
प्रेम पचीसी
Prem Pachisi
प्रेम पचीसी
Prem Pachisi
मूल प्रकाशक / संकलन संदर्भ: सरस्वती प्रेस, बनारस
प्रेमचंद के साहित्यिक जीवन के पूर्वार्द्ध की 25 कालजयी कहानियों का सुप्रसिद्ध दो-खंडीय संकलन।
ऐतिहासिक संदर्भ एवं पृष्ठभूमि
1923 में प्रेमचंद द्वारा स्थापित बनारस के "सरस्वती प्रेस" से प्रकाशित यह दो-खंडीय संग्रह मील का पत्थर साबित हुआ। इसमें "शतरंज के खिलाड़ी" और "आत्माराम" जैसी कालजयी रचनाएँ संकलित थीं।
साहित्यिक महत्व एवं सामाजिक प्रभाव
अवध के नवाबों के पतनशील सामंती ढाँचे पर व्यंग्य तथा आम आदमी के मनोवैज्ञानिक विश्लेषण का अद्भुत समन्वय।
संग्रह में संकलित कहानियाँ (10)
पुस्तक में शामिल सभी कहानियों की सूची एवं पढ़ने के विकल्प:
शतरंज के खिलाड़ी
Shatranj Ke Khiladi
लखनऊ के दो नवाबों (मिर्ज़ा सज्जाद अली और मीर रोषन अली) का ईस्ट इंडिया कंपनी के आगमन पर शतरंज में डूबे रहने की ऐतिहासिक त्रासदी।
आत्माराम
Atmaram
महादेव सोनार और उसके तोते आत्माराम के संबंध पर आधारित आत्मीय कहानी।
बूढ़ी काकी
Budhi Kaki
परिवार में उपेक्षित वृद्धा काकी की क्षुधा और मासूम बालक लाडली की करुणा।
दुर्गा का मंदिर
Durga Ka Mandir
विश्वास, अंधविश्वास और सत्य के बीच का द्वंद्व।
सवा सेर गेहूँ
Sawa Ser Gehun
शंभर महतो द्वारा लिए गए सवा सेर गेहूँ के कर्ज के पीढ़ी दर पीढ़ी बंधुआ मजदूरी में बदलने की हृदयविदारक कहानी।
बेटे वाली विधवा
Bete Wali Widhwa
पुत्रवती विधवा की संपत्ति और परिवार में अधिकारों की दुर्दशा।
गृहदाह
Grihadaha
पारिवारिक कलह और गलतफहमियों का अंत।
मनोरथ
Manorath
मानव मन की अधूरी इच्छाओं की सुंदर अभिव्यक्ति।
मंत्र
Mantra
डॉ. चड्ढा द्वारा निर्धन बालक का इलाज न करने और बाद में भगत द्वारा सर्पदंश से डॉक्टर के पुत्र की निस्वार्थ रक्षा।
विचक्षण
Vichakshan
सूक्ष्म बुद्धिमत्ता और तीक्ष्ण विचार शक्ति का आख्यान।