
प्रेम द्वादशी
Prem Dwadashi
प्रेम द्वादशी
Prem Dwadashi
मूल प्रकाशक / संकलन संदर्भ: सरस्वती प्रेस, बनारस
निम्न-मध्यम वर्ग के आर्थिक दबावों, महाजनी शोषण और सामाजिक मर्यादा की 12 कहानियों का संकलन।
ऐतिहासिक संदर्भ एवं पृष्ठभूमि
1926 में प्रकाशित इस संग्रह में प्रेमचंद ने छोटे क्लर्कों, दुकानदारों और महाजनी तंत्र के कुचक्र में पिसे आम इंसानों की आपबीती दर्ज की।
साहित्यिक महत्व एवं सामाजिक प्रभाव
हिंदी साहित्य में ग्रामीण जीवन के साथ-साथ उदीयमान शहरी मध्यमवर्ग की समस्याओं का समावेश।
संग्रह में संकलित कहानियाँ (4)
पुस्तक में शामिल सभी कहानियों की सूची एवं पढ़ने के विकल्प:
विध्वंस
Vidhwans
भुनगी बुढ़िया का भाड़ जमींदार द्वारा तुड़वा दिए जाने के बाद उसकी चिता से पूरे जमींदार के महल के जल जाने की भयानक त्रासदी।
शांति
Shanti
पारिवारिक शांति और मानसिक उथल-पुथल का अध्ययन।
सुभागी
Subhagi
पुत्री सुभागी के कठिन परिश्रम से माता-पिता और कुल के नाम को रोशन करने की स्वाभिमानी कहानी।
नरक का मार्ग
Narak Ka Marg
दुरुर्व्यसनों और अनैतिकता के दुष्परिणाम।