प्रेमाश्रम
Premashram
प्रेमचंद का उपन्यास 'प्रेमाश्रम' किसानों और जमींदारों के संघर्ष, भूमि-अधिकार, शोषण और सामाजिक परिवर्तन की कहानी है।
Rural India
भारतीय गाँवों की यथार्थ तस्वीर, किसानों के जीवन और उनकी समस्याओं पर आधारित कहानियाँ
Premashram
प्रेमचंद का उपन्यास 'प्रेमाश्रम' किसानों और जमींदारों के संघर्ष, भूमि-अधिकार, शोषण और सामाजिक परिवर्तन की कहानी है।
Algyojha
प्रेमचंद की 'अलग्योझा' संयुक्त परिवार के बँटवारे, आर्थिक कठिनाइयों, सौतेले संबंधों, ईर्ष्या और पारिवारिक स्वार्थ की मार्मिक कहानी है। रग्घू, पन्ना और मुलिया के माध्यम से प्रेमचंद दिखाते हैं कि घर का विभाजन केवल संपत्ति का बँटवारा नहीं करता, बल्कि संबंधों और बच्चों के जीवन को भी तोड़ देता है; वहीं त्याग, ममता और पश्चात्ताप टूटे हुए परिवार को फिर से जोड़ सकते हैं।
Do Bailon Ki Katha
प्रेमचंद की कहानी 'दो बैलों की कथा' हीरा और मोती नामक दो बैलों की आज़ादी की कहानी है, जो भारत के स्वतंत्रता संघर्ष का रूपक है।
Pisanhari Ka Kuan
प्रेमचंद की कहानी 'पिसनहारी का कुआँ' एक गरीब विधवा की मेहनत, आत्मसम्मान और लोकसेवा की मार्मिक कथा है। जीवन भर पिसाई करके जमा किए गए उसके रुपये गाँव के लिए कुआँ बनवाने में लगते हैं और उसकी अधूरी इच्छा अंततः उसके पौत्र द्वारा पूरी होती है।
Poos Ki Raat
प्रेमचंद की कहानी 'पूस की रात' किसान हल्कू की कहानी है जो बिना कंबल के जाड़े की रात में अपनी फसल की रखवाली करता है।
Mukti Marg
प्रेमचंद की 'मुक्ति-मार्ग' ग्रामीण जीवन, अहंकार, ईर्ष्या और प्रतिशोध की विनाशकारी शक्ति की कहानी है। किसान झींगुर और गड़ेरिया बुद्धू के बीच एक मामूली खेत-विवाद से दुश्मनी शुरू होती है। झींगुर के अहंकार और क्रोध के कारण बुद्धू उसकी ऊख की फसल जला देता है। बदला लेने के लिए झींगुर हरिहर की सहायता से बुद्धू की बछिया को मरवा देता है और उस पर गोहत्या का आरोप लगवाकर कठोर प्रायश्चित का दंड दिलवाता है। इस दंड से बुद्धू की आर्थिक स्थिति नष्ट हो जाती है और दोनों अंततः मजदूर बन जाते हैं। निर्माण-स्थल पर फिर मिलने के बाद दोनों एक-दूसरे के सामने अपने अपराध स्वीकार करते हैं। उसी क्षण उनके भीतर का बैर समाप्त होता है। कहानी बताती है कि वास्तविक मुक्ति दूसरे को नष्ट करने में नहीं, बल्कि प्रतिशोध और अहंकार से मुक्त होने में है।
Sujan Bhagat
प्रेमचंद की कहानी 'सुजान भगत' एक किसान की आत्मसम्मान और पारिवारिक अधिकार की मार्मिक कथा है। धन और धार्मिक प्रतिष्ठा पाने के बाद सुजान अपने ही घर में अधिकार खो देते हैं, लेकिन फिर कठोर परिश्रम करके अपनी उपयोगिता और सम्मान पुनः प्राप्त करते हैं।
Tawan
प्रेमचंद की 'तावान' स्वदेशी आंदोलन, गरीबी और आर्थिक दबाव के बीच पैदा होने वाले नैतिक संघर्ष की कहानी है। छकौड़ीलाल एक गरीब कपड़ा व्यापारी है जो विदेशी कपड़े के बहिष्कार के आंदोलन में शामिल होता है। लेकिन घर में बूढ़ी माँ, बीमार पत्नी और पाँच बच्चों का खर्च चलाना कठिन हो जाता है। मजबूरी में वह फिर विदेशी कपड़ा बेच देता है। बहिष्कार समिति उस पर 101 रुपये का तावान लगा देती है, जबकि उसके घर में दो दिन से चूल्हा तक नहीं जला है। प्रेमचंद इस घटना के माध्यम से दिखाते हैं कि राष्ट्रीय आंदोलन के आदर्श और गरीब व्यक्ति की आर्थिक वास्तविकता हमेशा एक-दूसरे से आसानी से मेल नहीं खाते। कहानी आंदोलन की भावना का विरोध नहीं करती, बल्कि यह प्रश्न उठाती है कि क्या आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति को सुधार या राष्ट्रहित के नाम पर ऐसी सजा देना न्यायपूर्ण है जो उसके परिवार को भूख के कगार पर पहुँचा दे।