
कथा-संग्रह1928
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प्रेम प्रमोद
Prem Pramod
मुंशी प्रेमचंद
मूल जीवनकाल संग्रह (1907–1936)प्रकाशन वर्ष: 1928
प्रेम प्रमोद
Prem Pramod
मूल प्रकाशक / संकलन संदर्भ: सरस्वती प्रेस, बनारस
भारतीय किसान की बेबसी, कड़कड़ाती ठंड की रात और कठोर यथार्थ को उजागर करती कहानियों का संग्रह।
प्रमुख विषय:#किसान की बदहाली#शीतकालीन यथार्थ#आलोचनात्मक यथार्थवाद
ऐतिहासिक संदर्भ एवं पृष्ठभूमि
1928 में प्रकाशित इस संग्रह में "पूछ की रात" संकलित है, जो विश्व साहित्य की महानतम यथार्थवादी रचनाओं में गिनी जाती है।
साहित्यिक महत्व एवं सामाजिक प्रभाव
प्रेमचंद के "आलोचनात्मक यथार्थवाद" का प्रखर रूप, जहाँ समाधान थोपने की जगह यथार्थ की नग्न तस्वीर रखी गई।
संग्रह में संकलित कहानियाँ (4)
पुस्तक में शामिल सभी कहानियों की सूची एवं पढ़ने के विकल्प:
#01पढ़ने हेतु उपलब्ध
पूछ की रात
Poos Ki Raat
हल्कू और उसके कुत्ते जबरा की पूछ की कड़कड़ाती ठंड में खेत रखवाली और नीलगायों द्वारा पूरी फसल चर जाने के बाद हल्कू की बेबस राहत।
#02पढ़ने हेतु उपलब्ध
अलग्योझा
Algyojha
भाइयों के बँटवारे (अलग्योझा) के बाद पैदा हुई दूरियाँ और स्नेह।
#03पढ़ने हेतु उपलब्ध
चोरी
Chori
शंका और सच्चाई के बीच की मनोवैज्ञानिक कहानी।
#04पढ़ने हेतु उपलब्ध
धोखा
Dhokha
विश्वासघात और सामाजिक यथार्थ।