग्रह ने प्रेमचंद के उर्दू से देवनागरी हिंदी साहित्य में ऐतिहासिक पदार्पण को स्थापित किया। ऐसे समय में जब हिंदी कहानी तिलस्मी-जासूसी दुनिया में उलझी थी, प्रेमचंद ने ग्रामीण समाज और नैतिक मूल्यों का सजीव धरातल प्रस्तुत किया।

साहित्यिक महत्व एवं सामाजिक प्रभाव

इस संग्रह ने प्रेमचंद के शुरुआती "आदर्शोन्मुख यथार्थवाद" की नींव रखी, जहाँ न्याय, पारिवारिक सौहार्द और नैतिक धर्म की विजय दिखाई गई है।

संग्रह में संकलित कहानियाँ (7)

पुस्तक में शामिल सभी कहानियों की सूची एवं पढ़ने के विकल्प:

कुल 7 कहानियाँ
#01पढ़ने हेतु उपलब्ध

बड़े घर की बेटी

Bade Ghar Ki Beti

आनंदी की समझदारी से टूटते संयुक्त परिवार के फिर से जुड़ने की अमर कहानी।

#02पढ़ने हेतु उपलब्ध

पंच परमेश्वर

Panch Parmeshwar

अलगू चौधरी और जुम्मन शेख के न्याय पीठ पर बैठते ही मित्रता से ऊपर निष्पक्ष न्याय की गाथा।

#03पढ़ने हेतु उपलब्ध

सौत

Saut

दाम्पत्य जीवन में ईर्ष्या, अधिकार और मानवीय संबंधों का सूक्ष्म मनोवैज्ञानिक अध्ययन।

#04पढ़ने हेतु उपलब्ध

सज्जनता का दंड

Sajjanta Ka Dand

अत्यधिक सज्जनता और सीधेपन के कारण समाज में मिलने वाली कठिनाइयों पर मार्मिक प्रहार।

#05पढ़ने हेतु उपलब्ध

नमक का दारोगा

Namak Ka Daroga

मुंशी वंशीधर की कर्तव्यनिष्ठा और पंडित अलोपीदीन के धनबल पर धर्मबल की विजय।

#06पढ़ने हेतु उपलब्ध

उपदेश

Upadesh

कथनी और करनी के अंतर पर तीखा व्यंग्य।

#07पढ़ने हेतु उपलब्ध

परीक्षा

Pariksha

दीवान पद के चयन हेतु सुजान सिंह द्वारा उम्मीदवारों के दया और त्याग की परीक्षा।