प्रेम पूर्णिमा - मुंशी प्रेमचंद कहानी संग्रह
कथा-संग्रह1924
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प्रेम पूर्णिमा

Prem Purnima

मुंशी प्रेमचंद
मूल जीवनकाल संग्रह (1907–1936)प्रकाशन वर्ष: 1924

प्रेम पूर्णिमा

Prem Purnima

मूल प्रकाशक / संकलन संदर्भ: सरस्वती प्रेस, बनारस

पारिवारिक संबंधों, स्त्री संवेदना और ग्रामीण अर्थतंत्र के द्वंद्वों को सूक्ष्मता से उकेरता संकलन।

प्रमुख विषय:#स्त्री अधिकार#घरेलू संबंध#ग्रामीण गरिमा

ऐतिहासिक संदर्भ एवं पृष्ठभूमि

1924 में प्रकाशित इस संग्रह में प्रेमचंद ने पारंपरिक संयुक्त परिवारों में महिलाओं के आर्थिक एवं सामाजिक शोषण पर करारा प्रकाश डाला है।

साहित्यिक महत्व एवं सामाजिक प्रभाव

स्त्री विमर्श और नारी स्वाभिमान को हिंदी कथा-साहित्य में गरिमामय स्थान देने वाला संग्रह।

संग्रह में संकलित कहानियाँ (5)

पुस्तक में शामिल सभी कहानियों की सूची एवं पढ़ने के विकल्प:

कुल 5 कहानियाँ
#01पढ़ने हेतु उपलब्ध

बेटी का धन

Beti Ka Dhan

कन्याधन और शादी-विवाह में होने वाले कुरीतियों पर आधारित मार्मिक कथा।

#02पढ़ने हेतु उपलब्ध

ईश्वरीय न्याय

Eeshwariya Nyay

सत्य और निष्पक्ष न्याय की नैतिक महत्ता।

#03आर्काइव सूचकांक

गृह दाह

Griha Daha

पारिवारिक विघटन की त्रासदी।

विवरण उपलब्ध
#04आर्काइव सूचकांक

तावान

Tavan

दंड और प्रायश्चित की कहानी।

विवरण उपलब्ध
#05आर्काइव सूचकांक

निर्वासन

Nirwasan

घर-परिवार से बेदखल किए जाने का दुख।

विवरण उपलब्ध