सोज़े वतन - मुंशी प्रेमचंद (नवाब राय)
अंग्रेज़ हुकूमत द्वारा ज़ब्त एवं जलाई गई (1909)

सोज़े वतन — क्रांति की पहली चिंगारी

सन् 1908 में कानपुर के ज़माना प्रेस से प्रकाशित उर्दू संग्रह। लेखक का नाम था — नवाब राय। इस संग्रह की प्रखर राष्ट्रीयता से ब्रिटिश शासन दहल उठा और ब्रिटिश कलेक्टर ने इसकी सभी 500 प्रतियों को ज़ब्त कर सरेआम जलवा दिया।

ऐतिहासिक संदर्भ: जब 'नवाब राय' बने 'प्रेमचंद'

सन् 1908 में जब सोज़े वतन प्रकाशित हुआ, उस समय धनपत राय सरकारी शिक्षा विभाग में सब-डिप्टी इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत थे और उर्दू में 'नवाब राय' के नाम से लिखते थे। सोज़े वतन की कहानियों ने भारतीय जनमानस में स्वतंत्रता की अलख जगाई।

जब हमीरपुर के कलेक्टर तक यह किताब पहुँची, तो उन्होंने नवाब राय को तलब किया। कलेक्टर ने कहानियों को राजद्रोही ठहराते हुए चेतावनी दी और सोज़े वतन की सभी उपलब्ध 500 प्रतियों को सरेआम ज़ब्त करके जला दिया गया। बिना सरकारी अनुमति के लिखने पर प्रतिबंध लगा दिया गया।

सरकारी नौकरी बचाते हुए राष्ट्र-सेवा जारी रखने के लिए उनके मित्र दया नारायण निगम (संपादक, ज़माना) ने उन्हें एक नया छद्म नाम दिया — 'प्रेमचंद'। इस प्रकार सोज़े वतन की ज़ब्ती ने हिंदी साहित्य को उसका सबसे महान लेखक 'मुंशी प्रेमचंद' प्रदान किया।

सोज़े वतन की 5 अमर कहानियाँ

संग्रह में शामिल सभी कहानियों की सूची एवं विवरण:

कुल 5 कहानियाँ
1

दुनिया का सबसे अनमोल रतन

पढ़ने के लिए उपलब्ध

Duniya Ka Sabse Anmol Ratan (1908)

दिलफ़िगार अपनी प्रेमिका दिलफ़रेब को पाने के लिए दुनिया का सबसे अनमोल रत्न खोजने निकलता है। कैदी के आँसू और सती की राख के बाद उसे अहसास होता है कि वतन की आज़ादी के लिए बहा खून का आखिरी कतरा ही दुनिया का सबसे अनमोल रत्न है।

2

शेख मखमूर

पढ़ने के लिए उपलब्ध

Sheikh Makhmoor (1908)

एक निष्ठावान योद्धा की देशभक्ति और उसके स्वाभिमान की कहानी जो अपने देश की रक्षा के लिए सर्वस्व न्योछावर कर देता है।

3

यही मेरा वतन है

पढ़ने के लिए उपलब्ध

Yahi Mera Watan Hai (1908)

दशकों बाद अपनी जन्मभूमि लौटने वाले एक वृद्ध की कहानी, जो अपने देश की मिट्टी और अपनी जड़ों से जुड़ाव को जीवन का सबसे बड़ा धन मानता है।

4

शोक का पुरस्कार

पढ़ने के लिए उपलब्ध

Shok Ka Puraskar (1908)

राष्ट्रीय चेतना से ओत-प्रोत रचना जिसमें देशप्रेम और त्याग की उच्चतम भावना का निरूपण किया गया है।

5

सांसारिक प्रेम और देश-प्रेम

पढ़ने के लिए उपलब्ध

Sansarik Prem Aur Desh Prem (1908)

व्यक्तिगत प्रेम और देश-प्रेम के बीच के द्वंद्व को दर्शाती कहानी, जो यह संदेश देती है कि मातृभूमि की रक्षा का प्रेम सभी सांसारिक बंधनों से ऊपर है।