Cover Image for Shadi Ki Wajah (शादी की वजह) by Munshi Premchand - Short Story
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कहानी••9 मिनट

शादी की वजह

Shadi Ki Wajah

प्रेमचंद की कहानी 'शादी की वजह' विवाह के विभिन्न हास्यास्पद, व्यावहारिक और अजीब कारणों पर आधारित एक मनोरंजक और व्यंग्यात्मक रचना है।

स्थान:सामान्य समाज

शादी की वजह का मूल पाठ

यह सवाल टेढ़ा है कि लोग शादी क्यो करते है? औरत और मर्द को प्रकृत्या एक—दूसरे की जरूरत होती है लेकिन मौजूदा हालत मे आम तौर पर शादी की यह सच्ची वजह नही होती बल्कि शादी सभ्य जीवन की एक रस्म—सी हो गई है। बहरलहाल, मैने अक्सर शादीशुदा लोगो से इस बारे मे पूछा तो लोगो ने इतनी तरह के जवाब दिए कि मै दंग रह गया। उन जवाबो को पाठको के मनोरंजन के लिए नीचे लिखा जाता हैकृ

एक साहब का तो बयान है कि मेरी शादी बिल्कुल कमसिनी मे हुई और उसकी जिम्मेदारी पूरी तरह मेरे मां—बाप पर है। दूसरे साहब को अपनी खूबसूरती पर बड़ा नाज है। उनका ख्याल है कि उनकी शादी उनके सुन्दर रूप की बदौलत हुई। तीसरे साहब फरमाते है कि मेरे पड़ोस मे एक मुशी साहब रहते थे जिनके एक ही लड़की थी। मैने सहानूभूतिवश खुद ही बातचीत करके शादी कर ली। एक साहब को अपने उत्तराधिकारी के रूप मे एक लड़के के जरूरत थी। चुनांचे आपने इसी धुन मे शादी कर ली। मगर बदकिस्मती से अब तक उनकी सात लड़कियां हो चुकी है और लड़के का कही पता नही। आप कहते है कि मेरा ख्यालहै कि यह शरारत मेरी बीवी की हैजो मुझे इस तरह कुढाना चाहती है। एक साहब पड़े पैसे वाले है और उनको अपनी दौलत खर्च करने का कोई तरीका ही मालूम न था इसलिए उन्होने अपनी शादी कर ली। एक और साहब कहते है कि मेरे आत्मीय और स्वजन हर वक्त मुझे घेरे रहा करते थे इसलिए मैने शादी कर ली। और इसका नतीजा यह हुआ कि अब मुझे शान्ति है। अब मेरे यहां कोई नही आता। एक साहब तमाम उम्र दूसरों की शादी—ब्याह पर व्यवहार और भेट देते—देते परेशान हो गए तो आपने उनकी वापसी की गरज से आखिरकार खुद अपनी शादी कर ली।

और साहबो से जो मैनेदर्याफ्त किया तो उन्होने निम्नलिखित कारण बतलाये। यह जवाब उन्ही के शब्दों मे नम्बरवार नीचे दर्ज किए जाते है— १—मेरे ससुर एक दौलत मन्द आदमी थे और उनकी यह इकलौती बेटी थी इसलिए मेरे पिता ने शादी की।

२—मेरे बाप-दादा सभी शादी करते चले आए है इसलिए मुझे भी शादी करनी पड़ी।

३—मै हमेशा से खामोश और कम बोलने वाला रहा हूं, इनकार न कर सका।

४—मेरे ससुर ने शुरू मे अपने धन-दौलत का बहुत प्रदर्शन किया इसलिए मेरे मां-बाप ने फौरन मेरी शादी मंजूर कर ली।

५—नौकर अच्छेनही मिलते थे ओर अगर मिलते भी थे तो ठहरते नही थे। खास तौर पर खाना पकानेवाला अच्छा नही मिलता। शादी के बाद इस मुसीबत से छुटकारा मिल गय।

६—मै अपना जीवन-बीमा कराना चाहता था और खानापूरी के वास्ते विधवा का नाम लिखना जरूरी था।

७—मेरी शादी जिद मे हुई। मेरे ससुर शादी के लिए रजामन्द न होते थे मगर मेरे पिता को जिद हो गई। इसलिए मेरी शादी हुई। आखिरकार मेरे ससुर को मेरी शादी करनी ही पड़ी।

८—मेरे ससुरालवाले बड़े ऊंचे खानदान के है इसलिए मेरे माता-पिता ने कोशिश करके मेरी शादी की।

९—मेरी शिक्षा की कोई उचित व्यवस्था न थी इसलिए मुझे शादी करनी पड़ी।

१०—मेरे और मेरी बीवी के जनम के पहले ही हम दोनो के मां-बाप शादी की बातचीत पक्की हो गई थी।

११—लोगो के आग्रह से पिता ने शादी कर दी।

१२—नस्ल और खानदान चलाने के लिए शादी की।

१३—मेरी मां को देहान्त हो गया था और कोई घर को देखनेवाला न था इसलिए मजबूरन शादी करनी पड़ी।

१४—मेरी बहने अकेली थी, इस वास्ते शादी कर ली।

१५—मै अकेला था, दफ्तर जाते वक्त मकान मे ताला लगाना पड़ता था इसलिए शादी कर ली।

१६—मेरी मां ने कसम दिलाई थी इसलिए शादी की।

१७—मेरी पहली बीवी की औलाद को परवरिश की जरूरत थी, इसलिए शादी की।

१८—मेरी मां का ख्याल था कि वह जल्द मरने वाली है और मेरी शादी अपने ही सामने कर देना चाहती थी, इसलिए मेरी शादी हो गई। लेकिन शादीको दस साल हो रहे है भगवान की दया से मां के आशीष की छाया अभी तक कायम है।

१९—तलाक देने को जी चाहता था इसलिए शादी की।

२०—मै मरीज रहता हूं और कोई तीमारदार नही है इसलिए मैने शादी कर ली।

२१—केवल संयाग स मेरा विवाह हो गया।

२२—जिस साल मेरी शादी हुई उस साल बहुत बड़ी सहालग थी। सबकी शादी होती थी, मेरी भी हो गई।

२३—बिला शादी के कोई अपना हाल पूछने वाला न था।

२४—मैने शादी नही की है, एक आफत मोल ले ली है।

२५—पैसे वाले चचा की अवज्ञा न कर सका।

२६—मै बुडढा होने लगा था, अगर अब न करता तो कब करता।

२७—लोक हित के ख्याल से शादी की।

२८—पड़ोसी बुरा समझते थे इसलिए निकाह कर लिया।

२९—डाक्टरो ने शादी केलिए मजबूर किया।

३०—मेरी कविताओं को कोई दाद न देता था।

३१—मेरी दांत गिरने लगे थे और बाल सफेद हो गए थे इसलिए शादी कर ली।

३२—फौज मे शादीशुदा लोगों को तनख्वाह ज्यादा मिलतीथी इसलिए मैने भी शादी कर ली।

३३—कोई मेरा गुस्सा बर्दाश्त न करता था इसलिए मैने शादी कर ली।

३४—बीवी से ज्यादा कोई अपना समर्थक नही होता इसलिए मैने शादी कर ली।

३५—मै खुद हैरान हूं कि शादी क्यों की।

३६—शादी भाग्य मे लिखीथी इसलिए कर ली।

इसी तरह जितने मुंह उतनी बातें सुनने मे आयी।


शादी की वजह का सारांश

'शादी की वजह' मुंशी प्रेमचंद द्वारा रचित एक अत्यंत हास्यास्पद और व्यंग्यात्मक रचना है, जिसमें लेखक समाज में पुरुषों द्वारा विवाह करने के पीछे दिए जाने वाले विविध, विचित्र और व्यावहारिक कारणों की पड़ताल करते हैं। लेखक की धारणा है कि यद्यपि स्त्री और पुरुष को प्राकृतिक रूप से एक-दूसरे की आवश्यकता होती है, परंतु आधुनिक समय में विवाह केवल एक सामाजिक रस्म या व्यावहारिक मजबूरी बनकर रह गया है।

लेखक जब अनेक शादीशुदा पुरुषों से विवाह का कारण पूछते हैं, तो उन्हें तरह-तरह के उत्तर प्राप्त होते हैं। कुछ लोग कमसिनी में माता-पिता द्वारा विवाह तय कर दिए जाने, सुंदरता के अभिमान, या पड़ोसी की इकलौती बेटी के प्रति सहानुभूति को कारण बताते हैं। एक व्यक्ति उत्तराधिकारी प्राप्त करने की चाह में विवाह करता है, परंतु उसकी सात बेटियां हो जाती हैं और वह इसका दोष अपनी पत्नी की शरारत पर मढ़ता है। कोई अपनी अत्यधिक दौलत ठिकाने लगाने के लिए, तो कोई सगे-संबंधियों की भीड़ और परेशानियों से छुटकारा पाकर शांति प्राप्त करने के लिए विवाह करता है। एक सज्जन जीवन भर दूसरों की शादियों में दिए गए न्योते-उपहारों को वापस वसूलने की नियत से खुद विवाह कर लेते हैं।

इसके अतिरिक्त, लेखक ३६ अन्य पुरुषों द्वारा दिए गए कारणों की एक क्रमबद्ध सूची प्रस्तुत करते हैं। इनमें ससुर के धन-दौलत का प्रदर्शन, नौकरों और रसोइयों की कमी, बीमा पॉलिसी की खानापूरी, ताला लगाने की झंझट से मुक्ति, मां की कसम या अंतिम इच्छा, पहली पत्नी के बच्चों की परवरिश, बीमारी में तीमारदारी, सेना में विवाहितों को अधिक वेतन मिलने का लालच, अपनी कविताओं की दाद पाने की इच्छा, और यहां तक कि अपना गुस्सा सहने वाले व्यक्ति की तलाश जैसे अजीबोगरीब कारण शामिल हैं। लेखक निष्कर्ष निकालते हैं कि जितने मुंह, उतनी बातें सुनने को मिलती हैं और समाज में विवाह के पीछे कोई एक तर्कसंगत कारण नहीं बल्कि भांति-भांति के व्यक्तिगत और सामाजिक बहाने मौजूद हैं।


प्रकाशन इतिहास

प्रकाशन इतिहास अद्यतन किया जा रहा है, बने रहें।


महत्त्व और विषय-विमर्श

  • विवाह संस्था पर हास्य-व्यंग्य: कहानी विवाह जैसी गंभीर सामाजिक संस्था के खोखलेपन और उसके पीछे छिपे विचित्र व्यक्तिगत स्वार्थों पर करारा व्यंग्य करती है।
  • व्यावहारिक और हास्यास्पद कारणों का संकलन: प्रेमचंद ने आम जीवन की व्यावहारिक समस्याओं—जैसे घर की देखभाल, नौकरों की कमी, और सामाजिक दबावों को विवाह के मुख्य कारणों के रूप में रेखांकित किया है।
  • विविध मानवीय मनोवृत्तियों का चित्रण: सूचीबद्ध ३६ कारणों के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों, सोच और मजबूरियों वाली मानवीय मनोवृत्तियों की परतें उघड़ती हैं।
  • सामाजिक रस्म बनाम प्राकृतिक आवश्यकता: रचना यह दर्शाती है कि आधुनिक समाज में विवाह प्राकृतिक जुड़ाव के बजाय एक अनिवार्य सामाजिक औपचारिकता या मजबूरी बन चुका है।
  • कहानी का व्यापक महत्त्व: 'शादी की वजह' प्रेमचंद की व्यंग्यात्मक और मनोरंजक लेखन शैली का बेजोड़ उदाहरण है। यह रचना पाठकों को हंसाने के साथ-साथ इस बात पर सोचने को मजबूर करती है कि सामाजिक रीतियों और विवाह के पीछे इंसानी तर्क कितने विचित्र और हास्यास्पद हो सकते हैं।

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शोध एवं शोध-पत्रों के लिए अकादमिक संदर्भ

Premchand, Munshi. "शादी की वजह." *Munshi Premchand Digital Archive*, https://munshipremchand.com/works/short-stories/shadi-ki-wajah. Accessed 22 Sep. 2026.