Cover Image for Dakshini Africa Mein Sher Ka Shikar (दक्षिणी अफ्रीका में शेर का शिकार) by Munshi Premchand - Short Story
Cover Image for Dakshini Africa Mein Sher Ka Shikar (दक्षिणी अफ्रीका में शेर का शिकार) by Munshi Premchand - Short Story
कहानी••8 मिनट

दक्षिणी अफ्रीका में शेर का शिकार

Dakshini Africa Mein Sher Ka Shikar

प्रेमचंद की बाल-कहानी 'दक्षिणी अफ्रीका में शेर का शिकार' एक शिकारी और उसकी पालतू शेरनी जिल की रोमांचक और अंततः मार्मिक कथा है। नैरोबी में शिकारी एक शेरनी को मारकर उसके दो बच्चों को अपने साथ ले आता है और उनमें से मादा बच्चे जिल को बड़े स्नेह से पालता है। जिल उसके साथ कुत्ते की तरह रहती है और उसकी आवाज पहचानती है। बाद में एक रात शिकारी अनजाने में एक शेर का शिकार करता है और जब वह उसके पास पहुँचता है, तब उसे पता चलता है कि मारा गया शेर कोई और नहीं बल्कि उसकी अपनी प्रिय पालतू शेरनी जिल थी।

पात्र:शिकारी / कथावाचक, जिल (शेरनी), संतरी
स्थान:दक्षिणी अफ्रीका का नैरोबी और उसके आसपास का परिवेश

दक्षिणी अफ्रीका में शेर का शिकार का मूल पाठ

एक मशहूर शिकारी ने एक शेर के शिकार का हाल लिखा है। आज हम उसकी कथा उसी की ज़बान से सुनाते हैं-कई साल हुए एक दिन मैं नौरोबी की एक चौड़ी गली से जा रहा था कि एक शेरनी पर नज़र पड़ी जो अपने दो बच्चों समेत झाड़ियों की तरफ़ चली जा रही थी । शायद शिकार की तलाश में बस्ती में घुस आई थी। उसे देखते ही मैं लपककर अपने घर आया और एक रायफल लेकर फिर उसी तरफ़ चला। संयोग से चांदनी रात थी। मैंने आसानी से शेरनी को मार डाला और उसके दोनों बच्चों को पकड़ लिया। इन बच्चों की उम्र ज्यादा न थी, सिर्फ तीन हफ्ते के मालूम होते थे। एक नर था; दूखरा मादा । मैंने नर का नाम जैक और मादा का जल रखा। जैक तो जल्द बीमार होकर मर गया, जल बच रही । जल झपना नाम समझती और मेरी आवाज़ पहचानती थी । मैं जहाँ जाता, वहाँ कुत्ते की तरह मेरे पीछे-पीछे चलती । मेरे कमरे में फ़र्श पर लेटी रहती थी। अक्सर मेरे पैरों पर सो जाती और जागने के बाद अपने पंजे मेरे घुटनों पर रखकर बिल्ली की तरह मेरा सिर अपने चेहरे पर मलती।

एक दिन चाँदनी रात में जल को साथ लेकर सैर के लिए निकला। हम दोनों खुशी के साथ सड़क पर चले जा रहे थे। मैं यह बिल्कुल भूल गया था कि उस दिन होटल में नाच होनेवाला है । संयोग देखिए कि मैं और जल उस वक्त होटल के पास पहुँचे जब कोए मेहमान सवारी की तलाश में बाहर खड़ा था। उसने जब देखा, एक शेरनी सड़क के बीचों बीच उसकी तरफ़ चली आ रही है, तो वह इतना घबराया कि बयान से बाहर है और सामने की तरफ़ बेतहाशा भागा । उसे भागते देखकर और भी दो-तीन आदमी भाग चले । जल ने समझा यह भी कोए खेल है, वह भी उनके पीछे-पीछे दौड़ी । हंसते-हंसते मेरे पेट में बल पड़ गये, आखिर मैं भी जल के पीछे दौड़ा और बड़ी मुश्किल से जल को पकड़ पाया। यद्यपि उसने किसी को घायल नहीं किया; मगर आनन्द की ज़िन्दगी बितानेवालों की बहादुरी की कलई खुल गई । फिर मैं जल को लेकर चाँदनी रात में कभी बाहर न निकला ।

एक दिन मैं एक जगह दावत खाने गया। वहाँ से अपने बंगले की तरफ चला तो आधी रात हो गई थी। आधा रास्ता तै कर चुका था कि एकाएक बन्दूक चलने की आवाज़ सुनाई दी। ऐसा मालूम हुआ कि कोई आदमी घबराहट में शू श कर रहा है। जरा और आगे बढ़ा तो देखा कि एक संतरी लालटेन के खम्भे पर चढ़ा बदहवासी की हालत में शू-शू कर रहा है। मुझे देखते ही उसने कहा-- साहब, ज़रा बचे रहिएगा; एक शेर बिल्कुल पास खड़ा है और घोड़े को खा रहा है। मैंने इधर-उधर निगाह दौड़ाई तो पचास कदम के फासले पर एक शेर दिखाई दिया । वह सचमुच एक घोड़े को चट कर रहा था । सन्‍तरी के शोर-गुल की उसे बिल्कुल परवाह न थी।

मैंने संतरी को आवाज़ दी कि वह जहाँ है वहीं ठहरा रहे और मैं अकेले एक दोस्त के पास बन्दूक लेने गया। जब रायफल लेकर लौटा तो देखा कि शेर बैठा ओंठ चाट रहा है और सन्तरी ज्यों- का-त्यों खंभे से चिमटा खड़ा है। मैंने फौरन शेर पर बन्दूक चलाई। वह ज़ख़्मी तो हो गया, मगर मरा नहीं । वह बड़े ज़ोर से गरजा और एक तरफ को चल दिया । लेकिन मैं उसे कब छोड़नेवाला था, मैं खून का निशान देखता हुआ उसके पीछे चला। आखिर मैंने उसे खाड़ी के किनारे पर खड़े देखा। अबकी मेरी गोली काम कर गई, शेर गिर पड़ा । मैं खुश-खुश शेर के पास गया और उसे देखते ही पहचान गया । वह मेरी शेरनी जल थी।


दक्षिणी अफ्रीका में शेर का शिकार का सारांश

'दक्षिणी अफ्रीका में शेर का शिकार' प्रेमचंद द्वारा बाल-पाठकों के लिए लिखी गई एक रोमांचक, हास्यपूर्ण और अंततः अत्यंत मार्मिक कहानी है। कहानी एक प्रसिद्ध शिकारी के संस्मरण के रूप में शुरू होती है। नैरोबी की एक गली में शिकारी को दो छोटे बच्चों के साथ एक शेरनी दिखाई देती है। शिकारी तुरंत घर जाकर राइफल लाता है और चाँदनी रात में शेरनी को मार गिराता है। वह उसके तीन हफ्ते के दो छोटे बच्चों (एक नर और एक मादा) को अपने घर ले आता है और उनका नाम जैक और जिल रखता है। जैक बीमारी के कारण मर जाता है, लेकिन जिल जीवित रहती है।

जिल शिकारी के साथ एक वफादार पालतू कुत्ते की तरह घुल-मिल जाती है। वह अपना नाम समझती है, शिकारी की आवाज पहचानती है, उसके पीछे-पीछे घूमती है और रात में उसके कमरे में फर्श पर सोती है। एक बार चाँदनी रात में शिकारी जिल को टहलाने बाहर निकालता है। रास्ते में एक होटल के पास नाच-गाना चल रहा था। होटल के मेहमान एक शेरनी को अपनी ओर आते देखकर घबराकर बेतहाशा भागने लगते हैं। जिल इसे खेल समझकर उनके पीछे दौड़ती है और शिकारी बड़ी मुश्किल से उसे पकड़ पाता है। इस घटना से तथाकथित बहादुर लोगों के डर का मज़ाक उड़ता है।

कहानी का दुखांत मोड़ तब आता है जब एक रात शिकारी दावत से लौट रहा होता है। आधी रात को उसे गोली चलने का शब्द और संतरी का शोर सुनाई देता है। संतरी खंभे पर चढ़ा हुआ बताता है कि एक शेर पास में घोड़े को खा रहा है। शिकारी अपने दोस्त के घर जाकर राइफल लाता है और शेर पर निशाना साधकर गोली चला देता है। शेर घायल होकर भागता है। शिकारी खून के निशानों का पीछा करते हुए खाड़ी के किनारे पहुँचता है और दूसरी गोली चलाकर शेर को मार गिराता है। जब वह उत्साहपूर्वक अपने शिकार के पास जाता है, तो उसे देखकर स्तब्ध रह जाता है। मारा गया शेर कोई जंगली जानवर नहीं, बल्कि उसकी अपनी प्रिय पालतू शेरनी 'जिल' थी।


प्रकाशन इतिहास

प्रकाशन इतिहास अद्यतन किया जा रहा है, बने रहें।


महत्त्व और विषय-विमर्श

  • मनुष्य और पशु के बीच भावनात्मक संबंध: कहानी शिकारी और शेरनी 'जिल' के बीच अगाध प्रेम और लगाव को दर्शाती है। एक हिंसक जंगली पशु भी प्रेम और देखभाल से मनुष्य का वफादार साथी बन सकता है।
  • शिकार का अनपेक्षित और करुण अंत: शिकारी का अति-उत्साह और शिकार की धुन अंततः उसकी अपनी ही प्रिय जिल की दुखद मृत्यु का कारण बनती है। यह दिखाता है कि कैसे बिना विचार किए या अनजाने में उठाया गया कदम जीवन भर का पश्चात्ताप बन जाता है।
  • तथाकथित समाज की कायरता पर हास्य व्यंग्य: होटल के बाहर आमोद-प्रमोद में डूबे समृद्ध लोगों का जिल को देखकर बेतहाशा भागना और संतरी का लालटेन के खंभे पर चढ़ जाना कहानी में हल्का-फुल्का हास्य और व्यंग्य पैदा करता है।
  • साहस और अति-आत्मविश्वास की विडंबना: शिकारी अपनी निशानेबाजी और शिकार करने की क्षमता पर गर्व करता है, लेकिन वही आत्मविश्वास उसके लिए एक त्रासदी बन जाता है क्योंकि वह अपनी ही पालतू शेरनी को पहचान नहीं पाता।
  • कहानी का व्यापक महत्त्व: 'दक्षिणी अफ्रीका में शेर का शिकार' बच्चों में पशु-प्रेम, करुणा और जागरूकता जगाने वाली एक उत्कृष्ट बाल-कहानी है, जो रोमांच और हास्य से शुरू होकर एक विचारोत्तेजक नैतिक और मानवीय मोड़ पर समाप्त होती है।

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शोध एवं शोध-पत्रों के लिए अकादमिक संदर्भ

Premchand, Munshi. "दक्षिणी अफ्रीका में शेर का शिकार." *Munshi Premchand Digital Archive*, https://munshipremchand.com/works/short-stories/dakshini-africa-mein-sher-ka-shikar. Accessed 22 Sep. 2026.